Thursday, May 13, 2021

माँ अम्बे की आरती 

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
मैया जय मगंल करनी मैया जय आनन्द करनी।

तुमको निशदिन ध्यावत, मैया जी को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमदको
मैया टीको मृगमदको ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे मैया रक्ताम्बर राजै ।
रक्त-पुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी मैया खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
मैया नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, कोटिक चद्रं दिवाकर सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती मैया महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे
मैया शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी.....

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी
मैया तुम कमलारानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी...

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू मैया नृत्य करत भैंरू ।
बाजत ताल मृदंगा, अौर बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता
मैया तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पति
करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी.....

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी
मैया वरमुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी.....

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती मैया अगर कपूर बाती ।
श्री मालकेतु में राजत, श्री मालकेतु कोटि रतन ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी....

श्री अंबेजी की आरती, मैया जी की आरती जो कोइ नित गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, कहत हरिहर स्वामी मनवांछित फल' पावे

ॐ जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी
मैया जय मगंल करनी
मैया जय आनन्द करनी।

तुम को निशदिन ध्यावत हरी ब्रह्मा शिवरी ||
Shri Ganapati aarti


सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची ।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची ॥

सर्वांगी सुंदर उटि शेंदुराची ।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची ॥१॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥ध्रु०॥

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा ।
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा ॥

हिरेजडीत मुकुुट शोभतो बरा ।
रुणझुणती नूपरें चरणीं घागरिया ॥ जय० ॥२॥

माथा मुकुट मणी कानी कुंडले ।
सोंड दोंदावरी शेंदुर चर्चिले ।।

नागबंद सोंड-दोंद मिराविले ।
विश्वरूप तया मोरयाचे देखिले ॥ जय० ॥३॥

चतुर्भुज गणराज बाही बाहुटे ।
खाजयाचे लाडू करुनी गोमटे ।।

सुवर्णाचे ताटी शर्करा घृत ।
अर्पी तो गणराज विघ्ने वारीतो ॥ जय० ॥४॥

छत्रे चामरे तुजला मिरविती ।
उंदीराचे वाहन तुजला गणपती ।।

ऐसा तु कलीयुगी सकळीक पाहसी ।
आनंदे भक्तासी प्रसन्न होसी ॥ जय० ॥५॥

ता ता धि मि किट धि मि किट नाचे गणपती ।
ईश्वर पार्वती कौतुक पाहती ।।

ताल मृदंग वीणा घोर उमटती ।
त्यांचे छंदे करुनी नाचे गणपती ॥ जय० ॥६॥

लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना ।
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना ॥

दास रामाचा वाट पाहे सदना ।
संकटीं पावावें निर्वाणीं रक्षावें सुरवर वंदना

॥ जय ० ॥ ७ ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती

 कामधेनु गौ माता आरती 


ॐ जय कामधेनु गौ माता, मैया जय जय गौ माता ।

तुमको हरदिन सेवत, हर देव गण त्राता ।। ॐ जय कामधेनु गौ माता.


नन्दा - सुभद्रा - सुरभि, सुशीला - बहुला जगमाता ।

सूर्य - चन्द्रमा - ध्यावत, सर्व देव गाता।। ॐ जय


कामधेनु गौ माता....

विश्व रूप तुम हो, सुख सम्पति दाता ।

जो कोइ तुमको पूजत, दुख दरिद्र नही आता ।। ॐ जय कामधेनु गौ माता....

तीनों लोक निवासिनी, अभय दान दाता ।

सर्व धर्म की मैया, पाप - ताप - हरता ।। ॐ जय कामधेनु गौ माता....

तुम जिस घर रहती हो, अन्न-धन्न आता ।

सब के आदर पाकर, गो भक्त बन जाता ।। ॐ जय कामधेनु गौ माता....

तुम बिन यज्ञ न होते, दविष्य न हो पाता ।

दूध दही गौलोवन, सब तुम से आता ।। ॐ जय कामधेनु गौ माता....

कामधेनु - तुम ही कहलाती, जग में ज्योत जलाती ।

खान - पान का वैभव, सब तुमसे आता ।। ॐ जय कामधेनु गौ माता....

गौ माता जी की आरती, जो कोर्इ नर गाता ।

उल्लास भरे ह्रदय से, सुख - आनंद पाता ।। ॐ जय कामधेनु गौ माता....

ॐ जय कामधेनु गौ माता ।।

 

 माँ वैष्णो आरती


तुमरे भवन पर ज्योत जागे ज्योत जागे रे मेरे पाप भागे

आनंद मंगल हो रही मेरी अम्बा..

ब्रह्मा जी वैद पड़ें तेरे द्वारे शंकर ध्यान लगाये मैया के द्वार्वे

शंकर ध्यान लगाये मेरी अम्बा..

नारद नृत्य करे तेरे द्वारे काहना बीन बजाये मेरी मैया के द्वार्वे ,

काहना बीन बजाये मेरी अम्बा..

पंच-रंग सुआ चोला अंग बीराजे लाल किनारी लगाये मेरी मैया के चोला,

लाल किनारी लगाये मेरी अम्बा

गल फूलों के हार बीराजे केसर तिलक लगाये मेरी मैया के माथे ,

केसर तिलक लगाये मेरी अम्बा

सर सोने दा छत्र बीराजे हीरे रतन जडये मेरी मेरी मैया के छत्र ,

हीरे रतन जडये मेरी अम्बा..

बावन वीर चोंसंठ संग योजन भेरों चवर झुलाये मेरी मैया के द्वारे,

भेरों चवर झुलाये मेरी अम्बा

लोंक्ड-वीर भवन के आगे गोरख नाद बजाये मेरी मैया के द्वारे,

गोरख नाद बजाये मेरी अम्बा..

सिमर-चरण तेरा ध्यानु यश गाये बानेकाज निभाए मेरी मैया के बाने,

बानेकाज निभाए मेरीअम्बा

आनंद मंगल हो रही मेरी अम्बा,आनंद मंगल हो रही मेरी अम्बा,

आनंद मंगल हो रही मेरी अम्बा !!


 

 ॥ आरती श्री नरसिंह भगवान की ॥

ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।

स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे॥ १ ॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥

तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी।
अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी॥ २ ॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥

सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी।
दास जान अपनायो, दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी॥ ३ ॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥

ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे।
शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे॥ ४ ॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥ 

॥ इति आरती श्री नरसिंह भगवान सम्पूर्णम ॥
 श्री भैरव जी की आरती

जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा ।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा ॥ जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा॥

तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक ।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥ जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा॥

वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी ।
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ॥ जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा॥

तुम बिन सेवा देवा सफल नहीं होवे ।
चौमुख दीपक दर्शन सबका दुःख खोवे ॥ जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा॥

तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी ।
कृपा करिये भैरव करिये नहीं देरी ॥ जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा॥

पाव घूंघरु बाजत अरु डमरु डमकावत ।
बटुकनाथ बन बालकजन मन हरषावत ॥ जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा॥

बटुकनाथ की आरती जो कोई नर गावे ।
कहे धरणीधर नर मनवांछित फल पावे ॥ जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा॥ 

॥ इति भैरव आरती सम्पूर्णम ॥
 श्री हनुमान साठिका

॥दोहा॥
बीर बखानौं पवनसुत,जनत सकल जहान ।
धन्य-धन्य अंजनि-तनय , संकर, हर, हनुमान्॥


।।चौपाइयां।।
जय-जय-जय हनुमान अडंगी | महावीर विक्रम बजरंगी ||
जय कपिश जय पवन कुमारा | जय जग बंदन सील अगारा ||
जय आदित्य अमर अबिकारी | अरि मरदन जय-जय गिरिधारी ||
अंजनी उदर जन्म तुम लीन्हा | जय जयकार देवतन कीन्हा ||
बाजे दुन्दुभि गगन गंभीरा | सुर मन हर्ष असुर मं पीरा ||
कपि के डर गढ़ लंक सकानी | छूटे बंध देवतन जानी ||
ऋषि समूह निकट चलि आये | पवन-तनय के पद सिर नाये ||
बार-बार स्तुति करी नाना | निर्मल नाम धरा हनुमाना ||
सकल ऋषिन मिली अस मत ठाना | दीन्ह बताय लाल फल खाना ||
सुनत वचन कपि मन हर्षाना | रवि रथ उदय लाल फल जाना ||
रथ समेत कपि कीन्ह आहारा | सूर्य बिना भये अति अंधियारा ||
विनय तुम्हार करै अकुलाना | तब कपिस की अस्तुति ठाना ||
सकल लोक वृतांत सुनावा | चतुरानन तब रवि उगिलावा ||
कहा बहोरी सुनहु बलसीला | रामचंद्र करिहैं बहु लीला ||
तब तुम उनकर करेहू सहाई | अबहीं बसहु कानन में जाई ||
अस कही विधि निज लोक सिधारा | मिले सखा संग पवन कुमारा ||
खेलै खेल महा तरु तोरें | ढेर करें बहु पर्वत फोरें ||
जेहि गिरि चरण देहि कपि धाई | गिरि समेत पातालहि जाई ||
कपि सुग्रीव बालि की त्रासा | निरखति रहे राम मागु आसा ||
मिले राम तहं पवन कुमारा | अति आनंद सप्रेम दुलारा ||
मनि मुंदरी रघुपति सों पाई | सीता खोज चले सिरु नाई ||
सतयोजन जलनिधि विस्तारा | अगम-अपार देवतन हारा ||
जिमि सर गोखुर सरिस कपीसा | लांघि गये कपि कही जगदीशा ||
सीता-चरण सीस तिन्ह नाये | अजर-अमर के आसिस पाये ||
रहे दनुज उपवन रखवारी | एक से एक महाभट भारी ||
तिन्हैं मारि पुनि कहेउ कपीसा | दहेउ लंक कोप्यो भुज बीसा ||
सिया बोध दै पुनि फिर आये | रामचंद्र के पद सिर नाये ||
मेरु उपारि आप छीन माहीं | बाँधे सेतु निमिष इक मांहीं ||
लक्ष्मण-शक्ति लागी उर जबहीं | राम बुलाय कहा पुनि तबहीं ||
भवन समेत सुषेन लै आये | तुरत सजीवन को पुनि धाय ||
मग महं कालनेमि कहं मारा | अमित सुभट निसि-चर संहारा ||
आनि संजीवन गिरि समेता | धरि दिन्हौ जहं कृपा निकेता ||
फन पति केर सोक हरि लीन्हा | वर्षि सुमन सुर जय जय कीन्हा ||
अहिरावन हरि अनुज समेता | लै गयो तहां पाताल निकेता ||
जहाँ रहे देवि अस्थाना | दीन चहै बलि कढी कृपाना ||
पवन तनय प्रभु किन गुहारी | कटक समेत निसाचर मारी ||
रीछ किसपति सबै बहोरी | राम-लखन किने यक ठोरी ||
सब देवतन की बन्दी छुडाये | सो किरति मुनि नारद गाये ||
अछय कुमार दनुज बलवाना | काल केतु कहं सब जग जाना ||
कुम्भकरण रावण का भाई | ताहि निपात कीन्ह कपिराई ||
मेघनाद पर शक्ति मारा | पवन तनय तब सो बरियारा ||
रहा तनय नारान्तक जाना | पल में हते ताहि हनुमाना ||
जहं लगि भान दनुज कर पावा | पवन-तनय सब मारि नसावा ||
जय मारुतसुत जय अनुकूला | नाम कृसानु सोक तुला ||
जहं जीवन के संकट होई | रवि तम सम सो संकट खोई ||
बंदी परै सुमिरै हनुमाना | संकट कटे घरै जो ध्याना ||
जाको बंध बामपद दीन्हा | मारुतसुत व्याकुल बहु कीन्हा ||
सो भुजबल का कीन कृपाला | अच्छत तुम्हे मोर यह हाला ||
आरत हरन नाम हनुमाना | सादर सुरपति कीन बखाना ||
संकट रहै न एक रति को | ध्यान धरै हनुमान जती को ||
धावहु देखि दीनता मोरी | कहौं पवनसुत जगकर जोरी ||
कपिपति बेगि अनुग्रह करहु | आतुर आई दुसै दुःख हरहु ||
राम सपथ मै तुमहि सुनाया | जवन गुहार लाग सिय जाया ||
यश तुम्हार सकल जग जाना | भव बंधन भंजन हनुमाना ||
यह बंधन कर केतिक वाता || नाम तुम्हार जगत सुखदाता ||
करौ कृपा जय-जय जग स्वामी | बार अनेक नमामि-नमामी ||
भौमवार कर होम विधना | धुप दीप नैवेद्द सूजाना ||
मंगल दायक को लौ लावे | सुन नर मुनि वांछित फल पावें ||
जयति-2 जय-जय जग स्वामी | समरथ पुरुष सुअंतरआमी ||
अंजनि तनय नाम हनुमाना | सो तुलसी के प्राण समाना ||


