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Saturday, February 20, 2021

श्री कुबेर आरती


ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे ,
स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे।


शरण पड़े भगतों के,
भण्डार कुबेर भरे।


॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥


शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े।


दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े ॥


॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥


स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे।


योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार करैं॥


॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥


गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे।


दुख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करें॥


॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥


भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने।


मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने॥


॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥


बल बुद्धि विद्या दाता,
हम तेरी शरण पड़े,
स्वामी हम तेरी शरण पड़े


अपने भक्त जनों के ,
सारे काम संवारे॥


॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥


मुकुट मणी की शोभा,
मोतियन हार गले,
स्वामी मोतियन हार गले।


अगर कपूर की बाती,
घी की जोत जले॥


॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥


यक्ष कुबेर जी की आरती ,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे ।


कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे।


॥ इति श्री कुबेर आरती ॥

Monday, February 15, 2021

श्री कुबेर अष्टोत्तर शतनामावली


ॐ कुबेराय नमः ॥
ॐ धनदाय नमः ॥
ॐ श्रीमाते नमः ॥
ॐ यक्षेशाय नमः ॥
ॐ गुह्य​केश्वराय नमः ॥
ॐ निधीशाय नमः ॥
ॐ शङ्करसखाय नमः ॥
ॐ महालक्ष्मीनिवासभुवये नमः ॥
ॐ महापद्मनिधीशाय नमः ॥
ॐ पूर्णाय नमः ॥ 10 ॥


ॐ पद्मनिधीश्वराय नमः ॥
ॐ शङ्ख्यनिधिनाथाय नमः ॥
ॐ मकराख्यनिधिप्रियाय नमः ॥
ॐ सुखसम्पतिनिधीशाय नमः ॥
ॐ मुकुन्दनिधिनायकाय नमः ॥
ॐ कुन्दाक्यनिधिनाथाय नमः ॥
ॐ नीलनित्याधिपाय नमः ॥
ॐ महते नमः ॥
ॐ वरन्नित्याधिपाय नमः ॥
ॐ पूज्याय नमः ॥ 20 ॥

ॐ लक्ष्मिसाम्राज्यदायकाय नमः ॥
ॐ इलपिलापतये नमः ॥
ॐ कोशाधीशाय नमः ॥
ॐ कुलोचिताय नमः ॥
ॐ अश्वारूढाय नमः ॥
ॐ विश्ववन्द्याय नमः ॥
ॐ विशेषज्ञानाय नमः ॥
ॐ विशारदाय नमः ॥
ॐ नलकूबरनाथाय नमः ॥
ॐ मणिग्रीवपित्रे नमः ॥ 30 ॥

ॐ गूढमन्त्राय नमः ॥
ॐ वैश्रवणाय नमः ॥
ॐ चित्रलेखामनःप्रियाय नमः ॥
ॐ एकपिनाकाय नमः ॥
ॐ अलकाधीशाय नमः ॥
ॐ पौलस्त्याय नमः ॥
ॐ नरवाहनाय नमः ॥
ॐ कैलासशैलनिलयाय नमः ॥
ॐ राज्यदाय नमः ॥
ॐ रावणाग्रजाय नमः ॥ 40 ॥

ॐ चित्रचैत्ररथाय नमः ॥
ॐ उद्यानविहाराय नमः ॥
ॐ विहरसुकुथूहलाय नमः ॥
ॐ महोत्सहाय नमः ॥
ॐ महाप्राज्ञाय नमः ॥
ॐ सदापुष्पक वाहनाय नमः ॥
ॐ सार्वभौमाय नमः ॥
ॐ अङ्गनाथाय नमः ॥
ॐ सोमाय नमः ॥
ॐ सौम्यादिकेश्वराय नमः ॥ 50 ॥

ॐ पुण्यात्मने नमः ॥
ॐ पुरूहुतश्रियै नमः ॥
ॐ सर्वपुण्यजनेश्वराय नमः ॥
ॐ नित्यकीर्तये नमः ॥
ॐ निधिवेत्रे नमः ॥
ॐ लंकाप्राक्तन नायकाय नमः ॥
ॐ यक्षिनीवृताय नमः ॥
ॐ यक्षाय नमः ॥
ॐ परमशान्तात्मने नमः ॥
ॐ यक्षराजे नमः ॥ 60 ॥

