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Wednesday, June 15, 2022

 जय जयकार माता की आओ शरण भवानी की

एक बार फिर प्रेम से बोलो जय दुर्गा महारानी की

जय दुर्गा महारानी की


पहली देवी शैलपुत्री है किये बैल की सवारी

अर्धचन्दर माथे पर सोहे

सुन्दर रूप मनोहारी, सुन्दर रूप मनोहारी

लिए कमण्डल फूल कमल के और रुद्राक्षो की माला

हुई दूसरी ब्रहमचारिणी

करे जगत में उजियाला, करे जगत में उजियाला


पूर्ण चंद्रमा सी निर्मल देवी चंद्रघंटा माता

इनके सुमिरन से निर्बल भी

बैरी पर है जय पता, बैरी पर है जय पता

जय जयकार माता की आओ शरण भवानी की

एक बार फिर प्रेम से बोलो जय दुर्गा महारानी की

जय दुर्गा महारानी की


चौथी देवी कूष्मांडा है इनकी लीला है न्यारी

अमृत भरा कलश है कर में

किये बाघ की सवारी, किये बाघ की सवारी

कर में कमल सिंह पर आसन

सब का शुभ करने वाली

मंगलमयी कंदमाता है

जग का दुःख हरने वाली, जग का दुःख हरने वाली


मुनि कात्यायन की ये कन्या, है सबकी कत्यानी माँ

दानवता की शत्रु और

मानवता की सुखदायिनी माँ, मानवता की सुखदायिनी माँ

जय जयकार माता की आओ शरण भवानी की

एक बार फिर प्रेम से बोलो जय दुर्गा महारानी की

जय दुर्गा महारानी की


यही काल रात्रि देवी है महाप्रलय ढाने वाली

सब प्राणी के खाने वाली

काल को भी खाने वाली, कल को भी खाने वाली

श्वेत बैल है वाहन जिनका, तन पर स्वेताम्बर भाता

यही महा गौरी देवी है

सबकी जगदम्बा माता, सबकी जगदम्बा माता


शंख चक्र और गदा पदम्, कर में धारण करने वाली

यही सीधी दात्री माता है

रिद्धि सिद्धि देने वाली, रिद्धि सिद्धि देने वाली

जय जयकार माता कीआओ शरण भवानी की

एक बार फिर प्रेम से बोलो जय दुर्गा महारानी की

जय दुर्गा महारानी की.

Saturday, June 26, 2021

 श्री दुर्गा आपदुद्धाराष्टकम्


नमस्ते शरण्ये शिवे सानुकम्पे नमस्ते जगद्व्यापिके विश्वरूपे |

नमस्ते जगद्वन्द्यपादारविन्दे नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ||१||


नमस्ते जगच्चिन्त्यमानस्वरूपे नमस्ते महायोगिविज्ञानरूपे |

नमस्ते नमस्ते सदानन्द रूपे नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ||२||


अनाथस्य दीनस्य तृष्णातुरस्य भयार्तस्य भीतस्य बद्धस्य जन्तोः |

त्वमेका गतिर्देवि निस्तारकर्त्री नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ||३||


अरण्ये रणे दारुणे शुत्रुमध्ये जले सङ्कटे राजग्रेहे प्रवाते |

त्वमेका गतिर्देवि निस्तार हेतुर्नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ||४||


अपारे महदुस्तरेऽत्यन्तघोरे विपत् सागरे मज्जतां देहभाजाम् |

त्वमेका गतिर्देवि निस्तारनौका नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ||५||


नमश्चण्डिके चण्डोर्दण्डलीलासमुत्खण्डिता खण्डलाशेषशत्रोः |

त्वमेका गतिर्विघ्नसन्दोहहर्त्री नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ||६||


त्वमेका सदाराधिता सत्यवादिन्यनेकाखिला क्रोधना क्रोधनिष्ठा |

इडा पिङ्गला त्वं सुषुम्ना च नाडी नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ||७||


नमो देवि दुर्गे शिवे भीमनादे सरस्वत्यरुन्धत्यमोघस्वरूपे  |

विभूतिः सतां कालरात्रिस्वरूपे नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ||८||


शरणमसि सुराणां सिद्धविद्याधराणां मुनिदनुजवराणां व्याधिभिः पीडितानाम् |

नृपतिगृहगतानां दस्युभिस्त्रासितानां त्वमसि शरणमेका देवि दुर्गे प्रसीद ||९||


|| इति सिद्धेश्वरतन्त्रे हरगौरीसंवादे आपदुद्धाराष्टकस्तोत्रं सम्पूर्णम् ||

 Maa Durga Mantras ( मां दुर्गा के मंत्र )



यहाँ आप कई प्रकार के माँ दुर्गा के मंत्र पा सकता है जिससे आप कई मुसीबतों से बाहर आ सकते है अपने जीवन में। पूर्ण श्रद्धा से किया गया मंत्र उच्चारण फल अवश्य देता है ।


1. उपयुक्त इच्छा को पूरा करने के लिए दुर्गा मंत्र । यह मंत्र सभी प्रकार की सिद्धिः को पाने में मदद करता है, यह मंत्र सबसे प्रभावी और गुप्त मंत्र माना जाता है और सभी उपयुक्त इच्छाओं को पूरा करने की शक्ति इस मंत्र में होती है।


ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नम:


2. यह देवी माँ का बहुत लोकप्रिय मंत्र है। यह मंत्र देवी प्रदर्शन के समारोहों में आवश्यक है।

दुर्गा सप्तशती प्रदर्शन से पहले इस मंत्र को सुनाना आवश्यक है।इस मंत्र की शक्ति : यह मंत्र दोहराने से हमें सुंदरता ,बुद्धि और समृद्धि मिलती है। यह आत्म की प्राप्ति में मदद करता है।


"ॐ अंग ह्रींग क्लींग चामुण्डायै विच्चे "


3. गौरी मंत्र लायक पति मिलने के लिए दुर्गा मंत्र 


" हे गौरी शंकरधंगी ! यथा तवं शंकरप्रिया,

तथा मां कुरु कल्याणी ! कान्तकान्तम् सुदुर्लभं "


4. दुर्गा सप्तशती से शक्तिशाली मंत्र , सब प्रकार के कल्याण के लिये दुर्गा मंत्र 


“सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”


5.धन प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र 


“दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:

स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।

दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या

सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥”


6.आकर्षण के लिए दुर्गा मंत्र 


“ॐ क्लींग ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती ही सा,

बलादाकृष्य मोहय महामाया प्रयच्छति "


7. विपत्ति नाश के लिए दुर्गा मंत्र 


“शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”


8.शक्ति प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र 


सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्ति भूते सनातनि।

गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥


9.रक्षा पाने के लिए दुर्गा मंत्र 


शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।

घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥


10. आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र 


देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥


11. भय नाश के लिए दुर्गा मंत्र 


“सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।

भयेभ्याहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥


12. महामारी नाश के लिए दुर्गा मंत्र 


जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥


13. सुलक्षणा पत्नी की प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र 


पत्‍‌नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।

तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥


14. पाप नाश के लिए दुर्गा मंत्र 


हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत्।

सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योऽन: सुतानिव॥


15. भुक्ति-मुक्ति की प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र 


विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।

रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि


16. सभी के कल्याण के लिए दुर्गा मंत्र


देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या

निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या।

तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां

भकत्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा न: ।।


17. शक्तिशाली दुर्गा मंत्र हर तरह के भय एवं संकट से आपकी रक्षा के लिए


रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र |

दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम् ||


18. विघ्नों के नाश, दुर्जनों व शत्रुओं को मात व अहंकार के नाश के लिए दुर्गा गायत्री मंत्र 


ॐ गिरिजायै विद्महे शिव धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ||

Thursday, May 13, 2021

माँ अम्बे की आरती 

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
मैया जय मगंल करनी मैया जय आनन्द करनी।

तुमको निशदिन ध्यावत, मैया जी को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमदको
मैया टीको मृगमदको ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे मैया रक्ताम्बर राजै ।
रक्त-पुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी मैया खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
मैया नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, कोटिक चद्रं दिवाकर सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती मैया महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे
मैया शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी.....

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी
मैया तुम कमलारानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी...

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू मैया नृत्य करत भैंरू ।
बाजत ताल मृदंगा, अौर बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता
मैया तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पति
करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी.....

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी
मैया वरमुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी.....

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती मैया अगर कपूर बाती ।
श्री मालकेतु में राजत, श्री मालकेतु कोटि रतन ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

श्री अंबेजी की आरती, मैया जी की आरती जो कोइ नित गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, कहत हरिहर स्वामी मनवांछित फल' पावे

ॐ जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी
मैया जय मगंल करनी
मैया जय आनन्द करनी।

तुम को निशदिन ध्यावत हरी ब्रह्मा शिवरी ||

Friday, May 7, 2021

 श्री कुंजिका स्तोत्रम


।।शिव उवाच।।
श्रृणु देवि ! प्रवक्ष्यामि, कुंजिका स्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्र प्रभावेण, चण्डी जापः शुभो भवेत।।
न कवचं नार्गला-स्तोत्रं, कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च, न न्यासो न च वार्चनम्।।
कुंजिका पाठ मात्रेण, दुर्गा पाठ फलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि ! देवानामपि दुलर्भम्।।
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठ मात्रेण संसिद्धयेत् कुंजिका स्तोत्रमुत्तमम्।।

मन्त्र -
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।।
नमस्ते रूद्र रुपिण्यै , नमस्ते मधु-मर्दिनि।
नमः कैटभ हारिण्यै, नमस्ते महिषार्दिनि।।
नमस्ते शुम्भ हन्त्र्यै च, निशुम्भासुर घातिनि।
जाग्रतं हि महादेवि जप ! सिद्धिं कुरूष्व मे।।
ऐं-कारी सृष्टि-रूपायै, ह्रींकारी प्रतिपालिका।
क्लींकारी काल-रूपिण्यै, बीजरूपे नमोऽस्तु ते।।
चामुण्डा चण्डघाती च, यैकारी वरदायिनी।
विच्चे चा ऽभयदा नित्यं, नमस्ते मन्त्ररूपिणि।।
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नीः, वां वीं वागधीश्वरी तथा।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु ।।
हुं हु हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः।।
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा॥
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्र सिद्धिं कुरुष्व मे॥

।।फल श्रुति।।
इदं तु कुंजिका स्तोत्रं मन्त्र-जागर्ति हेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं, गोपितं रक्ष पार्वति।।
यस्तु कुंजिकया देवि ! हीनां सप्तशती पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा।।
। इति श्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती संवादे कुंजिका स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ।

 अथ “श्री दुर्गा बत्तीस नामवली” स्त्रोत :-


दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी।

दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी

दुर्गम ज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला

दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी

दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता

दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी

दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी

दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी

दुर्गमाङ्गी दुर्गमाता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी

दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्लभा दुर्गधारिणी

नामावली ममायास्तु दुर्गया मम मानसः

पठेत् सर्व भयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः।।

Wednesday, April 28, 2021

श्री दुर्गा देवी अष्टोत्तर



 ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ दारिद्र्यशमन्यै नमः ।
ॐ दुरितघ्न्यै नमः ।
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ लज्जायै नमः ।
ॐ महाविद्यायै नमः ।
ॐ श्रद्धायै नमः ।
ॐ पुष्ट्यै नमः ।
ॐ स्वधायै नमः ।
ॐ ध्रुवायै नमः । 
ॐ महारात्र्यै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ मात्रे नमः ।
ॐ सरस्वत्यै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ शशिधरायै नमः ।
ॐ शान्तायै नमः ।
ॐ शाम्भव्यै नमः ।
ॐ भूतिदायिन्यै नमः । 
ॐ तामस्यै नमः ।
ॐ नियतायै नमः ।
ॐ नार्यै नमः ।
ॐ काल्यै नमः ।
ॐ नारायण्यै नमः ।
ॐ कलायै नमः ।