।।दोहा।।
जय कपीस सुग्रीव तुम, जय अंगद हनुमान।।
राम लषन सीता सहित, सदा करो कल्याण।
।बन्दौं हनुमत नाम यह, भौमवार परमान।।
ध्यान धरै नर निश्चय, पावै पद कल्याण।।
जो नित पढ़ै यह साठिका, तुलसी कहैं बिचारि।
रहै न संकट ताहि को, साक्षी हैं त्रिपुरारि।।


।।सवैया।।
आरत बन पुकारत हौं कपिनाथ सुनो विनती मम भारी।अंगद औ नल-नील महाबलि देव सदा बल की बलिहारी ।।
जाम्बवन्त् सुग्रीव पवन-सुत दिबिद मयंद महा भटभारी । दुःख दोष हरो तुलसी जन-को श्री द्वादश बीरन की बलिहारी ।।

Friday, May 7, 2021

 श्री कुंजिका स्तोत्रम


।।शिव उवाच।।
श्रृणु देवि ! प्रवक्ष्यामि, कुंजिका स्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्र प्रभावेण, चण्डी जापः शुभो भवेत।।
न कवचं नार्गला-स्तोत्रं, कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च, न न्यासो न च वार्चनम्।।
कुंजिका पाठ मात्रेण, दुर्गा पाठ फलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि ! देवानामपि दुलर्भम्।।
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठ मात्रेण संसिद्धयेत् कुंजिका स्तोत्रमुत्तमम्।।

मन्त्र -
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।।
नमस्ते रूद्र रुपिण्यै , नमस्ते मधु-मर्दिनि।
नमः कैटभ हारिण्यै, नमस्ते महिषार्दिनि।।
नमस्ते शुम्भ हन्त्र्यै च, निशुम्भासुर घातिनि।
जाग्रतं हि महादेवि जप ! सिद्धिं कुरूष्व मे।।
ऐं-कारी सृष्टि-रूपायै, ह्रींकारी प्रतिपालिका।
क्लींकारी काल-रूपिण्यै, बीजरूपे नमोऽस्तु ते।।
चामुण्डा चण्डघाती च, यैकारी वरदायिनी।
विच्चे चा ऽभयदा नित्यं, नमस्ते मन्त्ररूपिणि।।
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नीः, वां वीं वागधीश्वरी तथा।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु ।।
हुं हु हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः।।
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा॥
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्र सिद्धिं कुरुष्व मे॥

।।फल श्रुति।।
इदं तु कुंजिका स्तोत्रं मन्त्र-जागर्ति हेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं, गोपितं रक्ष पार्वति।।
यस्तु कुंजिकया देवि ! हीनां सप्तशती पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा।।
। इति श्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती संवादे कुंजिका स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ।

 अथ “श्री दुर्गा बत्तीस नामवली” स्त्रोत :-


दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी।

दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी

दुर्गम ज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला

दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी

दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता

दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी

दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी

दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी

दुर्गमाङ्गी दुर्गमाता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी

दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्लभा दुर्गधारिणी

नामावली ममायास्तु दुर्गया मम मानसः

पठेत् सर्व भयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः।।

 1. Lakshmi Beej Mantra
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥
Om Hreem Shreem Lakshmibhayo Namah॥

2. Mahalakshmi Mantra
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseed Praseed
Om Shreem Hreem Shreem Mahalakshmaye Namah॥

3. Lakshmi Gayatri Mantra
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि,
तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
Om Shree Mahalakshmyai Cha Vidmahe Vishnu Patnyai Cha Dheemahi,
Tanno Lakshmi Prachodayat Om॥
श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्

आदिलक्ष्मी
सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये 
मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायनि, मञ्जुल भाषिणि वेदनुते । 
पङ्कजवासिनि देव सुपूजित, सद्गुण वर्षिणि शान्तियुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, आदिलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ 1 ॥

धान्यलक्ष्मी
अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि, वैदिक रूपिणि वेदमये 
क्षीर समुद्भव मङ्गल रूपिणि, मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ।
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धान्यलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ 2 ॥


धैर्यलक्ष्मी
जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गवि, मन्त्र स्वरूपिणि मन्त्रमये 
सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद, ज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते । 
भवभयहारिणि पापविमोचनि, साधु जनाश्रित पादयुते 
जय जयहे मधु सूधन कामिनि, धैर्यलक्ष्मी परिपालय माम् ॥ 3 ॥

गजलक्ष्मी
जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि, सर्वफलप्रद शास्त्रमये 
रधगज तुरगपदाति समावृत, परिजन मण्डित लोकनुते । 
हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित, ताप निवारिणि पादयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, गजलक्ष्मी रूपेण पालय माम् ॥ 4 ॥

सन्तानलक्ष्मी
अयिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि, रागविवर्धिनि ज्ञानमये 
गुणगणवारधि लोकहितैषिणि, सप्तस्वर भूषित गाननुते ।
सकल सुरासुर देव मुनीश्वर, मानव वन्दित पादयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, सन्तानलक्ष्मी परिपालय माम् ॥ 5 ॥

विजयलक्ष्मी
जय कमलासिनि सद्गति दायिनि, ज्ञानविकासिनि गानमये 
अनुदिन मर्चित कुङ्कुम धूसर, भूषित वासित वाद्यनुते । 
कनकधरास्तुति वैभव वन्दित, शङ्करदेशिक मान्यपदे 
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विजयलक्ष्मी परिपालय माम् ॥ 6 ॥

विद्यालक्ष्मी
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि, शोकविनाशिनि रत्नमये 
मणिमय भूषित कर्णविभूषण, शान्ति समावृत हास्यमुखे ।
नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि, कामित फलप्रद हस्तयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विद्यालक्ष्मी सदा पालय माम् ॥ 7 ॥

धनलक्ष्मी
धिमिधिमि धिन्धिमि धिन्धिमि-दिन्धिमि, दुन्धुभि नाद सुपूर्णमये 
घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम, शङ्ख निनाद सुवाद्यनुते ।
वेद पूराणेतिहास सुपूजित, वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धनलक्ष्मि रूपेणा पालय माम् ॥ 8 ॥

फलशृति
श्लो॥ अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि । 
विष्णुवक्षः स्थला रूढे भक्त मोक्ष प्रदायिनि ॥
श्लो॥ शङ्ख चक्रगदाहस्ते विश्वरूपिणिते जयः ।
जगन्मात्रे च मोहिन्यै मङ्गलं शुभ मङ्गलम् ॥
Sri Ashtalakshmi

Lakshmi Devi has 8 primary forms. These 8 forms are personified as Ashta Lakshmi (Ashtalakshmi). These eight forms are as follows:


(1) Adilakshmi: Mother Lakshmi resides with Lord Narayana in Vaikuntha, the abode of Lord Narayana. She is known as Rama, which means "bringing happiness to the mankind". She is also known as Indira (who holds lotus or purity). In this form, Lakshmi is normally seen serving Sri Narayana. Adi Lakshmi or Rama Lakshmi serving Sri Narayana is symbolic of her serving the whole creation. Adi Lakshmi and Narayana are not two different entities but one only. Lakshmi is Shakti. Lakshmi is the Power of Narayana.


(2) Dhanyalakshmi: Dhanya means grains. Lakshmi is the Goddess of the Harvest and the Devi who blesses with abundance and success in harvest.


(3) Dhairyalakshmi: This form of mother Lakshmi grants the boon of infinite courage and strength. Those, who are in tune with infinite inner power, are always bound to have victory. Those who worship mother Dhairya Lakshmi lead a life with tremendous patience and inner stability.


(4) Gajalakshmi: In the holy book of Srimad Bhagavata the story of the churning of the ocean by Gods and demons is explained in detail. Sage Vyasa writes that Lakshmi came out of the ocean during the churning of the ocean (Samudra Manthan). So she is known as a daughter of the ocean. She came out of the ocean sitting on a full-bloomed lotus and also having lotus flowers in both hands with two elephants by her sides holding beautiful vessels.


(5)Santanlakshmi: In the family life, the children are the greatest treasure. Those who worship this particular form of Sri Lakshmi, known as a Santan Lakshmi, are bestowed with the grace of mother Lakshmi and have wealth in the form of desirable children with good health and a long life.


(6) Vijaylakshmi: Vijay is victory. Vijay is to get success in all undertakings and all different facets of life. Vijay is to conquer the lower nature. Hence those, with grace of mother Vijay Lakshmi, have victory everywhere, at all time, in all conditions.


(7) Dhanalakshmi: Dhana is wealth. Wealth comes in many forms: Nature, Love, Peace, Health, Prosperity, Luck, Virtues, Family, Food, Land, Water, Will Power, Intellect, Character, etc. With the grace of mother Dhana Lakshmi we will get all these in abundance.


(8) Vidyalakshmi: Vidya is education. Serenity, Regularity, Absence of Vanity, Sincerity, Simplicity, Veracity, Equanimity, Fixity, Non-irritability, Adaptability Humility, Tenacity, Integrity, Nobility, Magnanimity, Charity, Generosity and Purity are the eighteen qualities imbibed through proper education that only can give immortality.


The person who worships the goddess with Ashtalakshmi stotram is blessed with immense happiness, prosperity and wealth in life.

 ॥ श्री महालक्ष्म्यष्टकम् ॥


श्री गणेशाय नमः
नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते ।
शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ १ ॥
नमस्ते गरूडारूढे कोलासूर भयंकरी ।
सर्व पाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ २ ॥
सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्ट भयंकरी ।
सर्व दुःख हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥३ ॥
सिद्धीबुद्धूीप्रदे देवी भुक्तिमुक्ति प्रदायिनी ।
मंत्रमूर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ४ ॥
आद्यंतरहिते देवी आद्यशक्ती महेश्वरी ।
योगजे योगसंभूते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ५ ॥
स्थूल सूक्ष्म महारौद्रे महाशक्ती महोदरे ।
महापाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ६ ॥
पद्मासनस्थिते देवी परब्रम्हस्वरूपिणी ।
परमेशि जगन्मातर्र महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ७ ॥
श्वेतांबरधरे देवी नानालंकार भूषिते ।
जगत्स्थिते जगन्मार्त महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ८ ॥
महालक्ष्म्यष्टकस्तोत्रं यः पठेत् भक्तिमान्नरः ।
सर्वसिद्धीमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥ ९ ॥
एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनं ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्य समन्वितः ॥१०॥
त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रूविनाशनं ।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥११॥
॥इतिंद्रकृत श्रीमहालक्ष्म्यष्टकस्तवः संपूर्णः ॥
 ॥अथ श्री कनकधारा स्तोत्रम्॥श्री महालक्ष्मी


अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्।
अङ्गीकृताऽखिल-विभूतिरपाङ्गलीला माङ्गल्यदाऽस्तु मम मङ्गळदेवतायाः ॥१॥


मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः प्रेमत्रपा-प्रणहितानि गताऽऽगतानि।
मालादृशोर्मधुकरीव महोत्पले या सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवायाः ॥२॥


विश्वामरेन्द्रपद-वीभ्रमदानदक्ष आनन्द-हेतुरधिकं मुरविद्विषोऽपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणर्द्ध मिन्दीवरोदर-सहोदरमिन्दिरायाः ॥३॥


आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्द आनन्दकन्दमनिमेषमनङ्गतन्त्रम्।
आकेकरस्थित-कनीनिकपक्ष्मनेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजङ्गशयाङ्गनायाः ॥४॥


