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Saturday, June 19, 2021

 श्री चन्द्र कवचम्


॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥
अस्य श्रीचन्द्रकवचस्तोत्रमन्त्रस्य गौतम् ऋषिः ।
अनुष्टुप् छन्दः, श्रीचन्द्रो देवता, चन्द्रप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।
समं चतुर्भुजं वन्दे केयूरमुकुटोज्ज्वलम् ।
वासुदेवस्य नयनं शङ्करस्य च भूषणम् ॥ १॥
एवं ध्यात्वा जपेन्नित्यं शशिनः कवचं शुभम् ।
शशी पातु शिरोदेशं भालं पातु कलानिधिः ॥ २॥
चक्षुषी चन्द्रमाः पातु श्रुती पातु निशापतिः ।
प्राणं क्षपाकरः पातु मुखं कुमुदबान्धवः ॥ ३॥
पातु कण्ठं च मे सोमः स्कन्धे जैवातृकस्तथा ।
करौ सुधाकरः पातु वक्षः पातु निशाकरः ॥ ४॥
हृदयं पातु मे चन्द्रो नाभिं शङ्करभूषणः ।
मध्यं पातु सुरश्रेष्ठः कटिं पातु सुधाकरः ॥ ५॥
ऊरू तारापतिः पातु मृगाङ्को जानुनी सदा ।
अब्धिजः पातु मे जङ्घे पातु पादौ विधुः सदा ॥ ६॥
सर्वाण्यन्यानि चाङ्गानि पातु चन्द्वोऽखिलं वपुः ।
एतद्धि कवचं दिव्यं भुक्तिमुक्तिप्रदायकम् ।
यः पठेच्छृणुयाद्वापि सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ ७॥ 
॥ इति श्री चन्द्र कवचं सम्पूर्णम् ॥

Wednesday, February 17, 2021


चन्द्र स्तोत्र || 


श्वेताम्बर: श्वेतवपु: किरीटी, श्वेतद्युतिर्दण्डधरो द्विबाहु: ।

चन्द्रो मृतात्मा वरद: शशांक:, श्रेयांसि मह्यं प्रददातु देव: ।।1।।


दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम ।

नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम ।।2।।


क्षीरसिन्धुसमुत्पन्नो रोहिणी सहित: प्रभु: ।

हरस्य मुकुटावास: बालचन्द्र नमोsस्तु ते ।।3।।


सुधायया यत्किरणा: पोषयन्त्योषधीवनम ।

सर्वान्नरसहेतुं तं नमामि सिन्धुनन्दनम ।।4।।


राकेशं तारकेशं च रोहिणीप्रियसुन्दरम ।

ध्यायतां सर्वदोषघ्नं नमामीन्दुं मुहुर्मुहु: ।।5।।

इति मन्त्रमहार्णवे चन्द्रमस: स्तोत्रम

Monday, February 15, 2021

श्री चंद्र देव आरती


ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।


रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।
दीन दयाल दयानिधि, भव बंधन हारी।

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।


योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, संत करें सेवा।


वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।


शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे।


विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें।

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।

चन्द्र ग्रहण के वक़्त मंत्र पूजा और साधना -


1. चन्द्र ग्रहण वाले दिन मंत्र जाप में आप अपने गुरु, इष्ट देवता या राशि इष्ट देव का मंत्र जाप कर सकते हैं।

2. यदि आप चंद्र ग्रहण वाले दिन देवी श्री लक्ष्मी माँ जी की साधना करना चाहते हो तो बताये जा रहे चन्द्र ग्रहण मंत्र का जाप करें।
मंत्र : “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नम:” !

3. यदि आप इस चंद्र ग्रहण वाले दिन देवी श्री दुर्गा जी की साधना करना चाहते हो तो हमारे बताए अनुसार Chandra Grahan Mantra का जाप करें।
मंत्र : “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥” !


4. जिस भी जातक का कोई गुरु नहीं है तो वो Chandra Grahan Mantra के अनुसार भगवान् शिव जी का पंचाक्षरी
मंत्र : “नमः शिवाय” या भगवान् विष्णु जी का मंत्र : “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करना चाहिए।

5. यदि आप इस चंद्र ग्रहण में भगवान् श्री गणेश जी साधना करना चाहते हो तो हमारे द्वारा बताये जा रहे Chandra Grahan Mantra का जाप करें।
मंत्र : “ॐ गं गणपतये नमः” !

6. यदि आप इस चंद्र ग्रहण वाले दिन देवी श्री बाला सुंदरी जी की साधना करना चाहते हो तो बताये जा रहे चन्द्र ग्रहण मंत्र का जाप करें।
मंत्र : “ऐं क्लीं सौः” !

7. यदि आप इस चंद्र ग्रहण के दिन देवी श्री कामाख्या जी की साधना करना चाहते हो तो बताये जा रहे Chandra Grahan Mantra का जाप करें।
मंत्र : “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कामाख्यै स्वाहा” !