ॐ ब्राह्म्यै नमः ।
ॐ वीणाधरायै नमः ।
ॐ वाण्यै नमः ।
ॐ शारदायै नमः । 
ॐ हंसवाहिन्यै नमः ।
ॐ त्रिशूलिन्यै नमः ।
ॐ त्रिनेत्रायै नमः ।
ॐ ईशानायै नमः ।
ॐ त्रय्यै नमः ।
ॐ त्रयतमायै नमः ।
ॐ शुभायै नमः ।
ॐ शङ्खिन्यै नमः ।
ॐ चक्रिण्यै नमः ।
ॐ घोरायै नमः । 
ॐ कराल्यै नमः ।
ॐ मालिन्यै नमः ।
ॐ मत्यै नमः ।
ॐ माहेश्वर्यै नमः ।
ॐ महेष्वासायै नमः ।
ॐ महिषघ्न्यै नमः ।
ॐ मधुव्रतायै नमः ।
ॐ मयूरवाहिन्यै नमः ।
ॐ नीलायै नमः ।
ॐ भारत्यै नमः । 
ॐ भास्वराम्बरायै नमः ।
ॐ पीताम्बरधरायै नमः ।
ॐ पीतायै नमः ।
ॐ कौमार्यै नमः ।
ॐ पीवरस्तन्यै नमः ।
ॐ रजन्यै नमः ।
ॐ राधिन्यै नमः ।
ॐ रक्तायै नमः ।
ॐ गदिन्यै नमः ।
ॐ घण्टिन्यै नमः । 
ॐ प्रभायै नमः ।
ॐ शुम्भघ्न्यै नमः ।
ॐ सुभगायै नमः ।
ॐ सुभ्रुवे नमः ।
ॐ निशुम्भप्राणहारिण्यै नमः ।
ॐ कामाक्ष्यै नमः ।
ॐ कामुकायै नमः ।
ॐ कन्यायै नमः ।
ॐ रक्तबीजनिपातिन्यै नमः ।
ॐ सहस्रवदनायै नमः । 
ॐ सन्ध्यायै नमः ।
ॐ साक्षिण्यै नमः ।
ॐ शाङ्कर्यै नमः ।
ॐ द्युतये नमः ।
ॐ भार्गव्यै नमः ।
ॐ वारुण्यै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ धरायै नमः ।
ॐ धरासुरार्चितायै नमः ।
ॐ गायत्र्यै नमः । 
ॐ गायक्यै नमः ।
ॐ गङ्गायै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ गीतघनस्वनायै नमः ।
ॐ छन्दोमयायै नमः ।
ॐ मह्यै नमः ।
ॐ छायायै नमः ।
ॐ चार्वाङ्ग्यै नमः ।
ॐ चन्दनप्रियायै नमः ।
ॐ जनन्यै नमः । 
ॐ जाह्नव्यै नमः ।
ॐ जातायै नमः ।
ॐ शान्ङ्कर्यै नमः ।
ॐ हतराक्षस्यै नमः ।
ॐ वल्लर्यै नमः ।
ॐ वल्लभायै नमः ।
ॐ वल्ल्यै नमः ।
ॐ वल्ल्यलङ्कृतमध्यमायै नमः ।
ॐ हरीतक्यै नमः ।
ॐ हयारूढायै नमः । 
ॐ भूत्यै नमः ।
ॐ हरिहरप्रियायै नमः ।
ॐ वज्रहस्तायै नमः ।
ॐ वरारोहायै नमः ।
ॐ सर्वसिद्ध्यै नमः ।
ॐ वरप्रदायै नमः ।
ॐ सिन्दूरवर्णायै नमः ।
ॐ श्री दुर्गादेव्यै नमः । 

Wednesday, March 17, 2021

 | कीलकस्तोत्रम् - शक्तिशाली दुर्गा मंत्र

॥ अथ कीलकम् ॥
ॐ अस्य श्रीकीलकमन्त्रस्य शिव ऋषिः,अनुष्टुप् छन्दः,
श्रीमहासरस्वती देवता,श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थं सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः।


ॐ नमश्‍चण्डिकायै॥


मार्कण्डेय उवाच
ॐ विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे।
श्रेयःप्राप्तिनिमित्ताय नमः सोमार्धधारिणे॥1॥


सर्वमेतद्विजानीयान्मन्त्राणामभिकीलकम्।
सोऽपि क्षेममवाप्नोति सततं जाप्यतत्परः॥2॥


सिद्ध्यन्त्युच्चाटनादीनि वस्तूनि सकलान्यपि।
एतेन स्तुवतां देवी स्तोत्रमात्रेण सिद्ध्यति॥3॥


न मन्त्रो नौषधं तत्र न किञ्चिदपि विद्यते।
विना जाप्येन सिद्ध्येत सर्वमुच्चाटनादिकम्॥4॥


समग्राण्यपि सिद्ध्यन्ति लोकशङ्कामिमां हरः।
कृत्वा निमन्त्रयामास सर्वमेवमिदं शुभम्॥5॥


स्तोत्रं वै चण्डिकायास्तु तच्च गुप्तं चकार सः।
समाप्तिर्न च पुण्यस्य तां यथावन्नियन्त्रणाम्॥6॥


सोऽपि क्षेममवाप्नोति सर्वमेवं न संशयः।
कृष्णायां वा चतुर्दश्यामष्टम्यां वा समाहितः॥7॥


ददाति प्रतिगृह्णाति नान्यथैषा प्रसीदति।
इत्थंरुपेण कीलेन महादेवेन कीलितम्॥8॥


यो निष्कीलां विधायैनां नित्यं जपति संस्फुटम्।
स सिद्धः स गणः सोऽपि गन्धर्वो जायते नरः॥9॥


न चैवाप्यटतस्तस्य भयं क्वापीह जायते।
नापमृत्युवशं याति मृतो मोक्षमवाप्नुयात्॥10॥


ज्ञात्वा प्रारभ्य कुर्वीत न कुर्वाणो विनश्यति।
ततो ज्ञात्वैव सम्पन्नमिदं प्रारभ्यते बुधैः॥11॥


सौभाग्यादि च यत्किञ्चिद् दृश्यते ललनाजने।
तत्सर्वं तत्प्रसादेन तेन जाप्यमिदं शुभम्॥12॥


शनैस्तु जप्यमानेऽस्मिन् स्तोत्रे सम्पत्तिरुच्चकैः।
भवत्येव समग्रापि ततः प्रारभ्यमेव तत्॥13॥


ऐश्‍वर्यं यत्प्रसादेन सौभाग्यारोग्यसम्पदः।
शत्रुहानिःपरो मोक्षः स्तूयते सा न किं जनैः॥14॥

 दुर्गा सप्तशती अर्गला स्तोत्रम

 ॥ अथार्गलास्तोत्रम् ॥
ॐ अस्य श्रीअर्गलास्तोत्रमन्त्रस्य विष्णुर्ऋषिः,अनुष्टुप् छन्दः,
श्रीमहालक्ष्मीर्देवता, श्रीजगदम्बाप्रीतयेसप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः॥



ॐ नमश्‍चण्डिकायै॥


मार्कण्डेय उवाच
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥1॥


जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥2॥


मधुकैटभविद्राविविधातृवरदे नमः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥3॥


महिषासुरनिर्णाशि भक्तानां सुखदे नमः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥4॥


रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥5॥


शुम्भस्यैव निशुम्भस्य धूम्राक्षस्य च मर्दिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥6॥


वन्दिताङ्‌घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥7॥


अचिन्त्यरुपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥8॥


नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥9॥


स्तुवद्‌भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि१॥10॥


चण्डिके सततं ये त्वामर्चयन्तीह भक्तितः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥11॥


देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥12॥


विधेहि द्विषतां नाशं विधेहि बलमुच्चकैः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥13॥


विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥14॥


सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥15॥


विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तं जनं कुरु।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥16॥


प्रचण्डदैत्यदर्पघ्ने चण्डिके प्रणताय मे।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥17॥


चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंस्तुते परमेश्‍वरि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥18॥


कृष्णेन संस्तुते देवि शश्‍वद्भक्त्या सदाम्बिके।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥19॥


हिमाचलसुतानाथसंस्तुते परमेश्‍वरि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥20॥


इन्द्राणीपतिसद्भावपूजिते परमेश्‍वरि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥21॥


देवि प्रचण्डदोर्दण्डदैत्यदर्पविनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥22॥


देवि भक्तजनोद्दामदत्तानन्दोदयेऽम्बिके।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥23॥


पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥24॥


इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः।
स तु सप्तशतीसंख्यावरमाप्नोति सम्पदाम्॥25॥


॥ इति देव्या अर्गलास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

Saturday, February 27, 2021


श्री दुर्गा सहस्त्रनाम


1) ॐ महाविद्यायै नमः।
2) ॐ जगन्मात्रे नमः।
3) ॐ महालक्ष्म्यै नमः।
4) ॐ शिवप्रियायै नमः।
5) ॐ विष्णुमायायै नमः।
6) ॐ शुभायै नमः।
7) ॐ शान्तायै नमः।
8) ॐ सिद्धायै नमः।
9) ॐ सिद्धसरस्वत्यै नमः।
10) ॐ क्षमायै नमः।
11) ॐ कान्त्यै नमः।
12) ॐ प्रभायै नमः।
13) ॐ ज्योत्स्नायै नमः।
14) ॐ पार्वत्यै नमः।
15) ॐ सर्वमङ्गलायै नमः।
16) ॐ हिङ्गुलायै नमः।
17) ॐ चण्डिकायै नमः।
18) ॐ दान्तायै नमः।
19) ॐ पद्मायै नमः।
20) ॐ लक्ष्म्यै नमः।
21) ॐ हरिप्रियायै नमः।

22) ॐ त्रिपुरायै नमः।
23) ॐ नन्दिन्यै नमः।
24) ॐ नन्दायै नमः।
25) ॐ सुनन्दायै नमः।
26) ॐ सुरवन्दितायै नमः।
27) ॐ यज्ञविद्यायै नमः।
28) ॐ महामायायै नमः।
29) ॐ वेदमात्रे नमः।
30) ॐ सुधायै नमः।
31) ॐ धृत्यै नमः।
32) ॐ प्रीतये नमः।
33) ॐ प्रथायै नमः।
34) ॐ प्रसिद्धायै नमः।
35) ॐ मृडान्यै नमः।
36) ॐ विन्ध्यवासिन्यै नमः।
37) ॐ सिद्धविद्यायै नमः।
38) ॐ महाशक्तये नमः।
39) ॐ पृथ्व्यै नमः।
40) ॐ नारदसेवितायै नमः।
41) ॐ पुरुहूतप्रियायै नमः।
42) ॐ कान्तायै नमः।
43) ॐ कामिन्यै नमः।
44) ॐ पद्मलोचनायै नमः।
45) ॐ प्रह्लादिन्यै नमः।
46) ॐ महामात्रे नमः।
47) ॐ दुर्गायै नमः।
48) ॐ दुर्गतिनाशिन्यै नमः।
49) ॐ ज्वालामुख्यै नमः।
50) ॐ सुगोत्रायै नमः।






51) ॐ ज्योतिषे नमः।
52) ॐ कुमुदवासिन्यै नमः।
53) ॐ दुर्गमायै नमः।
54) ॐ दुर्लभायै नमः।
55) ॐ विद्यायै नमः।
56) ॐ स्वर्गत्यै नमः।
57) ॐ पुरवासिन्यै नमः।
58) ॐ अपर्णायै नमः।
59) ॐ शाम्बरीमायायै नमः।
60) ॐ मदिरायै नमः।
61) ॐ मृदुहासिन्यै नमः।
62) ॐ कुलवागीश्वर्यै नमः।
63) ॐ नित्यायै नमः।
64) ॐ नित्यक्लिन्नायै नमः।
65) ॐ कृशोदर्यै नमः।
66) ॐ कामेश्वर्यै नमः।
67) ॐ नीलायै नमः।
68) ॐ भीरुण्डायै नमः।
69) ॐ वह्निवासिन्यै नमः।
70) ॐ लम्बोदर्यै नमः।
71) ॐ महाकाल्यै नमः।
72) ॐ विद्याविद्येश्वर्यै नमः।
73) ॐ नरेश्वरायै नमः।
74) ॐ सत्यायै नमः।
75) ॐ सर्वसौभाग्यवर्धिन्यै नमः।
76) ॐ सङ्कर्षण्यै नमः।
77) ॐ नारसिंह्यै नमः।
78) ॐ वैष्णव्यै नमः।
79) ॐ महोदर्यै नमः।
80) ॐ कात्यायन्यै नमः।
81) ॐ चम्पायै नमः।
82) ॐ सर्वसम्पत्तिकारिण्यै नमः।
83) ॐ नारायण्यै नमः।
84) ॐ महानिद्रायै नमः।
85) ॐ योगनिद्रायै नमः।
86) ॐ प्रभावत्यै नमः।
87) ॐ प्रज्ञापारमितायै नमः।
88) ॐ प्रज्ञायै नमः।
89) ॐ तारायै नमः।
90) ॐ मधुमत्यै नमः।
91) ॐ मधुवे नमः।
92) ॐ क्षीरार्णवसुधाहारायै नमः।
93) ॐ कालिकायै नमः।
94) ॐ सिंहवाहिन्यै नमः।
95) ॐ ओंकारायै नमः।
96) ॐ वसुधाकारायै नमः।
97) ॐ चेतनायै नमः।
98) ॐ कोपनाकृत्यै नमः।
99) ॐ अर्धबिन्दुधरायै नमः।
100) ॐ धारायै नमः।