ॐ यक्षिणि हृदयाय नमः ॥
ॐ किन्नरेश्वराय नमः ॥
ॐ किंपुरुशनाथाय नमः ॥
ॐ नाथाय नमः ॥
ॐ खट्कायुधाय नमः ॥
ॐ वशिने नमः ॥
ॐ ईशानदक्ष पार्स्वस्थाय नमः ॥
ॐ वायुवाय समास्रयाय नमः ॥
ॐ धर्ममार्गैस्निरताय नमः ॥
ॐ धर्मसम्मुख संस्थिताय नमः ॥ 70 ॥

ॐ नित्येश्वराय नमः ॥
ॐ धनाधयक्षाय नमः ॥
ॐ अष्टलक्ष्म्याश्रितलयाय नमः ॥
ॐ मनुष्य धर्मण्यै नमः ॥
ॐ सकृताय नमः ॥
ॐ कोष लक्ष्मी समाश्रिताय नमः ॥
ॐ धनलक्ष्मी नित्यवासाय नमः ॥
ॐ धान्यलक्ष्मीनिवास भुवये नमः ॥
ॐ अश्तलक्ष्मी सदवासाय नमः ॥
ॐ गजलक्ष्मी स्थिरालयाय नमः ॥ 80 ॥

ॐ राज्यलक्ष्मीजन्मगेहाय नमः ॥
ॐ धैर्यलक्ष्मी-कृपाश्रयाय नमः ॥
ॐ अखण्डैश्वर्य संयुक्ताय नमः ॥
ॐ नित्यानन्दाय नमः ॥
ॐ सुखाश्रयाय नमः ॥
ॐ नित्यतृप्ताय नमः ॥
ॐ निधित्तरै नमः ॥
ॐ निराशाय नमः ॥
ॐ निरुपद्रवाय नमः ॥
ॐ नित्यकामाय नमः ॥ 90 ॥

ॐ निराकाङ्क्षाय नमः ॥
ॐ निरूपाधिकवासभुवये नमः ॥
ॐ शान्ताय नमः ॥
ॐ सर्वगुणोपेताय नमः ॥
ॐ सर्वज्ञाय नमः ॥
ॐ सर्वसम्मताय नमः ॥
ॐ सर्वाणिकरुणापात्राय नमः ॥
ॐ सदानन्दक्रिपालयाय नमः ॥
ॐ गन्धर्वकुलसंसेव्याय नमः ॥
ॐ सौगन्धिककुसुमप्रियाय नमः ॥ 100 ॥

ॐ स्वर्णनगरीवासाय नमः ॥
ॐ निधिपीठ समस्थायै नमः ॥
ॐ महामेरुत्तरस्थायै नमः ॥
ॐ महर्षिगणसंस्तुताय नमः ॥
ॐ तुष्टाय नमः ॥
ॐ शूर्पणकज्येष्ठाय नमः ॥
ॐ शिवपूजारताय नमः ॥
ॐ अनघाय नमः ॥ 108 ॥

ॐ राजयोगसमायुक्ताय नमः ॥
ॐ राजसेखरपूज्याय नमः ॥
ॐ राजराजाय नमः ॥ 111 ॥

॥ इति श्री कुबेर अष्टोत्तर शतनामावलिः संपूर्णम्‌ ॥

Saturday, February 13, 2021

श्री कुबेर चालीसा


॥ दोहा ॥

जैसे अटल हिमालय और जैसे अडिग सुमेर ।
ऐसे ही स्वर्ग द्वार पै, अविचल खड़े कुबेर ॥
विघ्न हरण मंगल करण, सुनो शरणागत की टेर ।
भक्त हेतु वितरण करो, धन माया के ढ़ेर ॥

॥ चौपाई ॥

जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी ।
धन माया के तुम अधिकारी ॥

तप तेज पुंज निर्भय भय हारी ।
पवन वेग सम सम तनु बलधारी ॥

स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी ।
सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी ॥