बाह्वन्तरे मधुजितः श्रित कौस्तुभे या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतोऽपि कटाक्षमाला, कल्याणमावहतु मे कमलालयायाः ॥५॥


कालाम्बुदाळि-ललितोरसि कैटभारे-धाराधरे स्फुरति या तडिदङ्गनेव।
मातुः समस्तजगतां महनीयमूर्ति-भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनायाः ॥६॥


प्राप्तं पदं प्रथमतः किल यत् प्रभावान् माङ्गल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन।
मय्यापतेत्तदिह मन्थर-मीक्षणार्धं मन्दाऽलसञ्च मकरालय-कन्यकायाः ॥७॥


दद्याद् दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारा मस्मिन्नकिञ्चन विहङ्गशिशौ विषण्णे।
दुष्कर्म-घर्ममपनीय चिराय दूरं नारायण-प्रणयिनी नयनाम्बुवाहः ॥८॥


इष्टाविशिष्टमतयोऽपि यया दयार्द्र दृष्ट्या त्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते।
दृष्टिः प्रहृष्ट-कमलोदर-दीप्तिरिष्टां पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्करविष्टरायाः ॥९॥


गीर्देवतेति गरुडध्वजभामिनीति शाकम्भरीति शशिशेखर-वल्लभेति।
सृष्टि-स्थिति-प्रलय-केलिषु संस्थितायै तस्यै नमस्त्रिभुवनैकगुरोस्तरुण्यै ॥१०॥


श्रुत्यै नमोऽस्तु नमस्त्रिभुवनैक-फलप्रसूत्यै रत्यै नमोऽस्तु रमणीय गुणाश्रयायै।
शक्त्यै नमोऽस्तु शतपत्र निकेतनायै पुष्ट्यै नमोऽस्तु पुरुषोत्तम-वल्लभायै ॥११॥


नमोऽस्तु नालीक-निभाननायै नमोऽस्तु दुग्धोदधि-जन्मभूत्यै।
नमोऽस्तु सोमामृत-सोदरायै नमोऽस्तु नारायण-वल्लभायै ॥१२॥


नमोऽस्तु हेमाम्बुजपीठिकायै नमोऽस्तु भूमण्डलनायिकायै।
नमोऽस्तु देवादिदयापरायै नमोऽस्तु शार्ङ्गायुधवल्लभायै ॥१३॥


नमोऽस्तु देव्यै भृगुनन्दनायै नमोऽस्तु विष्णोरुरसि स्थितायै।
नमोऽस्तु लक्ष्म्यै कमलालयायै नमोऽस्तु दामोदरवल्लभायै ॥१४॥


नमोऽस्तु कान्त्यै कमलेक्षणायै नमोऽस्तु भूत्यै भुवनप्रसूत्यै।
नमोऽस्तु देवादिभिरर्चितायै नमोऽस्तु नन्दात्मजवल्लभायै ॥१५॥


सम्पत्कराणि सकलेन्द्रिय-नन्दनानि साम्राज्यदान विभवानि सरोरुहाक्षि।
त्वद्-वन्दनानि दुरिताहरणोद्यतानि मामेव मातरनिशं कलयन्तु नान्यत् ॥१६॥


यत्कटाक्ष-समुपासनाविधिः सेवकस्य सकलार्थसम्पदः।
सन्तनोति वचनाऽङ्गमानसैः स्त्वां मुरारि-हृदयेश्वरीं भजे ॥१७॥


सरसिज-निलये सरोजहस्ते धवळतरांशुक-गन्ध-माल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवन-भूतिकरि प्रसीद मह्यम् ॥१८॥


दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनीविमलचारु-जलप्लुताङ्गीम्।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिराजगृहिणीम मृताब्धिपुत्रीम् ॥१९॥


कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूर-तरङ्गितैरपाङ्गैः।
अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः ॥२०॥


स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुविबुधभाविताशयाः ॥२१॥


॥श्रीमदाध्यशङ्कराचार्यविरचितं श्री कनकधारा स्तोत्रम् समाप्तम्॥
 ॥ श्री लक्ष्मीनारायण कवचम् ॥


अधुना देवि वक्ष्यामि लक्ष्मीनारायणस्य ते ।
कवचं मन्त्रगर्भं च वज्रपञ्जरकाख्यया ॥ १॥
श्रीवज्रपञ्जरं नाम कवचं परमाद्भुतम् ।
रहस्यं सर्वदेवानां साधकानां विशेषतः ॥ २॥
यं धृत्वा भगवान् देवः प्रसीदति परः पुमान् ।
यस्य धारणमात्रेण ब्रह्मा लोकपितामहः ॥ ३
ईश्वरोऽहं शिवो भीमो वासवोऽपि दिवस्पतिः ।
सूर्यस्तेजोनिधिर्देवि चन्द्रर्मास्तारकेश्वरः ॥ ४॥
वायुश्च बलवांल्लोके वरुणो यादसाम्पतिः ।
कुबेरोऽपि धनाध्यक्षो धर्मराजो यमः स्मृतः ॥ ५॥
यं धृत्वा सहसा विष्णुः संहरिष्यति दानवान् ।
जघान रावणादींश्च किं वक्ष्येऽहमतः परम् ॥ ६॥
कवचस्यास्य सुभगे कथितोऽयं मुनिः शिवः ।
त्रिष्टुप् छन्दो देवता च लक्ष्मीनारायणो मतः ॥ ७॥
रमा बीजं परा शक्तिस्तारं कीलकमीश्वरि ।
भोगापवर्गसिद्ध्यर्थं विनियोग इति स्मृतः ॥ ८॥
ॐ अस्य श्रीलक्ष्मीनारायणकवचस्य शिवः ऋषिः ,
त्रिष्टुप् छन्दः , श्रीलक्ष्मीनारायण देवता ,
श्रीं बीजं , ह्रीं शक्तिः , ॐ कीलकं ,
भोगापवर्गसिद्ध्यर्थे पाठे विनियोगः ।
अथ ध्यानम् । पूर्णेन्दुवदनं पीतवसनं कमलासनम् ।
लक्ष्म्या श्रितं चतुर्बाहुं लक्ष्मीनारायणं भजे ॥ ९॥
अथ कवचम् । ॐ वासुदेवोऽवतु मे मस्तकं सशिरोरुहम् ।
ह्रीं ललाटं सदा पातु लक्ष्मीविष्णुः समन्ततः ॥ १०॥
ह्सौः नेत्रेऽवताल्लक्ष्मीगोविन्दो जगतां पतिः ।
ह्रीं नासां सर्वदा पातु लक्ष्मीदामोदरः प्रभुः ॥ ११॥
 श्रीसूक्तम् 



ॐ हिरण्यवर्णाम हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥१॥

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥२॥

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्।
श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मादेवी जुषताम्॥३॥

कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारां आद्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वयेश्रियम्॥४॥

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियंलोके देव जुष्टामुदाराम्।
तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥५॥

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तववृक्षोथ बिल्व:।
तस्य फलानि तपसानुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मी:॥६॥

उपैतु मां देवसख: कीर्तिश्चमणिना सह।
प्रादुर्भुतो सुराष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृध्दिं ददातु मे॥७॥

क्षुत्पपासामलां जेष्ठां अलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृध्दिं च सर्वानिर्णुद मे गृहात॥८॥

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरिं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥९॥

मनस: काममाकूतिं वाच: सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्री: श्रेयतां यश:॥१०॥

कर्दमेनप्रजाभूता मयिसंभवकर्दम।
श्रियं वासयमेकुले मातरं पद्ममालिनीम्॥११॥

आप स्रजन्तु सिग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥१२॥

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टि पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥१३॥

आर्द्रां य: करिणीं यष्टीं सुवर्णां हेममालिनीम्।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आवह॥१४॥

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योश्वान् विन्देयं पुरुषानहम्॥१५॥

य: शुचि: प्रयतोभूत्वा जुहुयाादाज्यमन्वहम्।
सूक्तं पञ्चदशर्च च श्रीकाम: सततं जपेत्॥१६॥

पद्मानने पद्मउरू पद्माक्षि पद्मसंभवे।
तन्मे भजसि पद्मक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्॥१७॥

अश्वदायै गोदायै धनदायै महाधने।
धनं मे लभतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे॥१८॥

पद्मानने पद्मविपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि।
विश्वप्रिये विष्णुमनोनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि संनिधस्त्वं॥१९॥

पुत्रपौत्रं धनंधान्यं हस्ताश्वादिगवेरथम्।
प्रजानां भवसि माता आयुष्मन्तं करोतु मे॥२०॥

धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्योधनं वसु।
धनमिन्द्रो बृहस्पतिर्वरूणं धनमस्तु मे॥२१॥

वैनतेय सोमं पिब सोमं पिबतु वृतहा।
सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिन:॥२२॥

न क्रोधो न च मात्सर्य न लोभो नाशुभामति:।
भवन्ति कृतपुण्यानां भक्तानां श्रीसूक्तं जपेत्॥२३॥

सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांसुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीदमह्यम्॥२४॥

विष्णुपत्नीं क्षमां देवी माधवी माधवप्रियाम्।
लक्ष्मीं प्रियसखीं देवीं नमाम्यच्युतवल्लभाम्॥२५॥

महालक्ष्मी च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात्॥२६॥

श्रीवर्चस्वमायुष्यमारोग्यमाविधाच्छोभमानं महीयते।
धान्यं धनं पशुं बहुपुत्रलाभं शतसंवत्सरं दीर्घमायु:॥२७॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
॥इति श्रीसूक्तं समाप्तम॥

Wednesday, April 28, 2021

श्री दुर्गा देवी अष्टोत्तर



 ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ दारिद्र्यशमन्यै नमः ।
ॐ दुरितघ्न्यै नमः ।
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ लज्जायै नमः ।
ॐ महाविद्यायै नमः ।
ॐ श्रद्धायै नमः ।
ॐ पुष्ट्यै नमः ।
ॐ स्वधायै नमः ।
ॐ ध्रुवायै नमः । 
ॐ महारात्र्यै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ मात्रे नमः ।
ॐ सरस्वत्यै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ शशिधरायै नमः ।
ॐ शान्तायै नमः ।
ॐ शाम्भव्यै नमः ।
ॐ भूतिदायिन्यै नमः । 
ॐ तामस्यै नमः ।
ॐ नियतायै नमः ।
ॐ नार्यै नमः ।
ॐ काल्यै नमः ।
ॐ नारायण्यै नमः ।
ॐ कलायै नमः ।