101) ॐ विश्वमात्रे नमः।
102) ॐ कलावत्यै नमः।
103) ॐ पद्मावत्यै नमः।
104) ॐ सुवस्त्रायै नमः।
105) ॐ प्रबुद्धायै नमः।
106) ॐ सरस्वत्यै नमः।
107) ॐ कुण्डासनायै नमः।
108) ॐ जगद्धात्र्यै नमः।
109) ॐ बुद्धमात्रे नमः।
110) ॐ जिनेश्वर्यै नमः।
111) ॐ जिनमात्रे नमः।
112) ॐ जिनेन्द्रायै नमः।
113) ॐ शारदायै नमः।
114) ॐ हंसवाहनायै नमः।
115) ॐ राज्यलक्ष्म्यै नमः।
116) ॐ वषट्कारायै नमः।
117) ॐ सुधाकारायै नमः।
118) ॐ सुधात्मिकायै नमः।
119) ॐ राजनीतये नमः।
120) ॐ त्रय्यै नमः।
121) ॐ वार्तायै नमः।
122) ॐ दण्डनीतये नमः।
123) ॐ कियावत्यै नमः।
124) ॐ सद्भूत्यै नमः।
125) ॐ तारिण्यै नमः।
126) ॐ श्रद्धायै नमः।
127) ॐ सद्गतये नमः।
128) ॐ सत्परायणायै नमः।
129) ॐ सिन्धवे नमः।
130) ॐ मन्दाकिन्यै नमः।
131) ॐ गङ्गायै नमः।
132) ॐ यमुनायै नमः।
133) ॐ सरस्वत्यै नमः।
134) ॐ गोदावर्यै नमः।
135) ॐ विपाशायै नमः।
136) ॐ कावेर्यै नमः।
137) ॐ शतहन्दायै नमः।
138) ॐ सरय्वै नमः।
139) ॐ चन्द्रभागायै नमः।
140) ॐ कौशिक्यै नमः।
141) ॐ गण्डक्यै नमः।
142) ॐ शुचये नमः।
143) ॐ नर्मदायै नमः।
144) ॐ कर्मनाशाय नमः।
145) ॐ चर्मण्वत्यै नमः।
146) ॐ देविकायै नमः।
147) ॐ वेत्रवत्यै नमः।
148) ॐ वितस्तायै नमः।
149) ॐ वरदायै नमः।
150) ॐ नरवाहनायै नमः।
151) ॐ सत्यै नमः।
152) ॐ पतिव्रतायै नमः।
153) ॐ साध्व्यै नमः।
154) ॐ सुचक्षुषे नमः।
155) ॐ कुण्डवासिन्यै नमः।
156) ॐ एकचक्षुषे नमः।
157) ॐ सहस्त्राक्ष्यै नमः।
158) ॐ सुश्रोण्यै नमः।
159) ॐ भगमालिन्यै नमः।
160) ॐ सेना नमः।
161) ॐ श्रोण्यै नमः।
162) ॐ पताकायै नमः।
163) ॐ सुव्यूहायै नमः।
164) ॐ युद्धकान्क्षिण्यै नमः।
165) ॐ पताकिन्यै नमः।
166) ॐ दयारम्भायै नमः।
167) ॐ विपञ्चीपञ्चमप्रियायै नमः।
168) ॐ परापरकलाकान्तायै नमः।
169) ॐ त्रिशक्तये नमः।
170) ॐ मोक्षदायिन्यै नमः।
171) ॐ ऐन्द्रयै नमः।
172) ॐ माहेश्वर्यै नमः।
173) ॐ ब्राह्मयै नमः।
174) ॐ कौमार्यै नमः।
175) ॐ कुलवासिन्यै नमः।
176) ॐ इच्छायै नमः।
177) ॐ भगवत्यै नमः।
178) ॐ शक्तये नमः।
179) ॐ कामधेनवे नमः।
180) ॐ कृपावत्यै नमः।
181) ॐ वज्रायुधायै नमः।
182) ॐ वज्रहस्तायै नमः।
183) ॐ चण्ड्यै नमः।
184) ॐ चण्डपराक्रमायै नमः।
185) ॐ गौर्यै नमः।
186) ॐ सुवर्णवर्णायै नमः।
187) ॐ स्थितिसंहारकारिण्यै नमः।
188) ॐ एकायै नमः।
189) ॐ अनेकायै नमः।
190) ॐ महेज्यायै नमः।
191) ॐ शतबाहवे नमः।
192) ॐ महाभुजायै नमः।
193) ॐ भुजङ्गभूषणायै नमः।
194) ॐ भूषायै नमः।
195) ॐ षट्चक्रक्रमवासिन्यै नमः।
196) ॐ षट्चक्रभेदिन्यै नमः।
197) ॐ श्यामायै नमः।
198) ॐ कायस्थायै नमः।
199) ॐ कायवर्जितायै नमः।
200) ॐ सुस्मितायै नमः।


201) ॐ सुमुख्यै नमः।
202) ॐ क्षामायै नमः।
203) ॐ मूलप्रकृत्यै नमः।
204) ॐ ईश्वर्यै नमः।
205) ॐ अजायै नमः।
206) ॐ बहुवर्णायै नमः।
207) ॐ पुरुषार्थप्रवर्तिन्यै नमः।
208) ॐ रक्तायै नमः।
209) ॐ नीलायै नमः।
210) ॐ सितायै नमः।
211) ॐ श्यामायै नमः।
212) ॐ कृष्णायै नमः।
213) ॐ पीतायै नमः।
214) ॐ कर्बुरायै नमः।
215) ॐ क्षुधायै नमः।
216) ॐ तृष्णायै नमः।
217) ॐ जरावृद्धायै नमः।
218) ॐ तरुण्यै नमः।
219) ॐ करुणालयायै नमः।
220) ॐ कलायै नमः।
221) ॐ काष्ठायै नमः।
222) ॐ मुहूर्तायै नमः।
223) ॐ निमिषायै नमः।
224) ॐ कालरूपिण्यै नमः।
225) ॐ सुकर्णरसनायै नमः।
226) ॐ नासायै नमः।
227) ॐ चक्षुषे नमः।
228) ॐ स्पर्शवत्यै नमः।
229) ॐ रसायै नमः।
230) ॐ गन्धप्रियायै नमः।
231) ॐ सुगन्धायै नमः।
232) ॐ सुस्पर्शायै नमः।
233) ॐ मनोगतये नमः।
234) ॐ मृगनाभये नमः।
235) ॐ मृगाक्ष्यै नमः।
236) ॐ कर्पूरामोदधारिण्यै नमः।
237) ॐ पद्मयोनये नमः।
238) ॐ सुकेश्यै नमः।
239) ॐ सुलिङ्गायै नमः।
240) ॐ भगरूपिण्यै नमः।
241) ॐ योनिमुद्रायै नमः।
242) ॐ महामुद्रायै नमः।
243) ॐ खेचर्यै नमः।
244) ॐ खगगामिन्यै नमः।
245) ॐ मधुश्रियै नमः।
246) ॐ माधवीवल्लयै नमः।
247) ॐ मधुमत्तायै नमः।
248) ॐ मदोद्धतायै नमः।
249) ॐ मातङ्ग्यै नमः।
250) ॐ शुकहस्तायै नमः।
251) ॐ पुष्पबाणायै नमः।
252) ॐ इक्षुचापिन्यै नमः।
253) ॐ रक्ताम्बरधरायै नमः।
254) ॐ क्षीवायै नमः।
255) ॐ रक्तपुष्पावतंसिन्यै नमः।
256) ॐ शुभ्राम्बरधरायै नमः।
257) ॐ धीरायै नमः।
258) ॐ महाश्वेतायै नमः।
259) ॐ वसुप्रियायै नमः।
260) ॐ सुवेणये नमः।
261) ॐ पद्महस्तायै नमः।
262) ॐ मुक्ताहारविभूषणायै नमः।
263) ॐ कर्पूरामोदनिःश्वासायै नमः।
264) ॐ पद्मिन्यै नमः।
265) ॐ पद्ममन्दिरायै नमः।
266) ॐ खड्गिन्यै नमः।
267) ॐ चक्रहस्तायै नमः।
268) ॐ भुसुण्ड्यै नमः।
269) ॐ परिघायुधायै नमः।
270) ॐ चापिन्यै नमः।
271) ॐ पाशहस्तायै नमः।
272) ॐ त्रिशूलवरधारिण्यै नमः।
273) ॐ सुबाणायै नमः।
274) ॐ शक्तिहस्तायै नमः।
275) ॐ मयूरवरवाहनायै नमः।
276) ॐ वरायुधधरायै नमः।
277) ॐ वीरायै नमः।
278) ॐ वीरपानमदोत्कटायै नमः।
279) ॐ वसुधायै नमः।
280) ॐ वसुधारायै नमः।
281) ॐ जयायै नमः।
282) ॐ शाकम्भर्यै नमः।
283) ॐ शिवायै नमः।
284) ॐ विजयायै नमः।
285) ॐ जयन्त्यै नमः।
286) ॐ सुस्तन्यै नमः।
287) ॐ शत्रुनाशिन्यै नमः।
288) ॐ अन्तर्वत्न्यै नमः।
289) ॐ वेदशक्तये नमः।
290) ॐ वरदायै नमः।
291) ॐ वरधारिण्यै नमः।
292) ॐ शीतलायै नमः।
293) ॐ सुशीलायै नमः।
294) ॐ बालग्रहविनाशिन्यै नमः।
295) ॐ कुमार्यै नमः।
296) ॐ सुपर्वायै नमः।
297) ॐ कामाख्यायै नमः।
298) ॐ कामवन्दितायै नमः।
299) ॐ जालन्धरधरायै नमः।
300) ॐ अनन्तायै नमः।




301) ॐ कामरूपनिवासिन्यै नमः।
302) ॐ कामबीजवत्यै नमः।
303) ॐ सत्यायै नमः।
304) ॐ सत्यधर्मपरायणायै नमः।
305) ॐ स्थूलमार्गस्थितायै नमः।
306) ॐ सूक्ष्मायै नमः।
307) ॐ सूक्ष्मबुद्धिप्रबोधिन्यै नमः।
308) ॐ षट्कोणायै नमः।
309) ॐ त्रिकोणायै नमः।
310) ॐ त्रिनेत्रायै नमः।
311) ॐ त्रिपुरसुन्दर्यै नमः।
312) ॐ वृषप्रियायै नमः।
313) ॐ वृषारूढायै नमः।
314) ॐ महिषासुरघातिन्यै नमः।
315) ॐ शुम्भदर्पहरायै नमः।
316) ॐ दीप्तायै नमः।
317) ॐ दीप्तपावकसन्निभायै नमः।
318) ॐ कपालभूषणायै नमः।
319) ॐ काल्यै नमः।
320) ॐ कपालमाल्यधारिण्यै नमः।
321) ॐ कपालकुण्डलायै नमः।
322) ॐ दीर्घायै नमः।
323) ॐ शिवदूत्यै नमः।
324) ॐ घनध्वनये नमः।
325) ॐ सिद्धिदायै नमः।
326) ॐ बुद्धिदायै नमः।
327) ॐ नित्यायै नमः।
328) ॐ सत्यमार्गप्रबोधिन्यै नमः।
329) ॐ कम्बुग्रीवायै नमः।
330) ॐ वसुमत्यै नमः।
331) ॐ छत्रच्छायाकृतालयायै नमः।
332) ॐ जगद्गर्भायै नमः।
333) ॐ कुण्डलिन्यै नमः।
334) ॐ भुजगाकारशायिन्यै नमः।
335) ॐ प्रोल्लसत्सप्तपद्मायै नमः।
336) ॐ नाभिनालमृणालिन्यै नमः।
337) ॐ मूलाधारायै नमः।
338) ॐ निराकारायै नमः।
339) ॐ वह्रिकुण्डकृतालयायै नमः।
340) ॐ वायुकुण्डसुखासीनायै नमः।
341) ॐ निराधारायै नमः।
342) ॐ निराश्रयायै नमः।
343) ॐ श्वासोच्छ्वासगत्यै नमः।
344) ॐ जीवायै नमः।
345) ॐ ग्राहिण्यै नमः।
346) ॐ वह्निसंश्रयायै नमः।
347) ॐ वह्नितन्तुसमुत्थानायै नमः।
348) ॐ षड्रसास्वादलोलुपायै नमः।
349) ॐ तपस्विन्यै नमः।
350) ॐ तपःसिद्धये नमः।
351) ॐ तापस्यै नमः।
352) ॐ तपःप्रियायै नमः।
353) ॐ तपोनिष्ठायै नमः।
354) ॐ तपोयुक्तायै नमः।
355) ॐ तपसः सिद्धिदायिन्यै नमः।
356) ॐ सप्तधातुमयीमूर्तये नमः।
357) ॐ सप्तधात्वन्तराश्रयायै नमः।
358) ॐ देहपुष्टये नमः।
359) ॐ मनः तुष्टये नमः।
360) ॐ अन्नपुष्टये नमः।
361) ॐ बलोद्धतायै नमः।
362) ॐ ओषधये नमः।
363) ॐ वैद्यमात्रे नमः।
364) ॐ द्रव्यशक्तये नमः।
365) ॐ प्रभाविन्यै नमः।
366) ॐ वैद्यायै नमः।
367) ॐ वैद्यचिकित्सायै नमः।
368) ॐ सुपथ्यायै नमः।
369) ॐ रोगनाशिन्यै नमः।
370) ॐ मृगयायै नमः।
371) ॐ मृगमांसादायै नमः।
372) ॐ मृगत्वचे नमः।
373) ॐ मृगलोचनायै नमः।
374) ॐ वागुरायै नमः।
375) ॐ बन्धरूपायै नमः।
376) ॐ वधरूपायै नमः।
377) ॐ वधोद्धतायै नमः।
378) ॐ बन्द्यै नमः।
379) ॐ वन्दिस्तुताकारायै नमः।
380) ॐ काराबन्धविमोचन्यै नमः।
381) ॐ शृङ्खलायै नमः।
382) ॐ खलहायै नमः।
383) ॐ विद्युते नमः।
384) ॐ दृढबन्धविमोचन्यै नमः।
385) ॐ अम्बिकायै नमः।
386) ॐ अम्बालिकायै नमः।
387) ॐ अम्बायै नमः।
388) ॐ स्वक्षायै नमः।
389) ॐ साधुजनार्चितायै नमः।
390) ॐ कौलिक्यै नमः।
391) ॐ कुलविद्यायै नमः।
392) ॐ सुकुलायै नमः।
393) ॐ कुलपूजितायै नमः।
394) ॐ कालचक्रभ्रमायै नमः।
395) ॐ भ्रान्तायै नमः।
396) ॐ विभ्रमायै नमः।
397) ॐ भ्रमनाशिन्यै नमः।
398) ॐ वात्याल्यै नमः।
399) ॐ मेघमालायै नमः।
400) ॐ सुवृष्ट्यै नमः।