8. यदि आप चंद्र ग्रहण में भगवान श्री हनुमान जी की साधना करना चाहते हो तो बताये जा रहे चन्द्र ग्रहण मंत्र का जाप कीजिये।
मंत्र : “ॐ नमो भगवते हनुमते महा रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा” !

9. यदि आप चंद्र ग्रहण में देवी श्री महाकाली जी की साधना करना चाहते हो तो बताये जा रहे चन्द्र ग्रहण मंत्र का जाप करें।
मंत्र : “क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा” !

10. यदि आप इस चंद्र ग्रहण में देवी श्री बगलामुखी जी की साधना करना चाहते हो तो बताये जा रहे चन्द्र ग्रहण मंत्र का जाप करें।
मंत्र : “ॐ आं ह्ल्रीं क्रों हुं फट् स्वाहा” !

11. यदि इस चंद्र ग्रहण वाले दिन को आप देवी श्री गायत्री जी की साधना करना चाहते हो तो हमारे द्वारा बताये जा रहे Chandra Grahan Mantra का जाप करें।
मंत्र : “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्” !
चन्द्र देव कवच -

श्रीचंद्रकवचस्तोत्रमंत्रस्य गौतम ऋषिः । अनुष्टुप् छंदः।
चंद्रो देवता । चन्द्रप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।

समं चतुर्भुजं वन्दे केयूरमुकुटोज्ज्वलम् ।
वासुदेवस्य नयनं शंकरस्य च भूषणम् ॥ १ ॥

एवं ध्यात्वा जपेन्नित्यं शशिनः कवचं शुभम् ।
शशी पातु शिरोदेशं भालं पातु कलानिधिः ॥ २ ॥

चक्षुषी चन्द्रमाः पातु श्रुती पातु निशापतिः ।
प्राणं क्षपाकरः पातु मुखं कुमुदबांधवः ॥ ३ ॥

पातु कण्ठं च मे सोमः स्कंधौ जैवा तृकस्तथा ।
करौ सुधाकरः पातु वक्षः पातु निशाकरः ॥ ४ ॥

हृदयं पातु मे चंद्रो नाभिं शंकरभूषणः ।
मध्यं पातु सुरश्रेष्ठः कटिं पातु सुधाकरः ॥ ५ ॥

ऊरू तारापतिः पातु मृगांको जानुनी सदा ।
अब्धिजः पातु मे जंघे पातु पादौ विधुः सदा ॥ ६ ॥

सर्वाण्यन्यानि चांगानि पातु चन्द्रोSखिलं वपुः ।
एतद्धि कवचं दिव्यं भुक्ति मुक्ति प्रदायकम् ॥
यः पठेच्छरुणुयाद्वापि सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ ७ ॥


॥ इति श्रीब्रह्मयामले चंद्रकवचं संपूर्णम् ॥
चन्द्र अष्टोत्तर शतनामावली || 

ॐ श्रीमतॆ नमः ।
ॐ शशिधराय नमः ।
ॐ चंद्राय नमः ।
ॐ ताराधीशाय नमः ।
ॐ निशाकराय नमः ।
ॐ सुधानिधयॆ नमः ।
ॐ सदाराध्याय नमः ।
ॐ सत्पतयॆ नमः ।
ॐ साधुपूजिताय नमः ।
ॐ जितॆंद्रियाय नमः ॥ १० ॥


ॐ जयॊद्यॊगाय नमः ।
ॐ ज्यॊतिश्चक्रप्रवर्तकाय नमः ।
ॐ विकर्तनानुजाय नमः ।
ॐ वीराय नमः ।
ॐ विश्वॆशाय नमः ।
ॐ विदुषांपतयॆ नमः ।
ॐ दॊषाकराय नमः ।
ॐ दुष्टदूराय नमः ।
ॐ पुष्टिमतॆ नमः ।
ॐ शिष्टपालकाय नमः ॥ २० ॥


ॐ अष्टमूर्तिप्रियाय नमः ।
ॐ अनंताय नमः ।
ॐ अष्टदारुकुठारकाय नमः ।
ॐ स्वप्राकाशाय नमः ।
ॐ प्राकाशात्मनॆ नमः ।
ॐ द्युचराय नमः ।
ॐ दॆवभॊजनाय नमः ।
ॐ कळाधराय नमः ।
ॐ कालहॆतवॆ नमः ।
ॐ कामकृताय नमः ॥ ३० ॥


ॐ कामदायकाय नमः ।
ॐ मृत्युसंहारकाय नमः ।
ॐ अमर्त्याय नमः ।
ॐ नित्यानुष्ठानदाय नमः ।
ॐ क्षपाकराय नमः ।
ॐ क्षीणपापाय नमः ।
ॐ क्षयवृद्धिसमन्विताय नमः ।
ॐ जैवातृकाय नमः ।
ॐ शुचयॆ नमः ।
ॐ शुभ्राय नमः ॥ ४० ॥