ॐ ब्राह्म्यै नमः ।
ॐ वीणाधरायै नमः ।
ॐ वाण्यै नमः ।
ॐ शारदायै नमः । 
ॐ हंसवाहिन्यै नमः ।
ॐ त्रिशूलिन्यै नमः ।
ॐ त्रिनेत्रायै नमः ।
ॐ ईशानायै नमः ।
ॐ त्रय्यै नमः ।
ॐ त्रयतमायै नमः ।
ॐ शुभायै नमः ।
ॐ शङ्खिन्यै नमः ।
ॐ चक्रिण्यै नमः ।
ॐ घोरायै नमः । 
ॐ कराल्यै नमः ।
ॐ मालिन्यै नमः ।
ॐ मत्यै नमः ।
ॐ माहेश्वर्यै नमः ।
ॐ महेष्वासायै नमः ।
ॐ महिषघ्न्यै नमः ।
ॐ मधुव्रतायै नमः ।
ॐ मयूरवाहिन्यै नमः ।
ॐ नीलायै नमः ।
ॐ भारत्यै नमः । 
ॐ भास्वराम्बरायै नमः ।
ॐ पीताम्बरधरायै नमः ।
ॐ पीतायै नमः ।
ॐ कौमार्यै नमः ।
ॐ पीवरस्तन्यै नमः ।
ॐ रजन्यै नमः ।
ॐ राधिन्यै नमः ।
ॐ रक्तायै नमः ।
ॐ गदिन्यै नमः ।
ॐ घण्टिन्यै नमः । 
ॐ प्रभायै नमः ।
ॐ शुम्भघ्न्यै नमः ।
ॐ सुभगायै नमः ।
ॐ सुभ्रुवे नमः ।
ॐ निशुम्भप्राणहारिण्यै नमः ।
ॐ कामाक्ष्यै नमः ।
ॐ कामुकायै नमः ।
ॐ कन्यायै नमः ।
ॐ रक्तबीजनिपातिन्यै नमः ।
ॐ सहस्रवदनायै नमः । 
ॐ सन्ध्यायै नमः ।
ॐ साक्षिण्यै नमः ।
ॐ शाङ्कर्यै नमः ।
ॐ द्युतये नमः ।
ॐ भार्गव्यै नमः ।
ॐ वारुण्यै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ धरायै नमः ।
ॐ धरासुरार्चितायै नमः ।
ॐ गायत्र्यै नमः । 
ॐ गायक्यै नमः ।
ॐ गङ्गायै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ गीतघनस्वनायै नमः ।
ॐ छन्दोमयायै नमः ।
ॐ मह्यै नमः ।
ॐ छायायै नमः ।
ॐ चार्वाङ्ग्यै नमः ।
ॐ चन्दनप्रियायै नमः ।
ॐ जनन्यै नमः । 
ॐ जाह्नव्यै नमः ।
ॐ जातायै नमः ।
ॐ शान्ङ्कर्यै नमः ।
ॐ हतराक्षस्यै नमः ।
ॐ वल्लर्यै नमः ।
ॐ वल्लभायै नमः ।
ॐ वल्ल्यै नमः ।
ॐ वल्ल्यलङ्कृतमध्यमायै नमः ।
ॐ हरीतक्यै नमः ।
ॐ हयारूढायै नमः । 
ॐ भूत्यै नमः ।
ॐ हरिहरप्रियायै नमः ।
ॐ वज्रहस्तायै नमः ।
ॐ वरारोहायै नमः ।
ॐ सर्वसिद्ध्यै नमः ।
ॐ वरप्रदायै नमः ।
ॐ सिन्दूरवर्णायै नमः ।
ॐ श्री दुर्गादेव्यै नमः । 
श्री हयग्रीव अष्टोत्तर


 ॐ हयग्रीवाय नमः ।
ॐ महाविष्णवे नमः ।
ॐ केशवाय नमः ।
ॐ मधुसूदनाय नमः ।
ॐ गोविन्दाय नमः ।
ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः ।
ॐ विष्णवे नमः ।
ॐ विश्वम्भराय नमः ।
ॐ हरये नमः ।
ॐ आदित्याय नमः ।
ॐ सर्ववागीशाय नमः ।
ॐ सर्वाधाराय नमः ।
ॐ सनातनाय नमः ।
ॐ निराधाराय नमः ।
ॐ निराकाराय नमः ।
ॐ निरीशाय नमः ।
ॐ निरुपद्रवाय नमः ।
ॐ निरञ्जनाय नमः ।
ॐ निष्कलङ्काय नमः ।
ॐ नित्यतृप्ताय नमः ॥ 
ॐ निरामयाय नमः ।
ॐ चिदानन्दमयाय नमः ।
ॐ साक्षिणे नमः ।
ॐ शरण्याय नमः ।
ॐ सर्वदायकाय नमः ।
ॐ श्रीमते नमः ।
ॐ लोकत्रयाधीशाय नमः ।
ॐ शिवाय नमः ।
ॐ सारस्वतप्रदाय नमः ।
ॐ वेदोद्धर्त्रे नमः ।
ॐ वेदनिधये नमः ।
ॐ वेदवेद्याय नमः ।
ॐ प्रबोधनाय नमः ।
ॐ पूर्णाय नमः ।
ॐ पूरयित्रे नमः ।
ॐ पुण्याय नमः ।
ॐ पुण्यकीर्तये नमः ।
ॐ परात्पराय नमः ।
ॐ परमात्मने नमः ।
ॐ परस्मै नमः ।
ॐ ज्योतिषे नमः ॥ 
ॐ परेशाय नमः ।
ॐ पारगाय नमः ।
ॐ पराय नमः ।
ॐ सर्ववेदात्मकाय नमः ।
ॐ विदुषे नमः ।
ॐ वेदवेदान्तपारगाय नमः ।
ॐ सकलोपनिषद्वेद्याय नमः ।
ॐ निष्कलाय नमः ।
ॐ सर्वशास्त्रकृते नमः ।
ॐ अक्षमालाज्ञानमुद्रायुक्तहस्ताय नमः ।
ॐ वरप्रदाय नमः ।
ॐ पुराणपुरुषाय नमः ।
ॐ श्रेष्ठाय नमः ।
ॐ शरण्याय नमः ।
ॐ परमेश्वराय नमः ।
ॐ शान्ताय नमः ।
ॐ दान्ताय नमः ।
ॐ जितक्रोधाय नमः ।
ॐ जितामित्राय नमः ।
ॐ जगन्मयाय नमः ॥ 
ॐ जन्ममृत्युहराय नमः ।
ॐ जीवाय नमः ।
ॐ जयदाय नमः ।
ॐ जाड्यनाशनाय नमः ।
ॐ जपप्रियाय नमः ।
ॐ जपस्तुत्याय नमः ।
ॐ जापकप्रियकृते नमः ।
ॐ प्रभवे नमः ।
ॐ विमलाय नमः ।
ॐ विश्वरूपाय नमः ।
ॐ विश्वगोप्त्रे नमः ।
ॐ विधिस्तुताय नमः ।
ॐ विधीन्द्रशिवसंस्तुत्याय नमः ।
ॐ शान्तिदाय नमः ।
ॐ क्षान्तिपारगाय नमः ।
ॐ श्रेयःप्रदाय नमः ।
ॐ श्रुतिमयाय नमः ।
ॐ श्रेयसां पतये नमः ।
ॐ ईश्वराय नमः ।
ॐ अच्युताय नमः ॥
ॐ अनन्तरूपाय नमः ।
ॐ प्राणदाय नमः ।
ॐ पृथिवीपतये नमः ।
ॐ अव्यक्ताय नमः ।
ॐ व्यक्तरूपाय नमः ।
ॐ सर्वसाक्षिणे नमः ।
ॐ तमोहराय नमः ।
ॐ अज्ञाननाशकाय नमः ।
ॐ ज्ञानिने नमः ।
ॐ पूर्णचन्द्रसमप्रभाय नमः ।
ॐ ज्ञानदाय नमः ।
ॐ वाक्पतये नमः ।
ॐ योगिने नमः ।
ॐ योगीशाय नमः ।
ॐ सर्वकामदाय नमः ।
ॐ महायोगिने नमः ।
ॐ महामौनिने नमः ।
ॐ मौनीशाय नमः ।
ॐ श्रेयसां निधये नमः ।
ॐ हंसाय नमः ॥ 
ॐ परमहंसाय नमः ।
ॐ विश्वगोप्त्रे नमः ।
ॐ विराजे नमः ।
ॐ स्वराजे नमः ।
ॐ शुद्धस्फटिकसङ्काशाय नमः ।
ॐ जटामण्डलसंयुताय नमः ।
ॐ आदिमध्यान्तरहिताय नमः ।
ॐ सर्ववागीश्वरेश्वराय नमः ॥
श्रीलक्ष्मीहयवदनपरब्रह्मणे नमः ।
श्री अन्नपूर्णा अष्टोत्तर

 ॐ अन्नपूर्णायै नमः
ॐ शिवायै नमः
ॐ देव्यै नमः
ॐ भीमायै नमः
ॐ पुष्ट्यै नमः
ॐ सरस्वत्यै नमः
ॐ सर्वज्ञायै नमः
ॐ पार्वत्यै नमः
ॐ दुर्गायै नमः
ॐ शर्वाण्यै नमः ॥ १०॥
ॐ शिववल्लभायै नमः
ॐ वेदवेद्यायै नमः
ॐ महाविद्यायै नमः
ॐ विद्यादात्रै नमः
ॐ विशारदायै नमः
ॐ कुमार्यै नमः
ॐ त्रिपुरायै नमः
ॐ बालायै नमः
ॐ लक्ष्म्यै नमः
ॐ श्रियै नमः ॥ २०॥
ॐ भयहारिणै नमः
ॐ भवान्यै नमः
ॐ विष्णुजनन्यै नमः
ॐ ब्रह्मादिजनन्यै नमः
ॐ गणेशजनन्यै नमः
ॐ शक्त्यै नमः
ॐ कुमारजनन्यै नमः
ॐ शुभायै नमः
ॐ भोगप्रदायै नमः
ॐ भगवत्यै नमः ॥ ३०॥
ॐ भक्ताभीष्टप्रदायिन्यै नमः
ॐ भवरोगहरायै नमः
ॐ भव्यायै नमः
ॐ शुभ्रायै नमः
ॐ परममङ्गलायै नमः
ॐ भवान्यै नमः
ॐ चञ्चलायै नमः
ॐ गौर्यै नमः
ॐ चारुचन्द्रकलाधरायै नमः
ॐ विशालाक्ष्यै नमः ॥ ४०॥
ॐ विश्वमात्रे नमः
ॐ विश्ववन्द्यायै नमः
ॐ विलासिन्यै नमः
ॐ आर्यायै नमः
ॐ कल्याणनिलायायै नमः
ॐ रुद्राण्यै नमः
ॐ कमलासनायै नमः
ॐ शुभप्रदायै नमः
ॐ शुभावर्तायै नमः
ॐ वृत्तपीनपयोधरायै नमः ॥ ५०॥
ॐ अम्बायै नमः
ॐ संहारमथन्यै नमः
ॐ मृडान्यै नमः
ॐ सर्वमङ्गलायै नमः
ॐ विष्णुसंसेवितायै नमः
ॐ सिद्धायै नमः
ॐ ब्रह्माण्यै नमः
ॐ सुरसेवितायै नमः
ॐ परमानन्ददायै नमः
ॐ शान्त्यै नमः ॥ ६०॥
ॐ परमानन्दरूपिण्यै नमः
ॐ परमानन्दजनन्यै नमः
ॐ परायै नमः
ॐ आनन्दप्रदायिन्यै नमः
ॐ परोपकारनिरतायै नमः
ॐ परमायै नमः
ॐ भक्तवत्सलायै नमः
ॐ पूर्णचन्द्राभवदनायै नमः
ॐ पूर्णचन्द्रनिभांशुकायै नमः
ॐ शुभलक्षणसम्पन्नायै नमः ॥ ७०॥
ॐ शुभानन्दगुणार्णवायै नमः
ॐ शुभसौभाग्यनिलयायै नमः
ॐ शुभदायै नमः
ॐ रतिप्रियायै नमः
ॐ चण्डिकायै नमः
ॐ चण्डमथन्यै नमः
ॐ चण्डदर्पनिवारिण्यै नमः
ॐ मार्ताण्डनयनायै नमः
ॐ साध्व्यै नमः
ॐ चन्द्राग्निनयनायै नमः ॥ ८०॥
ॐ सत्यै नमः
ॐ पुण्डरीकहरायै नमः
ॐ पूर्णायै नमः
ॐ पुण्यदायै नमः
ॐ पुण्यरूपिण्यै नमः
ॐ मायातीतायै नमः
ॐ श्रेष्ठमायायै नमः
ॐ श्रेष्ठधर्मायै नमः
ॐ आत्मवन्दितायै नमः
ॐ असृष्ट्यै नमः ॥ ९०॥
ॐ सङ्गरहितायै नमः
ॐ सृष्टिहेतवे नमः
ॐ कपर्दिन्यै नमः
ॐ वृषारूढायै नमः
ॐ शूलहस्तायै नमः
ॐ स्थितिसंहारकारिण्यै नमः
ॐ मन्दस्मितायै नमः
ॐ स्कन्दमात्रे नमः
ॐ शुद्धचित्तायै नमः
ॐ मुनिस्तुतायै नमः ॥ १००॥
ॐ महाभगवत्यै नमः
ॐ दक्षायै नमः
ॐ दक्षाध्वरविनाशिन्यै नमः
ॐ सर्वार्थदात्र्यै नमः
ॐ सावित्र्यै नमः
ॐ सदाशिवकुटुम्बिन्यै नमः
ॐ नित्यसुन्दरसर्वाङ्ग्यै नमः
ॐ सच्चिदानन्दलक्षणायै नमः
श्री सरस्वती अष्टोत्तर शतनामावली