401) ॐ सस्यवर्धिन्यै नमः।
402) ॐ अकारायै नमः।
403) ॐ इकारायै नमः।
404) ॐ उकारायै नमः।
405) ॐ ऐकाररूपिण्यै नमः।
406) ॐ ह्रींकार्यै नमः।
407) ॐ बीजरूपायै नमः।
408) ॐ क्लींकारायै नमः।
409) ॐ अम्बरवासिन्यै नमः।
410) ॐ सर्वाक्षरमयीशक्तये नमः।
411) ॐ अक्षरायै नमः।
412) ॐ वर्णमालिन्यै नमः।
413) ॐ सिन्दूरारुणवक्त्रायै नमः।
414) ॐ सिन्दूरतिलकप्रियायै नमः।
415) ॐ वश्यायै नमः।
416) ॐ वश्यबीजायै नमः।
417) ॐ लोकवश्यविभाविन्यै नमः।
418) ॐ नृपवश्यायै नमः।
419) ॐ नृपैःसेव्यायै नमः।
420) ॐ नृपवश्यकर्यै नमः।
421) ॐ प्रियायै नमः।
422) ॐ महिष्यै नमः।
423) ॐ नृपमान्यायै नमः।
424) ॐ नृमान्यायै नमः।
425) ॐ नृपनन्दिन्यै नमः।
426) ॐ नृपधर्ममय्यै नमः।
427) ॐ धन्यायै नमः।
428) ॐ धनधान्यविवर्धिन्यै नमः।
429) ॐ चतुर्वर्णमयीमूर्तये नमः।
430) ॐ चतुर्वर्णैः सुपूजितायै नमः।
431) ॐ सर्वधर्ममयीसिद्धये नमः।
432) ॐ चतुराश्रमवासिन्यै नमः।
433) ॐ ब्राह्मण्यै नमः।
434) ॐ क्षत्रियायै नमः।
435) ॐ वैश्यायै नमः।
436) ॐ शूद्रायै नमः।
437) ॐ अवरवर्णजायै नमः।
438) ॐ वेदमार्गरतायै नमः।
439) ॐ यज्ञायै नमः।
440) ॐ वेदविश्वविभाविन्यै नमः।
441) ॐ अस्त्रशस्त्रमयीविद्यायै नमः।
442) ॐ वरशस्त्रास्त्रधारिण्यै नमः।
443) ॐ सुमेधायै नमः।
444) ॐ सत्यमेधायै नमः।
445) ॐ भद्रकाल्यै नमः।
446) ॐ अपराजितायै नमः।
447) ॐ गायत्र्यै नमः।
448) ॐ सत्कृतये नमः।
449) ॐ सन्ध्यायै नमः।
450) ॐ सावित्र्यै नमः।
451) ॐ त्रिपदाश्रयायै नमः।
452) ॐ त्रिसन्ध्यायै नमः।
453) ॐ त्रिपद्यै नमः।
454) ॐ धात्र्यै नमः।
455) ॐ सुपर्वायै नमः।
456) ॐ सामगायन्यै नमः।
457) ॐ पाञ्चाल्यै नमः।
458) ॐ बालिकायै नमः।
459) ॐ बालायै नमः।
460) ॐ बालक्रीडायै नमः।
461) ॐ सनातन्यै नमः।
462) ॐ ग्रर्भाधारधरायै नमः।
463) ॐ शून्यायै नमः।
464) ॐ गर्भाशयनिवासिन्यै नमः।
465) ॐ सुरारिघातिनीकृत्यायै नमः।
466) ॐ पूतनायै नमः।
467) ॐ तिलोत्तमायै नमः।
468) ॐ लज्जायै नमः।
469) ॐ रसवत्यै नमः।
470) ॐ नन्दायै नमः।
471) ॐ भवान्यै नमः।
472) ॐ पापनाशिन्यै नमः।
473) ॐ पट्टाम्बरधरायै नमः।
474) ॐ गीतये नमः।
475) ॐ सुगीतये नमः।
476) ॐ ज्ञानलोचनायै नमः।
477) ॐ सप्तस्वरमयीतन्त्र्यै नमः।
478) ॐ षड्जमध्यमधैवतायै नमः।
479) ॐ मूर्च्छनाग्रामसंस्थानायै नमः।
480) ॐ स्वस्थायै नमः।
481) ॐ स्वस्थानवासिन्यै नमः।
482) ॐ अट्टाटहासिन्यै नमः।
483) ॐ प्रेतायै नमः।
484) ॐ प्रेतासननिवासिन्यै नमः।
485) ॐ गीतनृत्यप्रियायै नमः।
486) ॐ अकामायै नमः।
487) ॐ तुष्टिदायै नमः।
488) ॐ पुष्टिदायै नमः।
489) ॐ अक्षयायै नमः।
490) ॐ निष्ठायै नमः।
491) ॐ सत्यप्रियायै नमः।
492) ॐ प्राज्ञायै नमः।
493) ॐ लोकेश्यै नमः।
494) ॐ सुरोत्तमायै नमः।
495) ॐ सविषायै नमः।
496) ॐ ज्वालिन्यै नमः।
497) ॐ ज्वालायै नमः।
498) ॐ विषमोहार्तिनाशिन्यै नमः।
499) ॐ विषारये नमः।
500) ॐ नागदमन्यै नमः।


501) ॐ कुरुकुल्लायै नमः।
502) ॐ अमृतोद्भवायै नमः।
503) ॐ भूतभीतिहरारक्षायै नमः।
504) ॐ भूतावेशविनाशिन्यै नमः।
505) ॐ रक्षोघ्न्यै नमः।
506) ॐ राक्षस्यै नमः।
507) ॐ रात्रये नमः।
508) ॐ दीर्घनिद्रायै नमः।
509) ॐ दिवागतये नमः।
510) ॐ चन्द्रिकायै नमः।
511) ॐ चन्द्रकान्तये नमः।
512) ॐ सूर्यकान्तये नमः।
513) ॐ निशाचर्यै नमः।
514) ॐ डाकिन्यै नमः।
515) ॐ शाकिन्यै नमः।
516) ॐ शिष्यायै नमः।
517) ॐ हाकिन्यै नमः।
518) ॐ चक्रवाकिन्यै नमः।
519) ॐ सितासितप्रियायै नमः।
520) ॐ स्वङ्गायै नमः।
521) ॐ सकलायै नमः।
522) ॐ वनदेवतायै नमः।
523) ॐ गुरुरूपधरायै नमः।
524) ॐ गुर्व्यै नमः।
525) ॐ मृत्यवे नमः।
526) ॐ मार्यै नमः।
527) ॐ विशारदायै नमः।
528) ॐ महामार्यै नमः।
529) ॐ विनिद्रायै नमः।
530) ॐ तन्द्रायै नमः।
531) ॐ मृत्युविनाशिन्यै नमः।
532) ॐ चन्द्रमण्डलसङ्काशायै नमः।
533) ॐ चन्द्रमण्डलवासिन्यै नमः।
534) ॐ अणिमादिगुणोपेतायै नमः।
535) ॐ सुस्पृहायै नमः।
536) ॐ कामरूपिण्यै नमः।
537) ॐ अष्टसिद्धिप्रदायै नमः।
538) ॐ प्रौढायै नमः।
539) ॐ दुष्टदानवघातिन्यै नमः।
540) ॐ अनादिनिधनापुष्टये नमः।
541) ॐ चतुर्बाहवे नमः।
542) ॐ चतुर्मुख्यै नमः।
543) ॐ चतुःसमुद्रशयनायै नमः।
544) ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः।
545) ॐ काशपुष्पप्रतीकाशायै नमः।
546) ॐ शरत्कुमुदलोचनायै नमः।
547) ॐ भूतायै नमः।
548) ॐ भव्यायै नमः।
549) ॐ भविष्यायै नमः।
550) ॐ शैलजायै नमः।
551) ॐ शैलवासिन्यै नमः।
552) ॐ वाममार्गरतायै नमः।
553) ॐ वामायै नमः।
554) ॐ शिववामाङ्गवासिन्यै नमः।
555) ॐ वामाचारप्रियायै नमः।
556) ॐ तुष्टायै नमः।
557) ॐ लोपामुद्रायै नमः।
558) ॐ प्रबोधिन्यै नमः।
559) ॐ भूतात्मने नमः।
560) ॐ परमात्मने नमः।
561) ॐ भूतभाविविभाविन्यै नमः।
562) ॐ मङ्गलायै नमः।
563) ॐ सुशीलायै नमः।
564) ॐ परमार्थप्रबोधिन्यै नमः।
565) ॐ दक्षिणायै नमः।
566) ॐ दक्षिणामूर्तये नमः।
567) ॐ सुदक्षिणायै नमः।
568) ॐ हरिप्रियायै नमः।
569) ॐ योगिन्यै नमः।
570) ॐ योगयुक्तायै नमः।
571) ॐ योगाङ्गायै नमः।
572) ॐ ध्यानशालिन्यै नमः।
573) ॐ योगपट्टधरायै नमः।
574) ॐ मुक्तायै नमः।
575) ॐ मुक्तानांपरमागतये नमः।
576) ॐ नारसिंह्यै नमः।
577) ॐ सुजन्मायै नमः।
578) ॐ त्रिवर्गफलदायिन्यै नमः।
579) ॐ धर्मदायै नमः।
580) ॐ धनदायै नमः।
581) ॐ कामदायै नमः।
582) ॐ मोक्षदायै नमः।
583) ॐ द्युतये नमः।
584) ॐ साक्षिण्यै नमः।
585) ॐ क्षणदायै नमः।
586) ॐ दक्षायै नमः।
587) ॐ दक्षजायै नमः।
588) ॐ कोटिरूपिण्यै नमः।
589) ॐ क्रतवे नमः।
590) ॐ कात्यायन्यै नमः।
591) ॐ स्वछायै नमः।
592) ॐ स्वच्छन्दायै नमः।
593) ॐ कविप्रियायै नमः।
594) ॐ सत्यागमायै नमः।
595) ॐ बहिःस्थायै नमः।
596) ॐ काव्यशक्तये नमः।
597) ॐ कवित्वदायै नमः।
598) ॐ मेनापुत्र्यै नमः।
599) ॐ सतीमात्रे नमः।
600) ॐ मैनाकभगिन्यै नमः।