यक्ष यक्षणी की है सेना भारी ।
सेनापति बने युद्ध में धनुधारी ॥

महा योद्धा बन शस्त्र धारैं ।
युद्ध करैं शत्रु को मारैं ॥

सदा विजयी कभी ना हारैं ।
भगत जनों के संकट टारैं ॥

प्रपितामह हैं स्वयं विधाता ।
पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता ॥

विश्रवा पिता इडविडा जी माता ।
विभीषण भगत आपके भ्राता ॥

शिव चरणों में जब ध्यान लगाया ।
घोर तपस्या करी तन को सुखाया ॥

शिव वरदान मिले देवत्य पाया ।
अमृत पान करी अमर हुई काया ॥

धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में ।
देवी देवता सब फिरैं साथ में ॥

पीताम्बर वस्त्र पहने गात में ।
बल शक्ति पूरी यक्ष जात में ॥

स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं ।
त्रिशूल गदा हाथ में साजैं ॥

शंख मृदंग नगारे बाजैं ।
गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं ॥

चौंसठ योगनी मंगल गावैं ।
ऋद्धि सिद्धि नित भोग लगावैं ॥

दास दासनी सिर छत्र फिरावैं ।
यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढूलावैं ॥

ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं ।
देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं ॥

पुरुषोंमें जैसे भीम बली हैं ।
यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं ॥

भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं ।
पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं ॥

नागों में जैसे शेष बड़े हैं ।
वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं ॥

कांधे धनुष हाथ में भाला ।
गले फूलों की पहनी माला ॥

स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला ।
दूर दूर तक होए उजाला ॥

कुबेर देव को जो मन में धारे ।
सदा विजय हो कभी न हारे ।

बिगड़े काम बन जाएं सारे ।
अन्न धन के रहें भरे भण्डारे ॥

कुबेर गरीब को आप उभारैं ।
कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं ॥

कुबेर भगत के संकट टारैं ।
कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं ॥

शीघ्र धनी जो होना चाहे ।
क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं ॥

यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं ।
दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं ॥

भूत प्रेत को कुबेर भगावैं ।
अड़े काम को कुबेर बनावैं ॥

रोग शोक को कुबेर नशावैं ।
कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं ॥

कुबेर चढ़े को और चढ़ादे ।
कुबेर गिरे को पुन: उठा दे ॥

कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे ।
कुबेर भूले को राह बता दे ॥

प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे ।
भूखे की भूख कुबेर मिटा दे ॥

रोगी का रोग कुबेर घटा दे ।
दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे ॥

बांझ की गोद कुबेर भरा दे ।
कारोबार को कुबेर बढ़ा दे ॥

कारागार से कुबेर छुड़ा दे ।
चोर ठगों से कुबेर बचा दे ॥

कोर्ट केस में कुबेर जितावै ।
जो कुबेर को मन में ध्यावै ॥

चुनाव में जीत कुबेर करावैं ।
मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं ॥

पाठ करे जो नित मन लाई ।
उसकी कला हो सदा सवाई ॥

जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई ।
उसका जीवन चले सुखदाई ॥

जो कुबेर का पाठ करावै ।
उसका बेड़ा पार लगावै ॥

उजड़े घर को पुन: बसावै ।
शत्रु को भी मित्र बनावै ॥

सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई ।
सब सुख भोद पदार्थ पाई ॥

प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई ।
मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई ॥

॥ दोहा ॥

शिव भक्तों में अग्रणी, श्री यक्षराज कुबेर ।
हृदय में ज्ञान प्रकाश भर, कर दो दूर अंधेर ॥

कर दो दूर अंधेर अब, जरा करो ना देर ।
शरण पड़ा हूं आपकी, दया की दृष्टि फेर ।

॥ इति श्री कुबेर चालीसा समाप्त ॥
कुबेर मंत्र


ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥

om shreem hreem kleem shreem kleem vitteshvaraya namah॥



ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥

om hreem shreem kreem shreem kuberaya ashta-lakshmi mama grihe dhanam puraya puraya namah॥



ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

om yakshaya kuberaya vaishravanaya dhanadhanyadhipataye dhanadhanyasamriddhim me dehi dapaya svaha॥