 ॐ वाग्देव्यै नमः ।
ॐ शारदायै नमः ।
ॐ मायायै नमः ।
ॐ नादरूपिण्यै नमः ।
ॐ यशस्विन्यै नमः ।
ॐ स्वाधीनवल्लभायै नमः ।
ॐ हाहाहूहूमुखस्तुत्यायै नमः ।
ॐ सर्वविद्याप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ रञ्जिन्यै नमः ।
ॐ स्वस्तिकासनायै नमः । 
ॐ अज्ञानध्वान्तचन्द्रिकायै नमः ।
ॐ अधिविद्यादायिन्यै नमः ।
ॐ कम्बुकण्ठ्यै नमः ।
ॐ वीणागानप्रियायै नमः ।
ॐ शरणागतवत्सलायै नमः ।
ॐ श्रीसरस्वत्यै नमः ।
ॐ नीलकुन्दलायै नमः ।
ॐ वाण्यै नमः ।
ॐ सर्वपूज्यायै नमः ।
ॐ कृतकृत्यायै नमः । 
ॐ तत्त्वमय्यै नमः ।
ॐ नारदादिमुनिस्तुतायै नमः ।
ॐ राकेन्दुवदनायै नमः ।
ॐ यन्त्रात्मिकायै नमः ।
ॐ नलिनहस्तायै नमः ।
ॐ प्रियवादिन्यै नमः ।
ॐ जिह्वासिद्ध्यै नमः ।
ॐ हंसवाहिन्यै नमः ।
ॐ भक्तमनोहरायै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः । 
ॐ कल्याण्यै नमः ।
ॐ चतुर्मुखप्रियायै नमः ।
ॐ ब्राह्म्यै नमः ।
ॐ भारत्यै नमः ।
ॐ अक्षरात्मिकायै नमः ।
ॐ अज्ञानध्वान्तदीपिकायै नमः ।
ॐ बालारूपिण्यै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ लीलाशुकप्रियायै नमः ।
ॐ दुकूलवसनधारिण्यै नमः । 
ॐ क्षीराब्धितनयायै नमः ।
ॐ मत्तमातङ्गगामिन्यै नमः ।
ॐ वीणागानविलोलुपायै नमः ।
ॐ पद्महस्तायै नमः ।
ॐ रणत्किङ्किणिमेखलायै नमः ।
ॐ त्रिलोचनायै नमः ।
ॐ अङ्कुशाक्षसूत्रधारिण्यै नमः ।
ॐ मुक्ताहारविभूषितायै नमः ।
ॐ मुक्तामण्यङ्कितचारुनासायै नमः ।
ॐ रत्नवलयभूषितायै नमः । 
ॐ कोटिसूर्यप्रकाशिन्यै नमः ।
ॐ विधिमानसहंसिकायै नमः ।
ॐ साधुरूपिण्यै नमः ।
ॐ सर्वशास्त्रार्थवादिन्यै नमः ।
ॐ सहस्रदलमध्यस्थायै नमः ।
ॐ सर्वतोमुख्यै नमः ।
ॐ सर्वचैतन्यरूपिण्यै नमः ।
ॐ सत्यज्ञानप्रबोधिन्यै नमः ।
ॐ विप्रवाक्स्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ वासवार्चितायै नमः । 
ॐ शुभ्रवस्त्रोत्तरीयायै नमः ।
ॐ विरिञ्चिपत्न्यै नमः ।
ॐ तुषारकिरणाभायै नमः ।
ॐ भावाभावविवर्जितायै नमः ।
ॐ वदनाम्बुजैकनिलयायै नमः ।
ॐ मुक्तिरूपिण्यै नमः ।
ॐ गजारूढायै नमः ।
ॐ वेदनुताय नमः ।
ॐ सर्वलोकसुपूजितायै नमः ।
ॐ भाषारूपायै नमः । 
ॐ भक्तिदायिन्यै नमः ।
ॐ मीनलोचनायै नमः ।
ॐ सर्वशक्तिसमन्वितायै नमः ।
ॐ अतिमृदुलपदाम्बुजायै नमः ।
ॐ विद्याधर्यै नमः ।
ॐ जगन्मोहिन्यै नमः ।
ॐ रमायै नमः ।
ॐ हरिप्रियायै नमः ।
ॐ विमलायै नमः ।
ॐ पुस्तकभृते नमः । 
ॐ नारायण्यै नमः ।
ॐ मङ्गलप्रदायै नमः ।
ॐ अश्वलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ राजलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ गजलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ मोक्षलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ सन्तानलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ जयलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ खड्गलक्ष्म्यै नमः । 
ॐ कारुण्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ सौम्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ भद्रकाल्यै नमः ।
ॐ चण्डिकायै नमः ।
ॐ शाम्भव्यै नमः ।
ॐ सिंहवाहिन्यै नमः ।
ॐ सुभद्रायै नमः ।
ॐ महिषासुरमर्दिन्यै नमः ।
ॐ अष्टैश्वर्यप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ हिमवत्पुत्रिकायै नमः । 
ॐ महाराज्ञै नमः ।
ॐ त्रिपुरसुन्दर्यै नमः ।
ॐ पाशाङ्कुशधारिण्यै नमः ।
ॐ श्वेतपद्मासनायै नमः ।
ॐ चाम्पेयकुसुमप्रियायै नमः ।
ॐ वनदुर्गायै नमः ।
ॐ राजराजेश्वर्यै नमः ।
ॐ श्रीदुर्गालक्ष्मीसहित- महासरस्वत्यै नमः ।
श्री वेंकटेश अष्टोत्तर


 ॐ ओंकारपरमर्थाय नमः ।
ॐ नरनारायणात्मकाय नमः ।
ॐ मोक्षलक्ष्मीप्राणकान्ताय नमः ।
ॐ वेंकटाचलनायकाय नमः ।
ॐ करुणापूर्णहृदयाय नमः ।
ॐ टेङ्कारजपसुप्रीताय नमः ।
ॐ शास्त्रप्रमाणगम्याय नमः ।
ॐ यमाद्यष्टाङ्गगोचराय नमः ।
ॐ भक्तलोकैकवरदाय नमः ।
ॐ वरेण्याय नमः ॥ 
ॐ भयनाशनाय नमः ।
ॐ यजमानस्वरूपाय नमः ।
ॐ हस्तन्यस्तसुदर्शनाय नमः ।
ॐ रमावतारमंगेशाय नमः ।
ॐ णाकारजपसुप्रीताय नमः ।
ॐ यज्ञेशाय नमः ।
ॐ गतिदात्रे नमः ।
ॐ जगतीवल्लभाय नमः ।
ॐ वराय नमः ।
ॐ रक्षस्सन्दोहसंहर्त्रे नमः ॥ 
ॐ वर्चस्विने नमः ।
ॐ रघुपुङ्गवाय नमः ।
ॐ धानधर्मपराय नमः ।
ॐ याजिने नमः ।
ॐ घनश्यामलविग्रहाय नमः ।
ॐ हरादिसर्वदेवेड्याय नमः ।
ॐ रामाय नमः ।
ॐ यदुकुलाग्रणये नमः ।
ॐ श्रीनिवासाय नमः ।
ॐ महात्मने नमः ॥ 
ॐ तेजस्विने नमः ।
ॐ तत्त्वसन्निधये नमः ।
ॐ त्वमर्थलक्ष्यरूपाय नमः ।
ॐ रूपवते नमः ।
ॐ पावनाय नमः ।
ॐ यशसे नमः ।
ॐ सर्वेशाय नमः ।
ॐ कमलाकान्ताय नमः ।
ॐ लक्ष्मीसल्लापसंमुखाय नमः ।
ॐ चतुर्मुखप्रतिष्ठात्रे नमः ॥ 
ॐ राजराजवरप्रदाय नमः ।
ॐ चतुर्वेदशिरोरत्नाय नमः ।
ॐ रमणाय नमः ।
ॐ नित्यवैभवाय नमः ।
ॐ दासवर्गपरित्रात्रे नमः ।
ॐ नारदादिमुनिस्तुताय नमः ।
ॐ यादवाचलवासिने नमः ।
ॐ खिद्यद्भक्तार्तिभञ्जनाय नमः ।
ॐ लक्ष्मीप्रसादकाय नमः ।
ॐ विष्णवे नमः ॥ 
ॐ देवेशाय नमः ।
ॐ रम्यविग्रहाय नमः ।
ॐ माधवाय नमः ।
ॐ लोकनाथाय नमः ।
ॐ लालिताखिलसेवकाय नमः ।
ॐ यक्षगन्धर्ववरदाय नमः ।
ॐ कुमाराय नमः ।
ॐ मातृकार्चिताय नमः ।
ॐ रटद्बालकपोषिणे नमः ।
ॐ शेषशैलकृतस्थलाय नमः ॥ 
ॐ षाड्गुण्यपरिपूर्णाय नमः ।
ॐ द्वैतदोषनिवारणाय नमः ।
ॐ तिर्यग्जन्त्वर्चितांघ्र्ये नमः ।
ॐ नेत्रानन्दकरोत्सवाय नमः ।
ॐ द्वादशोत्तमलीलाय नमः ।
ॐ दरिद्रजनरक्षकाय नमः ।
ॐ शत्रुकृत्यादिभीतिघ्नाय नमः ।
ॐ भुजङ्गशयनप्रियाय नमः ।
ॐ जाग्रद्रहस्यावासाय नमः ।
ॐ शिष्टपरिपालकाय नमः ॥ 
ॐ वरेण्याय नमः ।
ॐ पूर्णबोधाय नमः ।
ॐ जन्मसंसारभेषजाय नमः ।
ॐ कार्तिकेयवपुर्धारिणे नमः ।
ॐ यतिशेखरभाविताय नमः ।
ॐ नरकादिभयध्वंसिने नमः ।
ॐ रथोत्सवकलाधराय नमः ।
ॐ लोकार्चामुख्यमूर्तये नमः ।
ॐ केशवाद्यवतारवते नमः ॥ 
ॐ शास्त्रश्रुतानन्तलीलाय नमः ।
ॐ यमशिक्षानिबर्हणाय नमः ।
ॐ मानसंरक्षणपराय नमः ।
ॐ इरिणांकुरधान्यदाय नमः ।
ॐ नेत्रहीनाक्षिदायिने नमः ।
ॐ मतिहीनमतिप्रदाय नमः ।
ॐ हिरण्यदानग्राहिणे नमः ।
ॐ मोहजालनिकृन्तनाय नमः ।
ॐ दधिलाजाक्षतार्च्याय नमः ।
ॐ यातुधानविनाशनाय नमः ॥ 
ॐ यजुर्वेदशिखागम्याय नमः ।
ॐ वेङ्कटाय नमः ।
ॐ दक्षिणास्थिताय नमः ।
ॐ सारपुष्करिणीतीरे रात्रौ देवगणार्चिताय नमः ।
ॐ यत्नवत्फलसन्धात्रे नमः ।
ॐ श्रीजापधनवृद्धिकृते नमः ।
ॐ क्लींकारजपकाम्यार्थ- प्रदानसदयान्तराय नमः ।
ॐ स्व सर्वसिद्धिसन्धात्रे नमः ।
ॐ नमस्कर्तुरभीष्टदाय नमः ।
ॐ मोहितखिललोकाय नमः ॥ 
ॐ नानारूपव्यवस्थिताय नमः ।
ॐ राजीवलोचनाय नमः ।
ॐ यज्ञवराहाय नमः ।
ॐ गणवेङ्कटाय नमः ।
ॐ तेजोराशीक्षणाय नमः ।
ॐ स्वामिने नमः ।
ॐ हार्दाविद्यानिवारणाय नमः ।
ॐ श्रीवेङ्कटेश्वराय नमः ॥ 
श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम


रामदूतो रामभृत्यो रामचित्तापहारकः ।
रामनामजपासक्तो रामकीर्तिप्रचारकः ॥ १॥

रामालिङ्गनसौख्यज्ञो रामविक्रमहर्षितः ।
रामबाणप्रभावज्ञो रामसेवाधुरन्धरः ॥ २॥

रामहृत्पद्ममार्तण्डो रामसङ्कल्पपूरकः ।
रामामोदितवाग्वृत्तिः रामसन्देशवाहकः ॥ ३॥

रामतारकगुह्यज्ञो रामाह्लादनपण्डितः ।
रामभूपालसचिवो रामधर्मप्रवर्तकः ॥ ४॥

रामानुजप्राणदाता रामभक्तिलतासुमम् ।
रामचन्द्रजयाशंसी रामधैर्यप्रवर्धकः ॥ ५॥

रामप्रभावतत्त्वज्ञो रामपूजनतत्परः ।
राममान्यो रामहृद्यो रामकृत्यपरायणः ॥ ६॥

रामसौलभ्यसंवेत्ता रामानुग्रहसाधकः ।
रामार्पितवचश्चित्तदेहवृत्तिप्रवर्त्तितः ॥ ७॥

रामसामुद्रिकाभिज्ञो रामपादाब्जषट्पदः ।
रामायणमहामालामध्याञ्चितमहामणिः ॥ ८॥

रामायणरसास्वादस्रवदश्रुपरिप्लुतः ।
रामकोदण्डटङ्कारसहकारिमहास्वनः ॥ ९॥

रामसायूज्यसाम्राज्यद्वारोद्घाटनकर्मकृत् ।
रामपादाब्जनिष्यन्दिमधुमाधुर्यलोलुपः ॥ १०॥

रामकैङ्कर्यमात्रैकपुरुषार्थकृतादरः ।
रामायणमहाम्भोधिमथनोत्थसुधाघटः ॥ ११॥

रामाख्यकामधुग्दोग्धा रामवक्त्रेन्दुसागरः ।
रामचन्द्रकरस्पर्शद्रवच्छीतकरोपलः ॥

रामायणमहाकाव्यशुक्तिनिक्षिप्तमौक्तिकः ।
रामायणमहारण्यविहाररतकेसरी ॥ १३॥

रामपत्न्येकपत्नीत्वसपत्नायितभक्तिमान् ।
रामेङ्गितरहस्यज्ञो राममन्त्रप्रयोगवित् ॥ १४॥

रामविक्रमवर्षर्तुपूर्वभूनीलनीरदः ।
रामकारुण्यमार्त्तण्डप्रागुद्यदरुणायितः ॥ १५॥

रामराज्याभिषेकाम्बुपवित्रीकृतमस्तकः ।
रामविश्लेषदावाग्निशमनोद्यतनीरदः ॥ १६॥

रामायणवियद्गङ्गाकल्लोलायितकीर्तिमान् ।
रामप्रपन्नवात्सल्यव्रततात्पर्यकोविदः ॥ १७॥

रामाख्यानसमाश्वस्तसीतामानससंशयः ।
रामसुग्रीवमैत्र्याख्यहव्यवाहेन्धनायितः ॥ १८॥

रामाङ्गुलीयमाहात्म्यसमेधितपराक्रमः ।
रामार्त्तिध्वंसनचणचूडामणिलसत्करः ॥ १९॥

रामनाममधुस्यन्दद्वदनाम्बुजशोभितः ।
रामनामप्रभावेण गोष्पदीकृतवारिधिः ॥ २०॥

रामौदार्यप्रदीपार्चिर्वर्धकस्नेहविग्रहः ।
रामश्रीमुखजीमूतवर्षणोन्मुखचातकः ॥ २१॥

रामभक्त्येकसुलभब्रह्मचर्यव्रते स्थितः ।
रामलक्ष्मणसंवाहकृतार्थीकृतदोर्युगः ॥ २२॥

रामलक्ष्मणसीताख्यत्रयीराजितहृद्गुहः ।
रामरावणसङ्ग्रामवीक्षणोत्फुल्लविग्रहः ॥ २३॥

रामानुजेन्द्रजिद्युद्धलब्धव्रणकिणाङ्कितः ।
रामब्रह्मानुसन्धानविधिदीक्षाप्रदायकः ॥ २४॥

रामरावणसङ्ग्राममहाध्वरविधानकृत् ।
रामनाममहारत्ननिक्षेपमणिपेटकः ॥ २५॥

रामताराधिपज्योत्स्नापानोन्मत्तचकोरकः ।
रामायणाख्यसौवर्णपञ्जरस्थितशारिकः ॥ २६॥

रामवृत्तान्तविध्वस्तसीताहृदयशल्यकः ।
रामसन्देशवर्षाम्बुवहन्नीलपयोधरः ॥ २७॥

रामराकाहिमकरज्योत्स्नाधवलविग्रहः ।
रामसेवामहायज्ञदीक्षितो रामजीवनः ॥ २८॥

रामप्राणो रामवित्तं रामायत्तकलेबरः ।
रामशोकाशोकवनभञ्जनोद्यत्प्रभञ्जनः ॥ २९॥

रामप्रीतिवसन्तर्तुसूचकायितकोकिलः ।
रामकार्यार्थोपरोधदूरोत्सारणलम्पटः ॥ ३०॥

रामायणसरोजस्थहंसो रामहिते रतः ।
रामानुजक्रोधवह्निदग्धसुग्रीवरक्षकः ॥ ३१॥

रामसौहार्दकल्पद्रुसुमोद्गमनदोहदः ।
रामेषुगतिसंवेत्ता रामजैत्ररथध्वजः ॥ ३२॥

रामब्रह्मनिदिध्यासनिरतो रामवल्लभः ।
रामसीताख्ययुगलयोजको राममानितः ॥ ३३॥

रामसेनाग्रणी रामकीर्तिघोषणडिण्डिमः ।
रामेतिद्व्यक्षराकारकवचावृतविग्रहः ॥

रामायणमहावृक्षफलासक्तकपीश्वरः ।
रामपादाश्रयान्वेषिविभीषणविचारवित् ॥ ३५॥

राममाहात्म्यसर्वस्वं रामसद्गुणगायकः ।
रामजायाविषादाग्निनिर्दग्धरिपुसैनिकः ॥ ३६॥

रामकल्पद्रुमूलस्थो रामजीमूतवैद्युतः ।
रामन्यस्तसमस्ताशो रामविश्वासभाजनम् ॥ ३७॥

रामप्रभावरचितशैत्यवालाग्निशोभितः ।
रामभद्राश्रयोपात्तधीरोदात्तगुणाकरः ॥ ३८॥

रामदक्षिणहस्ताब्जमुकुटोद्भासिमस्तकः ।
रामश्रीवदनोद्भासिस्मितोत्पुलकमूर्तिमान् ।
रामब्रह्मानुभूत्याप्तपूर्णानन्दनिमज्जितः ॥ ३९॥

इतीदं रामदूतस्य वायुसूनोर्महात्मनः ।
रामनामाङ्कितं नाममष्टोत्तरशतं शुभम् ॥ ४०॥

प्रसादादाञ्जनेयस्य देशिकानुग्रहेण च ।
रचितं स्वामिनाथेन कार्यकारेण भक्तितः ॥ ४१॥

भूयादभीष्टफलदं श्रद्धया पठतां नृणाम् ।
इहलोके परत्रापि रामसायूज्यदायकम् ॥ ४२॥
वरद गणेश अष्टोत्तर शतनामावली



 ॐ गणेशाय नम:
ॐ विघ्नराजाय नम:
ॐ विघ्नहन्त्रे नम:
ॐ गणाधिपाय नम:
ॐ लम्बोदराय नम:
ॐ वक्रतुण्डाय नम:
ॐ विकटाय नम:
ॐ गणनायकाय नम:
ॐ गजास्याय नम:
ॐ सिद्धिदात्रे नम:
ॐ खर्वाय नम:
ॐ मूषिकवाहनाय नम:
ॐ मूषका नम:
ॐ गणराजाय नम:
ॐ शैलजानन्ददायकाय नम:
ॐ गुहाग्रजाय नम:
ॐ महातेजसे नम:
ॐ कुब्जाय नम:
ॐ भक्तप्रियाय नम:
ॐ प्रभवे नम:
ॐ सिन्दूराभाय नम:
ॐ गणाध्यक्षाय नम:
ॐ त्रिनेत्राय नम:
ॐ धनदायकाय नम:
ॐ वामनाय नम:
ॐ शूर्पकर्णाय नम:
ॐ धूम्राय नम:
ॐ शंकरनन्दना नम:
ॐ सर्वार्तिनाशकाय नम:
ॐ विज्ञा नम:
ॐ कपिलाय नम:
ॐ मोदकप्रिया नम:
ॐ संकष्टनाशनाय नम:
ॐ देवाय नम:
ॐ सुरासुरनमस्कृताय नम:
ॐ उमासुताय नम:
ॐ कृपालव नम:
ॐ सर्वज्ञाय नम:
ॐ प्रियदर्शनाय नम:
ॐ हेरम्बाय नम:
ॐ रक्तनेत्राय नम:
ॐ स्थूलमूर्तये नम:
ॐ प्रतापवते नम:
ॐ सुखदाय नम:
ॐ कार्यकर्त्रे नम:
ॐ बुद्धिदाय नम:
ॐ व्याधिनाशकाय नम:
ॐ इक्षुदण्डप्रियाय नम:
ॐ शूराय नम:
ॐ क्षमायुक्ता नम:
ॐ अघनाशकाय नम:
ॐ एकदन्ताय नम:
ॐ महोदराय नम:
ॐ सर्वदाय नम:
ॐ गजकर्षकाय नम:
ॐ विनायकाय नम:
ॐ जगत्पूज्याय नम:
ॐ फलदाय नम:
ॐ भक्तवत्सलाय नम:
ॐ विद्याप्रदाय नम:
ॐ महोत्साहाय नम:
ॐ दुःखदौर्भाग्यनाशनाय नम:
ॐ मिष्टप्रियाय नम:
ॐ फालचन्द्राय नम:
ॐ नित्यसौभाग्यवर्धनाय नम:
ॐ दानपूरार्द्रगण्डाय नम:
ॐ अंशकाय नम:
ॐ विबुधप्रियाय नम:
ॐ रक्ताम्बरधराय नम:
ॐ श्रेष्ठाय नम:
ॐ सुभगाय नम:
ॐ नागभूषणाय नम:
ॐ शत्रुध्वंसिने नम:
ॐ चतुर्बाहवे नम:
ॐ सौम्याय नम:
ॐ दारिद्र्यनाशकाय नम:
ॐ आदिपूज्याय नम:
ॐ दयाशीला नम:
ॐ रक्तमुण्डाय नम:
ॐ महोदयाय नम:
ॐ सर्वगाय नम:
ॐ सौख्यकृत नम:
ॐ शुद्धाय नम:
ॐ कृत्यपूज्या नम:
ॐ बुधप्रियाय नम:
ॐ सर्वदेवमया नम:
ॐ शान्ताय नम:
ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदायकाय नम:
ॐ विद्यावते नम:
ॐ दानशीलाय नम:
ॐ वेदविदे नम:
ॐ मन्त्रविदे नम:
ॐ सुधिये नम:
ॐ अविज्ञातगतये नम:
ॐ ज्ञानिने नम:
ॐ ज्ञानिगम्याय नम:
ॐ मुनिस्तुताय नम:
ॐ योगज्ञाय नम:
ॐ योगपूज्याय नम:
ॐ फालनेत्राय नम:
ॐ शिवात्मजाय नम:
ॐ सर्वमन्त्रमयाय नम:
ॐ श्रीमते नम:
ॐ अवशाय नम:
ॐ वशकारकाय नम:
ॐ विघ्नध्वंसिने नम:
ॐ सदाहृष्टाय नम:
ॐ भक्तानां फलदायकाय नम:
श्री त्रिपुर भैरवी अष्टोत्तर