601) ॐ तडिते नमः।
602) ॐ सौदामिन्यै नमः।
603) ॐ स्वधामायै नमः।
604) ॐ सुधामायै नमः।
605) ॐ धामशालिन्यै नमः।
606) ॐ सौभाग्यदायिन्यै नमः।
607) ॐ दिवे नमः।
608) ॐ सुभगायै नमः।
609) ॐ द्युतिवर्धिन्यै नमः।
610) ॐ श्रिये नमः।
611) ॐ कृत्तिवसनायै नमः।
612) ॐ कङ्काल्यै नमः।
613) ॐ कलिनाशिन्यै नमः।
614) ॐ रक्तबीजवधोद्दृप्तायै नमः।
615) ॐ सुतन्तवे नमः।
616) ॐ बीजसन्ततये नमः।
617) ॐ जगज्जीवायै नमः।
618) ॐ जगद्बीजायै नमः।
619) ॐ जगत्त्रयहितैषिण्यै नमः।
620) ॐ चामीकररुचये नमः।
621) ॐ चान्द्रीसाक्षयाषोडशीकलायै नमः।
622) ॐ यत्तत्पदानुबन्धायै नमः।
623) ॐ यक्षिण्यै नमः।
624) ॐ धनदार्चितायै नमः।
625) ॐ चित्रिण्यै नमः।
626) ॐ चित्रमायायै नमः।
627) ॐ विचित्रायै नमः।
628) ॐ भुवनेश्वर्यै नमः।
629) ॐ चामुण्डायै नमः।
630) ॐ मुण्डहस्तायै नमः।
631) ॐ चण्डमुण्डवधोद्धुरायै नमः।
632) ॐ अष्टम्यै नमः।
633) ॐ एकादश्यै नमः।
634) ॐ पूर्णायै नमः।
635) ॐ नवम्यै नमः।
636) ॐ चतुर्दश्यै नमः।
637) ॐ अमायै नमः।
638) ॐ कलशहस्तायै नमः।
639) ॐ पूर्णकुम्भधरायै नमः।
640) ॐ धरायै नमः।
641) ॐ अभीरवे नमः।
642) ॐ भैरव्यै नमः।
643) ॐ भीरायै नमः।
644) ॐ भीमायै नमः।
645) ॐ त्रिपुरभैरव्यै नमः।
646) ॐ महारुण्डायै नमः।
647) ॐ रौद्र्यै नमः।
648) ॐ महाभैरवपूजितायै नमः।
649) ॐ निर्मुण्डायै नमः।
650) ॐ हस्तिन्यै नमः।
651) ॐ चण्डायै नमः।
652) ॐ करालदशनाननायै नमः।
653) ॐ करालायै नमः।
654) ॐ विकरालायै नमः।
655) ॐ घोरघुर्घुरनादिन्यै नमः।
656) ॐ रक्तदन्तायै नमः।
657) ॐ ऊर्ध्वकेश्यै नमः।
658) ॐ बन्धूककुसुमारुणायै नमः।
659) ॐ कादम्बर्यै नमः।
660) ॐ पटासायै नमः।
661) ॐ काश्मीर्यै नमः।
662) ॐ कुंकुमप्रियायै नमः।
663) ॐ क्षान्तये नमः।
664) ॐ बहुसुवर्णायै नमः।
665) ॐ रतये नमः।
666) ॐ बहुसुवर्णदायै नमः।
667) ॐ मातङ्गिन्यै नमः।
668) ॐ वरारोहायै नमः।
669) ॐ मत्तमातङ्गगामिन्यै नमः।
670) ॐ हिंसायै नमः।
671) ॐ हंसगतये नमः।
672) ॐ हंस्यै नमः।
673) ॐ हंसोज्ज्वलशिरोरुहायै नमः।
674) ॐ पूर्णचन्द्रमुख्यै नमः।
675) ॐ श्यामायै नमः।
676) ॐ स्मितास्यायै नमः।
677) ॐ श्यामकुण्डलायै नमः।
678) ॐ मष्यै नमः।
679) ॐ लेखिन्यै नमः।
680) ॐ लेख्यायै नमः।
681) ॐ सुलेखायै नमः।
682) ॐ लेखकप्रियायै नमः।
683) ॐ शङ्खिन्यै नमः।
684) ॐ शङ्खहस्तायै नमः।
685) ॐ जलस्थायै नमः।
686) ॐ जलदेवतायै नमः।
687) ॐ कुरुक्षेत्रावनये नमः।
688) ॐ काश्यै नमः।
689) ॐ मथुरायै नमः।
690) ॐ काञ्च्यै नमः।
691) ॐ अवन्तिकायै नमः।
692) ॐ अयोध्यायै नमः।
693) ॐ द्वारकायै नमः।
694) ॐ मायायै नमः।
695) ॐ तीर्थायै नमः।
696) ॐ तीर्थकरप्रियायै नमः।
697) ॐ त्रिपुष्करायै नमः।
698) ॐ अप्रमेयायै नमः।
699) ॐ कोशस्थायै नमः।
700) ॐ कोशवासिन्यै नमः।


701) ॐ कौशिक्यै नमः।
702) ॐ कुशावर्तायै नमः।
703) ॐ कौशाम्ब्यै नमः।
704) ॐ कोशवर्धिन्यै नमः।
705) ॐ कोशदायै नमः।
706) ॐ पद्मकोशाक्ष्यै नमः।
707) ॐ कुसुमायै नमः।
708) ॐ कुसुमप्रियायै नमः।
709) ॐ तोतुलायै नमः।
710) ॐ तुलाकोटयै नमः।
711) ॐ कूटस्थायै नमः।
712) ॐ कोटराश्रयायै नमः।
713) ॐ स्वयम्भुवे नमः।
714) ॐ सुरूपायै नमः।
715) ॐ स्वरूपायै नमः।
716) ॐ रूपवर्धिन्यै नमः।
717) ॐ तेजस्विन्यै नमः।
718) ॐ सुभिक्षायै नमः।
719) ॐ बलदायै नमः।
720) ॐ बलदायिन्यै नमः।
721) ॐ महाकोश्यै नमः।
722) ॐ महावर्तायै नमः।
723) ॐ बुद्धिसदसदात्मिकायै नमः।
724) ॐ महाग्रहहरायै नमः।
725) ॐ सौम्यायै नमः।
726) ॐ विशोकायै नमः।
727) ॐ शोकनाशिन्यै नमः।
728) ॐ सात्त्विक्यै नमः।
729) ॐ सत्त्वसंस्थायै नमः।
730) ॐ राजस्यै नमः।
731) ॐ रजोवृतायै नमः।
732) ॐ तामस्यै नमः।
733) ॐ तमोयुक्तायै नमः।
734) ॐ गुणत्रयविभाविन्यै नमः।
735) ॐ अव्यक्तायै नमः।
736) ॐ व्यक्तरूपायै नमः।
737) ॐ वेदविद्यायै नमः।
738) ॐ शाम्भव्यै नमः।
739) ॐ शङ्कराकल्पिनीकल्पायै नमः।
740) ॐ मनःसङ्कल्पसन्ततये नमः।
741) ॐ सर्वलोकमयीशक्तये नमः।
742) ॐ सर्वश्रवणगोचरायै नमः।
743) ॐ सर्वज्ञानवतीवाञ्छायै नमः।
744) ॐ सर्वतत्त्वानुबोधिन्यै नमः।
745) ॐ जागृत्यै नमः।
746) ॐ सुषुप्तये नमः।
747) ॐ स्वप्नावस्थायै नमः।
748) ॐ तुरीयकायै नमः।
749) ॐ त्वरायै नमः।
750) ॐ मन्दगतये नमः।
751) ॐ मन्दायै नमः।
752) ॐ मन्दिरामोदधारिण्यै नमः।
753) ॐ पानभूमये नमः।
754) ॐ पानपात्रायै नमः।
755) ॐ पानदानकरोद्यतायै नमः।
756) ॐ अघूर्णारुणनेत्रायै नमः।
757) ॐ किञ्चिदव्यक्तभाषिण्यै नमः।
758) ॐ आशापूरायै नमः।
759) ॐ दीक्षायै नमः।
760) ॐ दक्षायै नमः।
761) ॐ दीक्षितपूजितायै नमः।
762) ॐ नागवल्ल्यै नमः।
763) ॐ नागकन्यायै नमः।
764) ॐ भोगिन्यै नमः।
765) ॐ भोगवल्लभायै नमः।
766) ॐ सर्वशास्त्रवतीविद्यायै नमः।
767) ॐ सुस्मृतये नमः।
768) ॐ धर्मवादिन्यै नमः।
769) ॐ श्रुतये नमः।
770) ॐ श्रुतिधरायै नमः।
771) ॐ ज्येष्ठायै नमः।
772) ॐ श्रेष्ठायै नमः।
773) ॐ पातालवासिन्यै नमः।
774) ॐ मीमांसायै नमः।
775) ॐ तर्कविद्यायै नमः।
776) ॐ सुभक्तये नमः।
777) ॐ भक्तवत्सलायै नमः।
778) ॐ सुनाभये नमः।
779) ॐ यातनायै नमः।
780) ॐ जातये नमः।
781) ॐ गम्भीरायै नमः।
782) ॐ भाववर्जितायै नमः।
783) ॐ नागपाशधरामूर्तये नमः।
784) ॐ अगाधायै नमः।
785) ॐ नागकुण्डलायै नमः।
786) ॐ सुचक्रायै नमः।
787) ॐ चक्रमध्यस्थायै नमः।
788) ॐ चक्रकोणनिवासिन्यै नमः।
789) ॐ सर्वमन्त्रमयीविद्यायै नमः।
790) ॐ सर्वमन्त्राक्षरावलये नमः।
791) ॐ मधुस्रवायै नमः।
792) ॐ स्रवन्त्यै नमः।
793) ॐ भ्रामर्यै नमः।
794) ॐ भ्रमरालकायै नमः।
795) ॐ मातृमण्डलमध्यस्थायै नमः।
796) ॐ मातृमण्डलवासिन्यै नमः।
797) ॐ कुमारजनन्यै नमः।
798) ॐ क्रूरायै नमः।
799) ॐ सुमुख्यै नमः।
800) ॐ ज्वरनाशिन्यै नमः।


801) ॐ अतीतायै नमः।
802) ॐ विद्यमानायै नमः।
803) ॐ भाविन्यै नमः।
804) ॐ प्रीतिमञ्जर्यै नमः।
805) ॐ सर्वसौख्यवतीयुक्तये नमः।
806) ॐ आहारपरिणामिन्यै नमः।
807) ॐ पञ्चभूतानांनिधानायै नमः।
808) ॐ भवसागरतारिण्यै नमः।
809) ॐ अक्रूरायै नमः।
810) ॐ ग्रहवत्यै नमः।
811) ॐ विग्रहायै नमः।
812) ॐ ग्रहवर्जितायै नमः।
813) ॐ रोहिण्यै नमः।
814) ॐ भूमिगर्भायै नमः।
815) ॐ कालभुवे नमः।
816) ॐ कालवर्तिन्यै नमः।
817) ॐ कलङ्करहितानार्यै नमः।
818) ॐ चतुष्षष्ट्यभिधावत्यै नमः।
819) ॐ जीर्णायै नमः।
820) ॐ जीर्णवस्त्रायै नमः।
821) ॐ नूतनायै नमः।
822) ॐ नववल्लभायै नमः।
823) ॐ अरजायै नमः।
824) ॐ रतये नमः।
825) ॐ प्रीतये नमः।
826) ॐ रतिरागविवर्धिन्यै नमः।
827) ॐ पञ्चवातगतिर्भिन्नायै नमः।
828) ॐ पञ्चश्लेष्माशयाधरायै नमः।
829) ॐ पञ्चपित्तवतीशक्तये नमः।
830) ॐ पञ्चस्थानविबोधिन्यै नमः।
831) ॐ उदक्यायै नमः।
832) ॐ वृषस्यन्त्यै नमः।
833) ॐ त्र्यहंबहिःप्रस्रविण्यै नमः।
834) ॐ रजःशुक्रधराशक्तये नमः।
835) ॐ जरायवे नमः।
836) ॐ गर्भधारिण्यै नमः।
837) ॐ त्रिकालज्ञायै नमः।
838) ॐ त्रिलिङ्गायै नमः।
839) ॐ त्रिमूर्तये नमः।
840) ॐ त्रिपुरवासिन्यै नमः।
841) ॐ अरागायै नमः।
842) ॐ शिवतत्त्वायै नमः।
843) ॐ कामतत्त्वानुरागिण्यै नमः।
844) ॐ प्राच्यै नमः।
845) ॐ अवाच्यै नमः।
846) ॐ प्रतीच्यै नमः।
847) ॐ उदीच्यै नमः।
848) ॐ विदिग्दिशायै नमः।
849) ॐ अहङ्कृतये नमः।
850) ॐ अहङ्कारायै नमः।
851) ॐ बलिमायायै नमः।
852) ॐ बलिप्रियायै नमः।
853) ॐ स्रुचे नमः।
854) ॐ स्रुवायै नमः।
855) ॐ सामिधेन्यै नमः।
856) ॐ सश्रद्धायै नमः।
857) ॐ श्राद्धदेवतायै नमः।
858) ॐ मात्रे नमः।
859) ॐ मातामह्यै नमः।
860) ॐ तृप्तये नमः।
861) ॐ पितृमात्रे नमः।
862) ॐ पितामह्यै नमः।
863) ॐ स्नुषायै नमः।
864) ॐ दौहित्रिण्यै नमः।
865) ॐ पुत्र्यै नमः।
866) ॐ पौत्र्यै नमः।
867) ॐ नप्त्र्यै नमः।
868) ॐ शिशुप्रियायै नमः।
869) ॐ स्तनदायै नमः।
870) ॐ स्तनधारायै नमः।
871) ॐ विश्वयोनये नमः।
872) ॐ स्तनन्धय्यै नमः।
873) ॐ शिशूत्सङ्गधरायै नमः।
874) ॐ दोलायै नमः।
875) ॐ दोलाक्रीडाभिनन्दिन्यै नमः।
876) ॐ उर्वश्यै नमः।
877) ॐ कदल्यै नमः।
878) ॐ केकायै नमः।
879) ॐ विशिखायै नमः।
880) ॐ शिखिवर्तिन्यै नमः।
881) ॐ खट्वाङ्गधारिण्यै नमः।
882) ॐ खट्वायै नमः।
883) ॐ बाणपुङ्खानुवर्तिन्यै नमः।
884) ॐ लक्ष्यप्राप्तये नमः।
885) ॐ कलायै नमः।
886) ॐ अलक्ष्यायै नमः।
887) ॐ लक्ष्यायै नमः।
888) ॐ शुभलक्षणायै नमः।
889) ॐ वर्तिन्यै नमः।
890) ॐ सुपथाचारायै नमः।
891) ॐ परिखायै नमः।
892) ॐ खनये नमः।
893) ॐ वृतये नमः।
894) ॐ प्राकारवलयायै नमः।
895) ॐ वेलायै नमः।
896) ॐ महोदधौमर्यादायै नमः।
897) ॐ पोषणीशक्तये नमः।
898) ॐ शोषणीशक्तये नमः।
899) ॐ दीर्घकेश्यै नमः।
900) ॐ सुलोमशायै नमः।