ॐ जयिनॆ नमः ।
ॐ जयफलप्रदाय नमः ।
ॐ सुधामयाय नमः ।
ॐ सुरस्वामिनॆ नमः ।
ॐ भक्तानामिष्टदायकाय नमः ।
ॐ भुक्तिदाय नमः ।
ॐ मुक्तिदाय नमः ।
ॐ भद्राय नमः ।
ॐ भक्तदारिद्र्यभंजनाय नमः ।
ॐ सामगानप्रियाय नमः ॥ ५० ॥


ॐ सर्वरक्षकाय नमः ।
ॐ सागरॊद्भवाय नमः ।
ॐ भायांतकृतॆ नमः ।
ॐ भक्तिगम्याय नमः ।
ॐ भवबंधविमॊचनाय नमः ।
ॐ जगत्प्रकाशकिरणाय नमः ।
ॐ जगदानंदकारणाय नमः ।
ॐ निस्सपत्नाय नमः ।
ॐ निराहाराय नमः ।
ॐ निर्विकाराय नमः ॥ ६० ॥


ॐ निरामयाय नमः ।
ॐ भूच्छायाच्छादिताय नमः ।
ॐ भव्याय नमः ।
ॐ भुवनप्रतिपालकाय नमः ।
ॐ सकलार्तिहराय नमः ।


ॐ स्ॐयजनकाय नमः ।
ॐ साधुवंदिताय नमः ।
ॐ सर्वागमज्ञाय नमः ।
ॐ सर्वज्ञाय नमः ।
ॐ सनकादिमुनिस्तुताय नमः ॥ ७० ॥


ॐ सितच्छत्रध्वजॊपॆताय नमः ।
ॐ सितांगाय नमः ।
ॐ सितभूषणाय नमः ।
ॐ श्वॆतमाल्यांबरधराय नमः ।
ॐ श्वॆतगंधानुलॆपनाय नमः ।
ॐ दशाश्वरथसंरूढाय नमः ।
ॐ दंडपाणयॆ नमः ।
ॐ धनुर्धराय नमः ।
ॐ कुंदपुष्पॊज्वलाकाराय नमः ।
ॐ नयनाब्जसमुद्भवाय नमः ॥ ८० ॥


ॐ आत्रॆयगॊत्रजाय नमः ।
ॐ अत्यंतविनयाय नमः ।
ॐ प्रियदायकाय नमः ।
ॐ करुणारससंपूर्णाय नमः ।
ॐ कर्कटप्रभुवॆ नमः ।
ॐ अव्ययाय नमः ।
ॐ चतुरश्रासनारूढाय नमः ।


ॐ चतुराय नमः ।
ॐ दिव्यवाहनाय नमः ।
ॐ विवस्वन्मंडलाग्नॆयवासाय नमः ॥ ९० ॥
ॐ वसुसमृद्धिदाय नमः ।
ॐ महॆश्वरप्रियाय नमः ।
ॐ दांताय नमः ।
ॐ मॆरुगॊत्रप्रदक्षिणाय नमः ।


ॐ ग्रहमंडलमध्यस्थाय नमः ।
ॐ ग्रसितार्काय नमः ।
ॐ ग्रहाधिपाय नमः ।
ॐ द्विजराजाय नमः ।
ॐ द्युतिलकाय नमः ।
ॐ द्विभुजाय नमः ॥ १०० ॥


ॐ औदुंबरनागवासाय नमः ।
ॐ उदाराय नमः ।
ॐ रॊहिणीपतयॆ नमः ।
ॐ नित्यॊदयाय नमः ।
ॐ मुनिस्तुत्याय नमः ।
ॐ नित्यानंदफलप्रदाय नमः ।
ॐ सकलाह्लादनकराय नमः ।
ॐ पलाशसमिधप्रियाय नमः ॥ १०८ ॥


॥ इति श्री चंद्राष्टॊत्तर शतनामावळिः संपूर्णम्‌ ॥
चन्द्र ग्रह के मंत्र || 


चन्द्र वैदिक मंत्र || 
ऊँ इमं देवा असपत्नं ग्वं सुवध्यं । महते क्षत्राय महते ज्यैश्ठाय महते जानराज्यायेन्दस्येन्द्रियाय इमममुध्य पुत्रममुध्यै पुत्रमस्यै विश वोsमी राज: सोमोsस्माकं ब्राह्माणाना ग्वं राजा ।


चन्द्र तांत्रिक मंत्र ||
ऊँ ऎं क्लीं सोमाय नम: ।
ऊँ श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नम: ।
ऊँ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

चन्द्र एकाक्षरी बीज मंत्र || 
ऊँ सों सोमाय नम:

चन्द्र का पौराणिक मंत्र ||
ऊँ दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम । नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुटभूषणम ।।

चन्द्र गायत्री मंत्र || 
“ऊँ अमृतंग अन्गाये विधमहे कलारुपाय धीमहि, तन्नो सोम प्रचोदयात ” ।।