श्री भैरव्यै नमः ।
श्री भैरवाराध्यायै नमः ।
श्री भूतिदायै नमः ।
श्री भूतभावनायै नमः ।
श्री कार्यायै नमः ।
श्री ब्राह्म्यै नमः ।
श्री कामधेनवे नमः ।
श्री सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै नमः ।
श्री त्रैलोक्यवन्दितदेव्यै नमः ।
श्री महिषासुरमर्दिन्यै नमः । 
श्री मोहिन्यै नमः ।
श्री मालतीमालायै नमः ।
श्री महापातकनाशिन्यै नमः ।
श्री क्रोधिन्यै नमः ।
श्री क्रिधनिलयायै नमः ।
श्री क्रोधरक्तेक्षणायै नमः ।
श्री कुह्वे नमः ।
श्री त्रिपुरायै नमः ।
श्री त्रिपुराधारायै नमः ।
श्री त्रिनेत्रायै नमः । 
श्री भीमभैरव्यै नमः ।
श्री देवक्यै नमः ।
श्री देवमात्रे नमः ।
श्री देवदुष्टविनाशिन्यै नमः ।
श्री दामोदरप्रियायै नमः ।
श्री दीर्घायै नमः ।
श्री दुर्गायै नमः ।
श्री दुर्गतिनाशिन्यै नमः ।
श्री लम्बोदर्यै नमः ।
श्री लम्बकर्णायै नमः । 
श्री प्रलम्बितपयोधरायै नमः ।
श्री प्रत्यङ्गिरायै नमः ।
श्री प्रतिपदायै नमः ।
श्री प्रणतक्लेशनाशिन्यै नमः ।
श्री प्रभावत्यै नमः ।
श्री गुणवत्यै नमः ।
श्री गणमात्रे नमः ।
श्री गुह्येश्वर्यै नमः ।
श्री क्षीराब्धितनयायै नमः ।
श्री क्षेम्यायै नमः । 
श्री जगत्त्राणविधायिन्यै नमः ।
श्री महामार्यै नमः ।
श्री महामोहायै नमः ।
श्री महाक्रोधायै नमः ।
श्री महानद्यै नमः ।
श्री महापातकसंहर्त्र्यै नमः ।
श्री महामोहप्रदायिन्यै नमः ।
श्री विकरालायै नमः ।
श्री महाकालायै नमः ।
श्री कालरूपायै नमः । 
श्री कलावत्यै नमः ।
श्री कपालखट्वाङ्गधरायै नमः ।
श्री खड्गधारिण्यै नमः ।
श्री खर्परधारिण्यै नमः ।
श्री कुमार्यै नमः ।
श्री कुंकुमप्रीतायै नमः ।
श्री कुंकुमारुणरञ्जितायै नमः ।
श्री कौमोदक्यै नमः ।
श्री कुमुदिन्यै नमः ।
श्री कीर्त्यायै नमः ।
श्री कीर्तिप्रदायिन्यै नमः ।
श्री नवीनायै नमः ।
श्री नीरदायै नमः ।
श्री नित्यायै नमः ।
श्री नन्दिकेश्वरपालिन्यै नमः ।
श्री घर्घरायै नमः ।
श्री घर्घरारावायै नमः ।
श्री घोरायै नमः ।
श्री घोरस्वरूपिण्यै नमः ।
श्री कलिघ्न्यै नमः । 
श्री कलिधर्मघ्न्यै नमः ।
श्री कलिकौतुकनाशिन्यै नमः ।
श्री किशोर्यै नमः ।
श्री केशवप्रीतायै नमः ।
श्री क्लेशसङ्घनिवारिण्यै नमः ।
श्री महोत्तमायै नमः ।
श्री महामत्तायै नमः ।
श्री महाविद्यायै नमः ।
श्री महीमय्यै नमः ।
श्री महायज्ञायै नमः । 
श्री महावाण्यै नमः ।
श्री महामन्दरधारिण्यै नमः ।
श्री मोक्षदायै नमः ।
श्री मोहदायै नमः ।
श्री मोहायै नमः ।
श्री भुक्तिप्रदायिन्यै नमः ।
श्री मुक्तिप्रदायिन्यै नमः ।
श्री अट्टाट्टहासनिरतायै नमः ।
श्री क्वणन्नूपुरधारिण्यै नमः ।
श्री दीर्घदंष्ट्रायै नमः ।
श्री दीर्घमुख्यै नमः ।
श्री दीर्घघोणायै नमः ।
श्री दीर्घिकायै नमः ।
श्री दनुजान्तकर्यै नमः ।
श्री दुष्टायै नमः ।
श्री दुःखदारिद्रयभञ्जिन्यै नमः ।
श्री दुराचारायै नमः ।
श्री दोषघ्न्यै नमः ।
श्री दमपत्न्यै नमः ।
श्री दयापरायै नमः ।
श्री मनोभवायै नमः ।
श्री मनुमय्यै नमः ।
श्री मनुवंशप्रवर्द्धिन्यै नमः ।
श्री श्यामायै नमः ।
श्री श्यामतनवे नमः ।
श्री शोभायै नमः ।
श्री सौम्यायै नमः ।
श्री शम्भुविलासिन्यै नमः । 
श्री धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली



 श्रीधूमावत्यै नमः ।
श्रीधूम्रवर्णायै नमः ।
श्रीधूम्रपानपरायणायै नमः ।
श्रीधूम्राक्षमथिन्यै नमः ।
श्रीधन्यायै नमः ।
श्रीधन्यस्थाननिवासिन्यै नमः ।
श्रीअघोराचारसन्तुष्टायै नमः ।
श्रीअघोराचारमण्डितायै नमः ।
श्रीअघोरमन्त्रसम्प्रीतायै नमः ।
श्रीअघोरमन्त्रसम्पूजितायै नमः । १०
श्रीअट्टाट्टहासनिरतायै नमः ।
श्रीमलिनाम्बरधारिण्यै नमः ।
श्रीवृद्धायै नमः ।
श्रीविरूपायै नमः ।
श्रीविधवायै नमः ।
श्रीविद्यायै नमः ।
श्रीविरलाद्विजायै नमः ।
श्रीप्रवृद्धघोणायै नमः ।
श्रीकुमुख्यै नमः ।
श्रीकुटिलायै नमः । २०
श्रीकुटिलेक्षणायै नमः ।
श्रीकराल्यै नमः ।
श्रीकरालास्यायै नमः ।
श्रीकङ्काल्यै नमः ।
श्रीशूर्पधारिण्यै नमः ।
श्रीकाकध्वजरथारूढायै नमः ।
श्रीकेवलायै नमः ।
श्रीकठिनायै नमः ।
श्रीकुहवे नमः ।
श्रीक्षुत्पिपासार्द्दितायै नमः । 
श्रीनित्यायै नमः ।
श्रीललज्जिह्वायै नमः ।
श्रीदिगम्बरायै नमः ।
श्रीदीर्घोदर्यै नमः ।
श्रीदीर्घरवायै नमः ।
श्रीदीर्घाङ्ग्यै नमः ।
श्रीदीर्घमस्तकायै नमः ।
श्रीविमुक्तकुन्तलायै नमः ।
श्रीकीर्त्यायै नमः ।
श्रीकैलासस्थानवासिन्यै नमः । 
श्रीक्रूरायै नमः ।
श्रीकालस्वरूपायै नमः ।
श्रीकालचक्रप्रवर्तिन्यै नमः ।
श्रीविवर्णायै नमः ।
श्रीचञ्चलायै नमः ।
श्रीदुष्टायै नमः ।
श्रीदुष्टविध्वंसकारिण्यै नमः ।
श्रीचण्ड्यै नमः ।
श्रीचण्डस्वरूपायै नमः ।
श्रीचामुण्डायै नमः । 
श्रीचण्डनिःस्वनायै नमः ।
श्रीचण्डवेगायै नमः ।
श्रीचण्डगत्यै नमः ।
श्रीचण्डविनाशिन्यै नमः ।
श्रीमुण्डविनाशिन्यै नमः ।
श्रीचाण्डालिन्यै नमः ।
श्रीचित्ररेखायै नमः ।
श्रीचित्राङ्ग्यै नमः ।
श्रीचित्ररूपिण्यै नमः ।
श्रीकृष्णायै नमः । 
श्रीकपर्दिन्यै नमः ।
श्रीकुल्लायै नमः ।
श्रीकृष्णरूपायै नमः ।
श्रीक्रियावत्यै नमः ।
श्रीकुम्भस्तन्यै नमः ।
श्रीमहोन्मत्तायै नमः ।
श्रीमदिरापानविह्वलायै नमः ।
श्रीचतुर्भुजायै नमः ।
श्रीललज्जिह्वायै नमः ।
श्रीशत्रुसंहारकारिण्यै नमः । 
श्रीशवारूढायै नमः ।
श्रीशवगतायै नमः ।
श्रीश्मशानस्थानवासिन्यै नमः ।
श्रीदुराराध्यायै नमः ।
श्रीदुराचारायै नमः ।
श्रीदुर्जनप्रीतिदायिन्यै नमः ।
श्रीनिर्मांसायै नमः ।
श्रीनिराकारायै नमः ।
श्रीधूमहस्तायै नमः ।
श्रीवरान्वितायै नमः । 
श्रीकलहायै नमः ।
श्रीकलिप्रीतायै नमः ।
श्रीकलिकल्मषनाशिन्यै नमः ।
श्रीमहाकालस्वरूपायै नमः ।
श्रीमहाकालप्रपूजितायै नमः ।
श्रीमहादेवप्रियायै नमः ।
श्रीमेधायै नमः ।
श्रीमहासङ्कष्टनाशिन्यै नमः ।
श्रीभक्तप्रियायै नमः ।
श्रीभक्तगत्यै नमः । 
श्रीभक्तशत्रुविनाशिन्यै नमः ।
श्रीभैरव्यै नमः ।
श्रीभुवनायै नमः ।
श्रीभीमायै नमः ।
श्रीभारत्यै नमः ।
श्रीभुवनात्मिकायै नमः ।
श्रीभेरुण्डायै नमः ।
श्रीभीमनयनायै नमः ।
श्रीत्रिनेत्रायै नमः ।
श्रीबहुरूपिण्यै नमः । 
श्रीत्रिलोकेश्यै नमः ।
श्रीत्रिकालज्ञायै नमः ।
श्रीत्रिस्वरूपायै नमः ।
श्रीत्रयीतनवे नमः ।
श्रीत्रिमूर्त्यै नमः ।
श्रीतन्व्यै नमः ।
श्रीत्रिशक्तये नमः ।
श्रीत्रिशूलिन्यै नमः । 
श्री धन्वन्तरि अष्टोत्तर