901) ॐ ललितायै नमः।
902) ॐ मांसलायै नमः।
903) ॐ तन्व्यै नमः।
904) ॐ वेदवेदाङ्गधारिण्यै नमः।
905) ॐ नरासृक्पानमत्तायै नमः।
906) ॐ नरमुण्डास्थिभूषणायै नमः।
907) ॐ अक्षक्रीडारतये नमः।
908) ॐ शार्यै नमः।
909) ॐ शारिकाशुकभाषिण्यै नमः।
910) ॐ शाम्बर्यै नमः।
911) ॐ गारुडीविद्यायै नमः।
912) ॐ वारुण्यै नमः।
913) ॐ वरुणार्चितायै नमः।
914) ॐ वाराह्यै नमः।
915) ॐ मुण्डहस्तायै नमः।
916) ॐ दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरायै नमः।
917) ॐ मीनमूर्तिधरायै नमः।
918) ॐ मूर्तायै नमः।
919) ॐ वदन्यायै नमः।
920) ॐ प्रतिमाश्रयायै नमः।
921) ॐ अमूर्तायै नमः।
922) ॐ निधिरूपायै नमः।
923) ॐ शालग्रामशिलाशुचये नमः।
924) ॐ स्मृतये नमः।
925) ॐ संस्काररूपायै नमः।
926) ॐ सुसंस्कारायै नमः।
927) ॐ संस्कृतये नमः।
928) ॐ प्राकृतायै नमः।
929) ॐ देशभाषायै नमः।
930) ॐ गाथायै नमः।
931) ॐ गीतये नमः।
932) ॐ प्रहेलिकायै नमः।
933) ॐ इडायै नमः।
934) ॐ पिङ्गलायै नमः।
935) ॐ पिङ्गायै नमः।
936) ॐ सुषुम्णायै नमः।
937) ॐ सूर्यवाहिन्यै नमः।
938) ॐ शशिस्रवायै नमः।
939) ॐ तालुस्थायै नमः।
940) ॐ काकिन्यै नमः।
941) ॐ अमृतजीविन्यै नमः।
942) ॐ अणुरूपायै नमः।
943) ॐ बृहद्रूपायै नमः।
944) ॐ लघुरूपायै नमः।
945) ॐ गुरुस्थिरायै नमः।
946) ॐ स्थावरायै नमः।
947) ॐ जङ्गमायै नमः।
948) ॐ देव्यै नमः।
949) ॐ कृतकर्मफलप्रदायै नमः।
950) ॐ विषयाक्रान्तदेहायै नमः।
951) ॐ निर्विशेषायै नमः।
952) ॐ जितेन्द्रियायै नमः।
953) ॐ विश्वरूपायै नमः।
954) ॐ चिदानन्दायै नमः।
955) ॐ परब्रह्मप्रबोधिन्यै नमः।
956) ॐ निर्विकारायै नमः।
957) ॐ निर्वैरायै नमः।
958) ॐ विरतये नमः।
959) ॐ सत्यवर्धिन्यै नमः।
960) ॐ पुरुषाज्ञायै नमः।
961) ॐ भिन्नायै नमः।
962) ॐ क्षान्तिःकैवल्यदायिन्यै नमः।
963) ॐ विविक्तसेविन्यै नमः।
964) ॐ प्रज्ञाजनयित्र्यै नमः।
965) ॐ बहुश्रुतये नमः।
966) ॐ निरीहायै नमः।
967) ॐ समस्तैकायै नमः।
968) ॐ सर्वलोकैकसेवितायै नमः।
969) ॐ सेवायै नमः।
970) ॐ सेवाप्रियायै नमः।
971) ॐ सेव्यायै नमः।
972) ॐ सेवाफलविवर्धिन्यै नमः।
973) ॐ कलौकल्किप्रियाकाल्यै नमः।
974) ॐ दुष्टम्लेच्छविनाशिन्यै नमः।
975) ॐ प्रत्यञ्चायै नमः।
976) ॐ धनुर्यष्टये नमः।
977) ॐ खड्गधारायै नमः।
978) ॐ दुरानतये नमः।
979) ॐ अश्वप्लुतये नमः।
980) ॐ वल्गायै नमः।
981) ॐ सृणये नमः।
982) ॐ सन्मत्तवारणायै नमः।
983) ॐ वीरभुवे नमः।
984) ॐ वीरमात्रे नमः।
985) ॐ वीरसुवे नमः।
986) ॐ वीरनन्दिन्यै नमः।
987) ॐ जयश्रियै नमः।
988) ॐ जयदीक्षायै नमः।
989) ॐ जयदायै नमः।
990) ॐ जयवर्धिन्यै नमः।
991) ॐ सौभाग्यसुभगाकारायै नमः।
992) ॐ सर्वसौभाग्यवर्धिन्यै नमः।
993) ॐ क्षेमङ्कर्यै नमः।
994) ॐ सिद्धिरूपायै नमः।
995) ॐ सत्कीर्तये नमः।
996) ॐ पथिदेवतायै नमः।
997) ॐ सर्वतीर्थमयीमूर्तये नमः।
998) ॐ सर्वदेवमयीप्रभायै नमः।
999) ॐ सर्वसिद्धिप्रदाशक्तये नमः।
1000) ॐ सर्वमङ्गलमङ्गलायै नमः।

Thursday, February 18, 2021

शिव कृतं दुर्गा स्तोत्र || 


श्रीमहादेव उवाच


रक्ष रक्ष महादेवि दुर्गे दुर्गतिनाशिनि। मां भक्त मनुरक्तं च शत्रुग्रस्तं कृपामयि॥

विष्णुमाये महाभागे नारायणि सनातनि। ब्रह्मस्वरूपे परमे नित्यानन्दस्वरूपिणी॥


त्वं च ब्रह्मादिदेवानामम्बिके जगदम्बिके। त्वं साकारे च गुणतो निराकारे च निर्गुणात्॥

मायया पुरुषस्त्वं च मायया प्रकृति: स्वयम्। तयो: परं ब्रह्म परं त्वं बिभर्षि सनातनि॥


वेदानां जननी त्वं च सावित्री च परात्परा। वैकुण्ठे च महालक्ष्मी: सर्वसम्पत्स्वरूपिणी॥



म‌र्त्यलक्ष्मीश्च क्षीरोदे कामिनी शेषशायिन:। स्वर्गेषु स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं राजलक्ष्मीश्च भूतले॥

नागादिलक्ष्मी: पाताले गृहेषु गृहदेवता। सर्वशस्यस्वरूपा त्वं सर्वैश्वर्यविधायिनी॥


रागाधिष्ठातृदेवी त्वं ब्रह्मणश्च सरस्वती। प्राणानामधिदेवी त्वं कृष्णस्य परमात्मन:॥

गोलोके च स्वयं राधा श्रीकृष्णस्यैव वक्षसि। गोलोकाधिष्ठिता देवी वृन्दावनवने वने॥


श्रीरासमण्डले रम्या वृन्दावनविनोदिनी। शतश्रृङ्गाधिदेवी त्वं नामन चित्रावलीति च॥


दक्षकन्या कुत्र कल्पे कुत्र कल्पे च शैलजा।


देवमातादितिस्त्वं च सर्वाधारा वसुन्धरा॥



त्वमेव गङ्गा तुलसी त्वं च स्वाहा स्वधा सती।


त्वदंशांशांशकलया सर्वदेवादियोषित:॥



स्त्रीरूपं चापिपुरुषं देवि त्वं च नपुंसकम्।


वृक्षाणां वृक्षरूपा त्वं सृष्टा चाङ्कुररूपिणी॥



वह्नौ च दाहिकाशक्ति र्जले शैत्यस्वरूपिणी।


सूर्ये तेज:स्वरूपा च प्रभारूपा च संततम्॥



गन्धरूपा च भूमौ च आकाशे शब्दरूपिणी।


शोभास्वरूपा चन्द्रे च पद्मसङ्घे च निश्चितम्॥



सृष्टौ सृष्टिस्वरूपा च पालने परिपालिका।


महामारी च संहारे जले च जलरूपिणी॥



क्षुत्त्‍‌वं दया त्वं निद्रा त्वं तृष्णा त्वं बुद्धिरूपिणी। तुष्टिस्त्वं चापि पुष्टिस्त्वं श्रद्धा त्वं च क्षमा स्वयम्॥

शान्तिस्त्वं च स्वयं भ्रान्ति: कान्तिस्त्वं कीर्तिरेव च। लज्जा त्वं च तथा माया भुक्ति मुक्ति स्वरूपिणी॥


सर्वशक्ति स्वरूपा त्वं सर्वसम्पत्प्रदायिनी। वेदेऽनिर्वचनीया त्वं त्वां न जानाति कश्चन॥

सहस्त्रवक्त्रस्त्वां स्तोतुं न च शक्त : सुरेश्वरि। वेदा न शक्त : को विद्वान् न च शक्त ा सरस्वती॥


स्वयं विधाता शक्तो न न च विष्णु: सनातन:। किं स्तौमि पञ्चवक्त्रेण रणत्रस्तो महेश्वरि॥

कृपां कुरु महामाये मम शत्रुक्षयं कुरु।
श्री दुर्गा स्तुति || 

हे सिंहवाहिनी,
शक्तिशालिनी,

कष्टहारिणी माँ दुर्गे।

महिषासुरमर्दिनि,

भव भय भंजनि,

शक्तिदायिनी माँ दुर्गे।

तुम निर्बल की रक्षक,

भक्तों का बल विश्वास बढ़ाती हो

दुष्टों पर बल से विजय प्राप्त करने का पाठ पढ़ाती हो।


हे जगजननी, रणचण्डी,

रण में शत्रुनाशिनी माँ दुर्गे।

जग के कण-कण में

महाशक्ति की व्याप्त अमर तुम चिंगारी

दृढ़ निश्चय की निर्भय प्रतिमा,

जिससे डरते अत्याचारी।

हे शक्ति स्वरूपा,

विश्ववन्द्य, कालिका, मानिनि माँ दुर्गे।

तुम परब्रम्ह की परम ज्योति

दुष्टों से जग की त्राता हो

पर भावुक भक्तों की कल्याणी परमवत्सला माता हो।

निशिचर विदारिणी,

जग विहारिणि, स्नेहदायिनी माँ दुर्गे।

Tuesday, February 16, 2021

महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् - अयि गिरिनन्दिनि


अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुतेगिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥


सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते
दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥

अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते
शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।
मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥

अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते
रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ।
निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥

अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते
चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते ।
दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥

अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे
त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे ।
दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥

अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते
समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते ।
शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥

धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके ।
कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥

सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते
कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।
धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥

जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते
झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते ।
नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥

अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते
श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते ।
सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥

सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते
विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते ।
शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥

अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते
त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते ।
अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥

कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते
सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले ।
अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥

करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते
मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते ।
निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥

कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे
प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे
जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥

विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते
कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते ।
सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥

पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।
तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥

कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम्
भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् ।
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम्
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥

तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते ।
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥

अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते ।
यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २१ ॥

Saturday, February 13, 2021

दुर्गा पूजा के पुष्पांजलि मंत्र




दुर्गा माता को पुष्पांजलि देते हुए निचे लिखे हुए मंत्रो का उच्चारण करें !


ॐ जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी।

दुर्गा, शिवा, क्षमा, धात्री, स्वाहा, स्वधा नमोऽस्तु ते॥

एष सचन्दन गन्ध पुष्प बिल्व पत्राञ्जली ॐ ह्रीं दुर्गायै नमः॥



ॐ महिषघ्नी महामाये चामुण्डे मुण्डमालिनी।

आयुरारोग्यविजयं देहि देवि! नमोऽस्तु ते॥

एष सचन्दन गन्ध पुष्प बिल्व पत्राञ्जली ॐ ह्रीं दुर्गायै नमः॥



ॐ सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥१॥

सृष्टि स्थिति विनाशानां शक्तिभूते सनातनि!।

गुणाश्रये गुणमये नारायणि! नमोऽस्तु ते॥२॥

शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे!।

सर्वस्यार्तिहरे देवि! नारायणि! नमोऽस्तु ते॥३॥

कीलकस्तोत्रम् - शक्तिशाली दुर्गा मंत्र



॥ अथ कीलकम् ॥

ॐ अस्य श्रीकीलकमन्त्रस्य शिव ऋषिः,अनुष्टुप् छन्दः,

श्रीमहासरस्वती देवता,श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थं सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः।


ॐ नमश्‍चण्डिकायै॥


मार्कण्डेय उवाच

ॐ विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे।

श्रेयःप्राप्तिनिमित्ताय नमः सोमार्धधारिणे॥1॥


सर्वमेतद्विजानीयान्मन्त्राणामभिकीलकम्।

सोऽपि क्षेममवाप्नोति सततं जाप्यतत्परः॥2॥


सिद्ध्यन्त्युच्चाटनादीनि वस्तूनि सकलान्यपि।

एतेन स्तुवतां देवी स्तोत्रमात्रेण सिद्ध्यति॥3॥


न मन्त्रो नौषधं तत्र न किञ्चिदपि विद्यते।

विना जाप्येन सिद्ध्येत सर्वमुच्चाटनादिकम्॥4॥


समग्राण्यपि सिद्ध्यन्ति लोकशङ्कामिमां हरः।

कृत्वा निमन्त्रयामास सर्वमेवमिदं शुभम्॥5॥


स्तोत्रं वै चण्डिकायास्तु तच्च गुप्तं चकार सः।

समाप्तिर्न च पुण्यस्य तां यथावन्नियन्त्रणाम्॥6॥


सोऽपि क्षेममवाप्नोति सर्वमेवं न संशयः।

कृष्णायां वा चतुर्दश्यामष्टम्यां वा समाहितः॥7॥


ददाति प्रतिगृह्णाति नान्यथैषा प्रसीदति।

इत्थंरुपेण कीलेन महादेवेन कीलितम्॥8॥


यो निष्कीलां विधायैनां नित्यं जपति संस्फुटम्।

स सिद्धः स गणः सोऽपि गन्धर्वो जायते नरः॥9॥


न चैवाप्यटतस्तस्य भयं क्वापीह जायते।

नापमृत्युवशं याति मृतो मोक्षमवाप्नुयात्॥10॥


ज्ञात्वा प्रारभ्य कुर्वीत न कुर्वाणो विनश्यति।

ततो ज्ञात्वैव सम्पन्नमिदं प्रारभ्यते बुधैः॥11॥


सौभाग्यादि च यत्किञ्चिद् दृश्यते ललनाजने।

तत्सर्वं तत्प्रसादेन तेन जाप्यमिदं शुभम्॥12॥


शनैस्तु जप्यमानेऽस्मिन् स्तोत्रे सम्पत्तिरुच्चकैः।

भवत्येव समग्रापि ततः प्रारभ्यमेव तत्॥13॥


ऐश्‍वर्यं यत्प्रसादेन सौभाग्यारोग्यसम्पदः।

शत्रुहानिःपरो मोक्षः स्तूयते सा न किं जनैः॥14॥


॥ इति देव्याः कीलकस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

दुर्गा मंत्र 


" ॐ ह्रींग डुंग दुर्गायै नमः "


नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै'


1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

2. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

3. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।


भय को दूर करने के लिए दुर्गा मंत्र
सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिमन्विते ।
भये भ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमो स्तुते ॥


पापों का नाश करने वाला दुर्गा मंत्र
हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥


मुसीबतों से मुक्ति पाने के लिए दुर्गा मंत्र
शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥


बीमारी से रक्षा करने के लिए दुर्गा महामंत्र
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥


पुत्र प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र
देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥


महामारी नाश के लिए दुर्गा मंत्र
जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तुते ॥


शक्ति और बल प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र
सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।
गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तुते ॥


धन के लिए मंत्र
“दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥”


मनचाहे जीवसाथी पाने के लिए मंत्र -
( पुरुषों के लिए )
ॐ कात्यायनि महामाये महायेगिन्यधीश्वरि ।
नन्दगोपसुते देवि पतिं मे कुरु ते नमः ॥


महिलाओं के लिए मनचाहा वर पाने के लिए मंत्र
पत्नीं मनोरामां देहि मनोववृत्तानुसारिणीम् ।
तारिणीं दुर्गसंसार-सागरस्य कुलोभ्दवाम् ।।


गौरी मंत्र पति प्राप्ति के लिए
" हे गौरी शंकरधंगी ! यथा तवं शंकरप्रिया,
तथा मां कुरु कल्याणी ! कान्तकान्तम् सुदुर्लभं "


रक्षा पाने के लिए मंत्र
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥


आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए मंत्र
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥


भक्ति प्राप्ति के लिए मां दुर्गा की वंदना इस मंत्र के द्वारा करना चाहिए
नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे |
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ||


सामूहिक कल्याण के लिए मां दुर्गा की वंदना
देव्या यया ततमिदं जग्दात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या |
तामम्बिकामखिलदेव महर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ||


इसके अतिरिक्त मां दुर्गा के नौ शक्ति रुपी देवियों के बीज मंत्रों के पाठ करने से नौ की नौ देवियां स्वतः ही प्रसन्न होकर कृपा बरसाने लगती हैं ।


नौ देवियों के स्वयं सिद्ध बीज मंत्र


शैलपुत्री : ह्रीं शिवायै नम: ।
ब्रह्मचारिणी : ह्रीं श्री अम्बिकायै नम: ।
चन्द्रघंटा : ऐं श्रीं शक्तयै नम: ।
कूष्मांडा : ऐं ह्री देव्यै नम: ।
स्कंदमाता : ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम: ।
कात्यायनी : क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम: ।
कालरात्रि : क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम: ।
महागौरी : श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: ।
सिद्धिदात्री : ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम: ।

श्री दुर्गा माँ अष्टोत्तर शतनामावली


ॐ देव्यै नमः
ॐ दुर्गायै नमः
ॐ त्रिभुवनेश्वर्यै नमः
ॐ यशोदागर्भसंभूतायै नमः


ॐ नारायणवरप्रियायै नमः
ॐ नन्दगोपकुलेजातायै नमः
ॐ मङ्गल्यायै नमः
ॐ कुलवर्धिन्यै नमः
ॐ कंसविद्रावणकर्यै नमः


ॐ असुरक्षयंकर्यै नमः
ॐ शिलातटविनिक्षिप्तायै नमः
ॐ आकाशगामिन्यै नमः
ॐ वासुदेवभगिन्यै नमः
ॐ दिव्यमाल्यविभूषितायै नमः
ॐ दिव्यांबरधरायै नमः


ॐ खड्गखेटकधारिण्यै नमः
ॐ शिवायै नमः
ॐ पापतारिण्यै नमः
ॐ वरदायै नमः
ॐ कृष्णायै नमः


ॐ कुमार्यै नमः
ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः
ॐ बालार्कसदृशाकारायै नमः
ॐ पूर्णचन्द्रनिभाननायै नमः
ॐ चतुर्भुजायै नमः
ॐ चतुर्वक्त्रायै नमः






ॐ पीनश्रोणिपयोधरायै नमः
ॐ मयूरपिच्छवलयायै नमः
ॐ केयूरांगदधारिण्यै नमः
ॐ कृष्णच्छविसमायै नमः
ॐ किष्णायै नमः
ॐ सङ्कर्षणसमाननायै नमः
ॐ इन्द्रध्वजसमबाहुधारिण्यै नमः
ॐ पात्रधारिण्यै नमः
ॐ पंकजधारिण्यै नमः


ॐ घंटाधारिण्यै नमः
ॐ पाशधारिण्यै नमः
ॐ धनुर्धारिण्यै नमः
ॐ महाचक्रधारिण्यै नमः
ॐ विविधायुधधरायै नमः
ॐ कुण्डलपूर्णकर्णविभूषितायै नमः
ॐ चन्द्रविस्पर्धिमुखविराजितायै नमः
ॐ मुकुटविराजितायै नमः


ॐ शिखिपिच्छध्वजविराजितायै नमः
ॐ कौमारव्रतधरायै नमः
ॐ त्रिदिवपावयित्र्यै नमः
ॐ त्रिदशपूजितायै नमः
ॐ त्रैलोक्यरक्षिण्यै नमः
ॐ महिषासुरनाशिन्यै नमः
ॐ प्रसन्नायै नमः
ॐ सुरश्रेष्ठायै नमः
ॐ शिवायै नमः


ॐ जयायै नमः
ॐ विजयायै नमः
ॐ संग्रामजयप्रदायै नमः
ॐ वरदायै नमः
ॐ विन्ध्यावासिन्यै नमः
ॐ काल्यै नमः


ॐ कालरात्र्यै नमः
ॐ महाकाल्यै नमः
ॐ सीधुप्रियायै नमः
ॐ मांसप्रियायै नमः
ॐ पशुप्रियायै नमः
ॐ भूतानुसृतायै नमः


ॐ वरदायै नमः
ॐ कामचारिण्यै नमः
ॐ पापहरिण्यै नमः
ॐ कीर्त्यै नमः
ॐ श्रियै नमः
ॐ धृत्यै नमः
ॐ सिद्ध्यै नमः


ॐ ह्रियै नमः
ॐ विद्यायै नमः
ॐ सन्तत्यै नमः
ॐ मत्यै नमः
ॐ सन्ध्यायै नमः
ॐ रात्र्यै नमः
ॐ प्रभायै नमः


ॐ निद्रायै नमः
ॐ ज्योत्स्नायै नमः
ॐ कान्त्यै नमः
ॐ क्षमायै नमः


ॐ दयायै नमः
ॐ बन्धनाशिन्यै नमः
ॐ मोहनाशिन्यै नमः
ॐ पुत्रापमृत्युनाशिन्यै नमः
ॐ धनक्षयनाशिन्यै नमः
ॐ व्याधिनाशिन्यै नमः


ॐ मृत्युनाशिन्यै नमः
ॐ भयनाशिन्यै नमः
ॐ पद्मपत्राक्ष्यै नमः
ॐ दुर्गायै नमः
ॐ शरण्यायै नमः
ॐ भक्तवत्सलायै नमः
ॐ सौख्यदायै नमः
ॐ आरोग्यदायै नमः


ॐ राज्यदायै नमः
ॐ आयुर्दायै नमः
ॐ वपुर्दायै नमः
ॐ सुतदायै नमः
ॐ प्रवासरक्षिकायै नमः
ॐ नगररक्षिकायै नमः


ॐ संग्रामरक्षिकायै नमः
ॐ श्त्रुसंकटरक्षिकायै नमः
ॐ अटवीदुर्गकान्ताररक्षिकायै नमः
ॐ सागररक्षिकायै नमः
ॐ गिरिरक्षिकायै नमः
ॐ सर्वकार्यसिद्धिप्रदायिकायै नमः

Friday, February 12, 2021

देवी रक्षा कवच


विनियोग :
ॐ अस्य श्रीदेव्या: कवचस्य ब्रह्मा ऋषि:,
अनुष्टुप् छन्द:, ख्फ्रें चामुण्डाख्या महा-लक्ष्मी:
देवता, ह्रीं ह्रसौं ह्स्क्लीं ह्रीं ह्रसौं अंग-न्यस्ता देव्य: शक्तय:, ऐं ह्स्रीं ह्रक्लीं श्रीं ह्वर्युं क्ष्म्रौं स्फ्रें बीजानि,
श्रीमहालक्ष्मी-प्रीतये सर्व रक्षार्थे च पाठे विनियोग:।


ऋष्यादि-न्यास


ब्रह्मर्षये नम: शिरसि,


अनुष्टुप् छन्दसे नम: मुखे,


ख्फ्रें चामुण्डाख्या महा-लक्ष्मी: देवतायै नम: हृदि,


ह्रीं ह्रसौं ह्स्क्लीं ह्रीं ह्रसौं अंग-न्यस्ता देव्य: शक्तिभ्यो नम: नाभौ,


ऐं ह्स्रीं ह्रक्लीं श्रीं ह्वर्युं क्ष्म्रौं स्फ्रें बीजेभ्यो नम: लिंगे,


श्रीमहालक्ष्मी-प्रीतये सर्व रक्षार्थे च पाठे विनियोगाय नम: सर्वांगे।


ध्यान


ॐ रक्ताम्बरा रक्तवर्णा, रक्त-सर्वांग-भूषणा ।


रक्तायुधा रक्त-नेत्रा, रक्त-केशाऽति-भीषणा ॥1॥




रक्त-तीक्ष्ण-नखा रक्त-रसना रक्त-दन्तिका ।


पतिं नारीवानुरक्ता, देवी भक्तं भजेज्जनम् ॥2॥




वसुधेव विशाला सा, सुमेरू-युगल-स्तनी ।


दीर्घौ लम्बावति-स्थूलौ, तावतीव मनोहरौ ॥3॥




कर्कशावति-कान्तौ तौ, सर्वानन्द-पयोनिधी ।


भक्तान् सम्पाययेद् देवी, सर्वकामदुघौ स्तनौ ॥4॥




खड्गं पात्रं च मुसलं, लांगलं च बिभर्ति सा ।


आख्याता रक्त-चामुण्डा, देवी योगेश्वरीति च ॥5॥




अनया व्याप्तमखिलं, जगत् स्थावर-जंगमम् ।


इमां य: पूजयेद् भक्तो, स व्याप्नोति चराचरम् ॥6॥




मार्कण्डेय उवाच


ॐ यद् गुह्यं परमं लोके, सर्व-रक्षा-करं नृणाम् ।


यन्न कस्यचिदाख्यातं, तन्मे ब्रूहि पितामह ॥1॥


ब्रह्मोवाच


ॐ अस्ति गुह्य-तमं विप्र सर्व-भूतोपकारकम् ।


देव्यास्तु कवचं पुण्यं, तच्छृणुष्व महामुने ॥2॥




प्रथमं शैल-पुत्रीति, द्वितीयं ब्रह्म-चारिणी ।


तृतीयं चण्ड-घण्टेति, कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥3॥




पंचमं स्कन्द-मातेति, षष्ठं कात्यायनी तथा ।


सप्तमं काल-रात्रीति, महागौरीति चाष्टमम् ॥4॥




नवमं सिद्धि-दात्रीति, नवदुर्गा: प्रकीर्त्तिता: ।


उक्तान्येतानि नामानि, ब्रह्मणैव महात्मना ॥5॥




अग्निना दह्य-मानास्तु, शत्रु-मध्य-गता रणे ।


विषमे दुर्गमे वाऽपि, भयार्ता: शरणं गता ॥6॥




न तेषां जायते किंचिदशुभं रण-संकटे ।


आपदं न च पश्यन्ति, शोक-दु:ख-भयं नहि ॥7॥



यैस्तु भक्त्या स्मृता नित्यं, तेषां वृद्धि: प्रजायते ।


प्रेत संस्था तु चामुण्डा, वाराही महिषासना ॥8॥




ऐन्द्री गज-समारूढ़ा, वैष्णवी गरूड़ासना ।


नारसिंही महा-वीर्या, शिव-दूती महाबला ॥9॥




माहेश्वरी वृषारूढ़ा, कौमारी शिखि-वाहना ।


ब्राह्मी हंस-समारूढ़ा, सर्वाभरण-भूषिता ॥10॥




लक्ष्मी: पद्मासना देवी, पद्म-हस्ता हरिप्रिया ।


श्वेत-रूप-धरा देवी, ईश्वरी वृष वाहना ॥11॥




इत्येता मातर: सर्वा:, सर्व-योग-समन्विता ।


नानाभरण-षोभाढया, नाना-रत्नोप-शोभिता: ॥12॥




श्रेष्ठैष्च मौक्तिकै: सर्वा, दिव्य-हार-प्रलम्बिभि: ।


इन्द्र-नीलैर्महा-नीलै, पद्म-रागै: सुशोभने: ॥13॥




दृष्यन्ते रथमारूढा, देव्य: क्रोध-समाकुला: ।


शंखं चक्रं गदां शक्तिं, हलं च मूषलायुधम् ॥14॥




खेटकं तोमरं चैव, परशुं पाशमेव च ।


कुन्तायुधं च खड्गं च, शार्गांयुधमनुत्तमम् ॥15॥




दैत्यानां देह नाशाय, भक्तानामभयाय च ।


धारयन्त्यायुधानीत्थं, देवानां च हिताय वै ॥16॥




नमस्तेऽस्तु महारौद्रे ! महाघोर पराक्रमे !


महाबले ! महोत्साहे ! महाभय विनाशिनि ॥17॥




त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये ! शत्रूणां भयविर्द्धनि !


प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री, आग्नेय्यामग्नि देवता ॥18॥




दक्षिणे चैव वाराही, नैऋत्यां खड्गधारिणी ।


प्रतीच्यां वारूणी रक्षेद्, वायव्यां वायुदेवता ॥19॥




उदीच्यां दिशि कौबेरी, ऐशान्यां शूल-धारिणी ।


ऊर्ध्वं ब्राह्मी च मां रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा ॥20॥




एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शव-वाहना ।


जया मामग्रत: पातु, विजया पातु पृष्ठत: ॥21॥




अजिता वाम पार्श्वे तु, दक्षिणे चापराजिता ।


शिखां मे द्योतिनी रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता ॥22॥




मालाधरी ललाटे च, भ्रुवोर्मध्ये यशस्विनी ।


नेत्रायोश्चित्र-नेत्रा च, यमघण्टा तु पार्श्वके ॥23॥




शंखिनी चक्षुषोर्मध्ये, श्रोत्रयोर्द्वार-वासिनी ।


कपोलौ कालिका रक्षेत्, कर्ण-मूले च शंकरी ॥24॥




नासिकायां सुगन्धा च, उत्तरौष्ठे च चर्चिका ।


अधरे चामृत-कला, जिह्वायां च सरस्वती ॥25॥




दन्तान् रक्षतु कौमारी, कण्ठ-मध्ये तु चण्डिका ।


घण्टिकां चित्र-घण्टा च, महामाया च तालुके ॥26॥




कामाख्यां चिबुकं रक्षेद्, वाचं मे सर्व-मंगला ।


ग्रीवायां भद्रकाली च, पृष्ठ-वंशे धनुर्द्धरी ॥27॥




नील-ग्रीवा बहि:-कण्ठे, नलिकां नल-कूबरी ।


स्कन्धयो: खडि्गनी रक्षेद्, बाहू मे वज्र-धारिणी ॥28॥




हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदिम्बका चांगुलीषु च ।


नखान् सुरेश्वरी रक्षेत्, कुक्षौ रक्षेन्नरेश्वरी ॥29॥




स्तनौ रक्षेन्महादेवी, मन:-शोक-विनाशिनी ।


हृदये ललिता देवी, उदरे शूल-धारिणी ॥30॥




नाभौ च कामिनी रक्षेद्, गुह्यं गुह्येश्वरी तथा ।


मेढ्रं रक्षतु दुर्गन्धा, पायुं मे गुह्य-वासिनी ॥31॥




कट्यां भगवती रक्षेदूरू मे घन-वासिनी ।


जंगे महाबला रक्षेज्जानू माधव नायिका ॥32॥




गुल्फयोर्नारसिंही च, पाद-पृष्ठे च कौशिकी ।


पादांगुली: श्रीधरी च, तलं पाताल-वासिनी ॥33॥




नखान् दंष्ट्रा कराली च, केशांश्वोर्ध्व-केशिनी ।


रोम-कूपानि कौमारी, त्वचं योगेश्वरी तथा ॥34॥




रक्तं मांसं वसां मज्जामस्थि मेदश्च पार्वती ।


अन्त्राणि काल-रात्रि च, पितं च मुकुटेश्वरी ॥35॥




पद्मावती पद्म-कोषे, कक्षे चूडा-मणिस्तथा ।


ज्वाला-मुखी नख-ज्वालामभेद्या सर्व-सन्धिषु ॥36॥




शुक्रं ब्रह्माणी मे रक्षेच्छायां छत्रेश्वरी तथा ।


अहंकारं मनो बुद्धिं, रक्षेन्मे धर्म-धारिणी ॥37॥




प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम् ।


वज्र-हस्ता तु मे रक्षेत्, प्राणान् कल्याण-शोभना ॥38॥




रसे रूपे च गन्धे च, शब्दे स्पर्शे च योगिनी ।


सत्वं रजस्तमश्चैव, रक्षेन्नारायणी सदा ॥39॥




आयू रक्षतु वाराही, धर्मं रक्षन्तु मातर: ।


यश: कीर्तिं च लक्ष्मीं च, सदा रक्षतु वैष्णवी ॥40॥




गोत्रमिन्द्राणी मे रक्षेत्, पशून् रक्षेच्च चण्डिका ।


पुत्रान् रक्षेन्महा-लक्ष्मीर्भार्यां रक्षतु भैरवी ॥41॥




धनं धनेश्वरी रक्षेत्, कौमारी कन्यकां तथा ।


पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमंकरी तथा ॥42॥




राजद्वारे महा-लक्ष्मी, विजया सर्वत: स्थिता ।


रक्षेन्मे सर्व-गात्राणि, दुर्गा दुर्गाप-हारिणी ॥43॥




रक्षा-हीनं तु यत् स्थानं, वर्जितं कवचेन च ।


सर्वं रक्षतु मे देवी, जयन्ती पाप-नाशिनी ॥44॥




फल-श्रुति


सर्वरक्षाकरं पुण्यं, कवचं सर्वदा जपेत् ।


इदं रहस्यं विप्रर्षे ! भक्त्या तव मयोदितम् ॥45॥




देव्यास्तु कवचेनैवमरक्षित-तनु: सुधी: ।


पदमेकं न गच्छेत् तु, यदीच्छेच्छुभमात्मन: ॥46॥




कवचेनावृतो नित्यं, यत्र यत्रैव गच्छति ।


तत्र तत्रार्थ-लाभ: स्याद्, विजय: सार्व-कालिक: ॥47॥




यं यं चिन्तयते कामं, तं तं प्राप्नोति निश्चितम् ।


परमैश्वर्यमतुलं प्राप्नोत्यविकल: पुमान् ॥48॥




निर्भयो जायते मर्त्य:, संग्रामेष्वपराजित: ।


त्रैलोक्ये च भवेत् पूज्य:, कवचेनावृत: पुमान् ॥49॥




इदं तु देव्या: कवचं, देवानामपि दुर्लभम् ।


य: पठेत् प्रयतो नित्यं, त्रि-सन्ध्यं श्रद्धयान्वित: ॥50॥




देवी वश्या भवेत् तस्य, त्रैलोक्ये चापराजित: ।


जीवेद् वर्ष-शतं साग्रमप-मृत्यु-विवर्जित: ॥51॥




नश्यन्ति व्याधय: सर्वे, लूता-विस्फोटकादय: ।


स्थावरं जंगमं वापि, कृत्रिमं वापि यद् विषम् ॥52॥




अभिचाराणि सर्वाणि, मन्त्र-यन्त्राणि भू-तले ।


भूचरा: खेचराश्चैव, कुलजाश्चोपदेशजा: ॥53॥




सहजा: कुलिका नागा, डाकिनी शाकिनी तथा ।


अन्तरीक्ष-चरा घोरा, डाकिन्यश्च महा-रवा: ॥54॥




ग्रह-भूत-पिशाचाश्च, यक्ष-गन्धर्व-राक्षसा: ।


ब्रह्म-राक्षस-वेताला:, कूष्माण्डा भैरवादय: ॥55॥




नष्यन्ति दर्शनात् तस्य, कवचेनावृता हि य: ।


मानोन्नतिर्भवेद् राज्ञस्तेजो-वृद्धि: परा भवेत् ॥56॥




यशो-वृद्धिर्भवेद् पुंसां, कीर्ति-वृद्धिश्च जायते ।


तस्माज्जपेत् सदा भक्तया, कवचं कामदं मुने ॥57॥




जपेत् सप्तशतीं चण्डीं, कृत्वा तु कवचं पुर: ।


निर्विघ्नेन भवेत् सिद्धिश्चण्डी-जप-समुद्भवा ॥58॥




यावद् भू-मण्डलं धत्ते ! स-शैल-वन-काननम् ।


तावत् तिष्ठति मेदिन्यां, जप-कर्तुर्हि सन्तति: ॥59॥




देहान्ते परमं स्थानं, यत् सुरैरपि दुर्लभम् ।


सम्प्राप्नोति मनुष्योऽसौ, महा-माया-प्रसादत: ॥60॥




तत्र गच्छति भक्तोऽसौ, पुनरागमनं न हि ।


लभते परमं स्थानं, शिवेन सह मोदते ॐॐॐ ॥61॥

श्री दुर्गा कवचम्


ईश्वर उवाच


शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कवचं सर्वसिद्धिदम् ।


पठित्वा पाठयित्वा च नरो मुच्येत सङ्कटात् ॥ १ ॥




उमा देवी शिरः पातु ललाटं शूलधारिणी ।


चक्षुषी खेचरी पातु वदनं सर्वधारिणी ॥ २ ॥




जिह्वां च चण्डिका देवी ग्रीवां सौभद्रिका तथा ।


अशोकवासिनी चेतो द्वौ बाहू वज्रधारिणी ॥ ३ ॥




हृदयं ललिता देवी उदरं सिंहवाहिनी ।


कटिं भगवती देवी द्वावूरू विन्ध्यवासिनी ॥ ४ ॥




महाबाला च जङ्घे द्वे पादौ भूतलवासिनी


एवं स्थिताऽसि देवि त्वं त्रैलोक्यरक्षणात्मिके ।


रक्ष मां सर्वगात्रेषु दुर्गे दॆवि नमोऽस्तु ते ॥ ५ ॥