 ॐ धन्वन्तरये नमः ।
ॐ सुधापूर्णकलशाढ्यकराय नम: ।
ॐ हरये नम: ।
ॐ जरामृतित्रस्तदेवप्रार्थनासाधकाय नम: ।
ॐ प्रभवे नम: ।
ॐ निर्विकल्पाय नम: ।
ॐ निस्समानाय नम: ।
ॐ मन्दस्मितमुखाम्बुजाय नम: ।
ॐ आञ्जनेयप्रापिताद्रये नम: ।
ॐ पार्श्वस्थविनतासुताय नम: ।
ॐ निमग्नमन्दरधराय नम: ।
ॐ कूर्मरूपिणे नम: ।
ॐ बृहत्तनवे नम: ।
ॐ नीलकुञ्चितकेशान्ताय नम: ।
ॐ परमाद्भुतरूपधृते नम: ।
ॐ कटाक्षवीक्षणाश्वस्तवासुकये नम: ।
ॐ सिंहविक्रमाय नम: ।
ॐ स्मर्तृहृद्रोगहरणाय नम: ।
ॐ महाविष्ण्वंशसम्भवाय नम: ।
ॐ प्रेक्षणीयोत्पलश्यामाय नमः नम: ।
ॐ आयुर्वेदाधिदैवताय नमः नम: ।
ॐ भेषजग्रहणानेहस्स्मरणीयपदाम्बुजाय नम: ।
ॐ नवयौवनसम्पन्नाय नम: ।
ॐ किरीटान्वितमस्तकाय नम: ।
ॐ नक्रकुण्डलसंशोभिश्रवणद्वयशष्कुलये नम: ।
ॐ दीर्घपीवरदोर्दण्डाय नम: ।
ॐ कम्बुग्रीवाय नम: ।
ॐ अम्बुजेक्षणाय नम: ।
ॐ चतुर्भुजाय नम: ।
ॐ शङ्खधराय नम: ।
ॐ चक्रहस्ताय नम: ।
ॐ वरप्रदाय नम: ।
ॐ सुधापात्रे परिलसदाम्रपत्रलसत्कराय नम: ।
ॐ शतपद्याढ्यहस्ताय नम: ।
ॐ कस्तूरीतिलकाञ्चिताय नम: ।
ॐ सुकपोलाय नम: ।
ॐ सुनासाय नम: ।
ॐ सुन्दरभ्रूलताञ्चिताय नम: ।
ॐ स्वङ्गुलीतलशोभाढ्याय नम: ।
ॐ गूढजत्रवे नमः नम: ।
ॐ महाहनवे नमः नम: ।
ॐ दिव्याङ्गदलसद्बाहवे नम: ।
ॐ केयूरपरिशोभिताय नम: ।
ॐ विचित्ररत्नखचितवलयद्वयशोभिताय नम: ।
ॐ समोल्लसत्सुजातांसाय नम: ।
ॐ अङ्गुलीयविभूषिताय नम: ।
ॐ सुधागन्धरसास्वादमिलद्भृङ्गमनोहराय नम: ।
ॐ लक्ष्मीसमर्पितोत्फुल्लकञ्जमालालसद्गलाय नम: ।
ॐ लक्ष्मीशोभितवक्षस्काय नम: ।
ॐ वनमालाविराजिताय नम: ।
ॐ नवरत्नमणीक्लृप्तहारशोभितकन्धराय नम: ।
ॐ हीरनक्षत्रमालादिशोभारञ्जितदिङ्मुखाय नम: ।
ॐ विरजोऽम्बरसंवीताय नम: ।
ॐ विशालोरसे नम: ।
ॐ पृथुश्रवसे नम: ।
ॐ निम्ननाभये नम: ।
ॐ सूक्ष्ममध्याय नम: ।
ॐ स्थूलजङ्घाय नम: ।
ॐ निरञ्जनाय नम: ।
ॐ सुलक्षणपदाङ्गुष्ठाय नमः नम: ।
ॐ सर्वसामुद्रिकान्विताय नमः नम: ।
ॐ अलक्तकारक्तपादाय नम: ।
ॐ मूर्तिमद्वार्धिपूजिताय नम: ।
ॐ सुधार्थान्योन्यसंयुध्यद्देवदैतेयसान्त्वनाय नम: ।
ॐ कोटिमन्मथसङ्काशाय नम: ।
ॐ सर्वावयवसुन्दराय नम: ।
ॐ अमृतास्वादनोद्युक्तदेवसङ्घापरिष्टुताय नम: ।
ॐ पुष्पवर्षणसंयुक्तगन्धर्वकुलसेविताय नम: ।
ॐ शङ्खतूर्यमृदङ्गादिसुवादित्राप्सरोवृताय नम: ।
ॐ विष्वक्सेनादियुक्पार्श्वाय नम: ।
ॐ सनकादिमुनिस्तुताय नम: ।
ॐ साश्चर्यसस्मितचतुर्मुखनेत्रसमीक्षिताय नम: ।
ॐ साशङ्कसम्भ्रमदितिदनुवंश्यसमीडिताय नम: ।
ॐ नमनोन्मुखदेवादिमौलिरत्नलसत्पदाय नम: ।
ॐ दिव्यतेजःपुञ्जरूपाय नम: ।
ॐ सर्वदेवहितोत्सुकाय नम: ।
ॐ स्वनिर्गमक्षुब्धदुग्धवाराशये नम: ।
ॐ दुन्दुभिस्वनाय नम: ।

ॐ गन्धर्वगीतापदानश्रवणोत्कमहामनसे नम: ।
ॐ निष्किञ्चनजनप्रीताय नमः नम: ।
ॐ भवसम्प्राप्तरोगहृते नमः नम: ।
ॐ अन्तर्हितसुधापात्राय नम: ।
ॐ महात्मने नम: ।
ॐ मायिकाग्रण्यै नम: ।
ॐ क्षणार्धमोहिनीरूपाय नम: ।
ॐ सर्वस्त्रीशुभलक्षणाय नम: ।
ॐ मदमत्तेभगमनाय नम: ।
ॐ सर्वलोकविमोहनाय नम: ।
ॐ स्रंसन्नीवीग्रन्थिबन्धासक्तदिव्यकराङ्गुलये नम: ।
ॐ रत्नदर्वीलसद्धस्ताय नम: ।
ॐ देवदैत्यविभागकृते नम: ।
ॐ सङ्ख्यातदेवतान्यासाय नम: ।
ॐ दैत्यदानववञ्चकाय नम: ।
ॐ देवामृतप्रदात्रे नम: ।
ॐ परिवेषणहृष्टधिये नम: ।
ॐ उन्मुखोन्मुखदैत्येन्द्रदन्तपङ्क्तिविभाजकाय नम: ।
ॐ पुष्पवत्सुविनिर्दिष्टराहुरक्षःशिरोहराय नम: ।
ॐ राहुकेतुग्रहस्थानपश्चाद्गतिविधायकाय नम: ।
ॐ अमृतालाभनिर्विण्णयुध्यद्देवारिसूदनाय नम: ।
ॐ गरुत्मद्वाहनारूढाय नमः नम: ।
ॐ सर्वेशस्तोत्रसंयुताय नमः नम: ।
ॐ स्वस्वाधिकारसन्तुष्टशक्रवह्न्यादिपूजिताय नम: ।
ॐ मोहिनीदर्शनायातस्थाणुचित्तविमोहकाय नम: ।
ॐ शचीस्वाहादिदिक्पालपत्नीमण्डलसन्नुताय नम: ।
ॐ वेदान्तवेद्यमहिम्ने नम: ।
ॐ सर्वलोकैकरक्षकाय नम: ।
ॐ राजराजप्रपूज्याङ्घ्रये नम: ।
ॐ चिन्तितार्थप्रदायकाय नम: ।
श्री शनैश्चर अष्टोत्तर


 ॐ शनैश्चराय नमः ॥
ॐ शान्ताय नमः ॥
ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः ॥
ॐ शरण्याय नमः ॥
ॐ वरेण्याय नमः ॥
ॐ सर्वेशाय नमः ॥
ॐ सौम्याय नमः ॥
ॐ सुरवन्द्याय नमः ॥
ॐ सुरलोकविहारिणे नमः ॥
ॐ सुखासनोपविष्टाय नमः ॥
ॐ सुन्दराय नमः ॥
ॐ घनाय नमः ॥
ॐ घनरूपाय नमः ॥
ॐ घनाभरणधारिणे नमः ॥
ॐ घनसारविलेपाय नमः ॥
ॐ खद्योताय नमः ॥
ॐ मन्दाय नमः ॥
ॐ मन्दचेष्टाय नमः ॥
ॐ महनीयगुणात्मने नमः ॥
ॐ मर्त्यपावनपदाय नमः ॥
ॐ महेशाय नमः ॥
ॐ छायापुत्राय नमः ॥
ॐ शर्वाय नमः ॥
ॐ शततूणीरधारिणे नमः ॥
ॐ चरस्थिरस्वभावाय नमः ॥
ॐ अचञ्चलाय नमः ॥
ॐ नीलवर्णाय नमः ॥
ॐ नित्याय नमः ॥
ॐ नीलाञ्जननिभाय नमः ॥
ॐ नीलाम्बरविभूशणाय नमः ॥
ॐ निश्चलाय नमः ॥
ॐ वेद्याय नमः ॥
ॐ विधिरूपाय नमः ॥
ॐ विरोधाधारभूमये नमः ॥
ॐ भेदास्पदस्वभावाय नमः ॥
ॐ वज्रदेहाय नमः ॥
ॐ वैराग्यदाय नमः ॥
ॐ वीराय नमः ॥
ॐ वीतरोगभयाय नमः ॥
ॐ विपत्परम्परेशाय नमः ॥
ॐ विश्ववन्द्याय नमः ॥
ॐ गृध्नवाहाय नमः ॥
ॐ गूढाय नमः ॥
ॐ कूर्माङ्गाय नमः ॥
ॐ कुरूपिणे नमः ॥
ॐ कुत्सिताय नमः ॥
ॐ गुणाढ्याय नमः ॥
ॐ गोचराय नमः ॥
ॐ अविद्यामूलनाशाय नमः ॥
ॐ विद्याविद्यास्वरूपिणे नमः ॥
ॐ आयुष्यकारणाय नमः ॥
ॐ आपदुद्धर्त्रे नमः ॥
ॐ विष्णुभक्ताय नमः ॥
ॐ वशिने नमः ॥
ॐ विविधागमवेदिने नमः ॥
ॐ विधिस्तुत्याय नमः ॥
ॐ वन्द्याय नमः ॥
ॐ विरूपाक्षाय नमः ॥
ॐ वरिष्ठाय नमः ॥
ॐ गरिष्ठाय नमः ॥
ॐ वज्राङ्कुशधराय नमः ॥
ॐ वरदाभयहस्ताय नमः ॥
ॐ वामनाय नमः ॥
ॐ ज्येष्ठापत्नीसमेताय नमः ॥
ॐ श्रेष्ठाय नमः ॥
ॐ मितभाषिणे नमः ॥
ॐ कष्टौघनाशकर्त्रे नमः ॥
ॐ पुष्टिदाय नमः ॥
ॐ स्तुत्याय नमः ॥
ॐ स्तोत्रगम्याय नमः ॥
ॐ भक्तिवश्याय नमः ॥
ॐ भानवे नमः ॥
ॐ भानुपुत्राय नमः ॥
ॐ भव्याय नमः ॥
ॐ पावनाय नमः ॥
ॐ धनुर्मण्डलसंस्थाय नमः ॥
ॐ धनदाय नमः ॥
ॐ धनुष्मते नमः ॥
ॐ तनुप्रकाशदेहाय नमः ॥
ॐ तामसाय नमः ॥
ॐ अशेषजनवन्द्याय नमः ॥
ॐ विशेशफलदायिने नमः ॥
ॐ वशीकृतजनेशाय नमः ॥
ॐ पशूनां पतये नमः ॥
ॐ खेचराय नमः ॥
ॐ खगेशाय नमः ॥
ॐ घननीलाम्बराय नमः ॥
ॐ काठिन्यमानसाय नमः ॥
ॐ आर्यगणस्तुत्याय नमः ॥
ॐ नीलच्छत्राय नमः ॥
ॐ नित्याय नमः ॥
ॐ निर्गुणाय नमः ॥
ॐ गुणात्मने नमः ॥
ॐ निरामयाय नमः ॥
ॐ निन्द्याय नमः ॥
ॐ वन्दनीयाय नमः ॥
ॐ धीराय नमः ॥
ॐ दिव्यदेहाय नमः ॥
ॐ दीनार्तिहरणाय नमः ॥
ॐ दैन्यनाशकराय नमः ॥
ॐ आर्यजनगण्याय नमः ॥
ॐ क्रूराय नमः ॥
ॐ क्रूरचेष्टाय नमः ॥
ॐ कामक्रोधकराय नमः ॥
ॐ कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमः ॥
ॐ परिपोषितभक्ताय नमः ॥
ॐ परभीतिहराय नमः ॥
ॐ भक्तसंघमनोऽभीष्टफलदाय नमः ॥
॥ इति शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णम् ॥
श्री छिन्नमस्ता अष्टोत्तर


 श्रीछिन्नमस्तायै नमः ।
श्रीमहाविद्यायै नमः ।
श्रीमहाभीमायै नमः ।
श्रीमहोदर्यै नमः ।
श्रीचण्डेश्वर्यै नमः ।
श्रीचण्डमात्रे नमः ।
श्रीचण्डमुण्डप्रभञ्जिन्यै नमः ।
श्रीमहाचण्डायै नमः ।
श्रीचण्डरूपायै नमः ।
श्रीचण्डिकायै नमः । 
श्रीचण्डखण्डिन्यै नमः ।
श्रीक्रोधिन्यै नमः ।
श्रीक्रोधजनन्यै नमः ।
श्रीक्रोधरूपायै नमः ।
श्रीकुहवे नमः ।
श्रीकलायै नमः ।
श्रीकोपातुरायै नमः ।
श्रीकोपयुतायै नमः ।
श्रीकोपसंहारकारिण्यै नमः ।
श्रीवज्रवैरोचन्यै नमः । 
श्रीवज्रायै नमः ।
श्रीवज्रकल्पायै नमः ।
श्रीडाकिन्यै नमः ।
श्रीडाकिनीकर्मनिरतायै नमः ।
श्रीडाकिनीकर्मपूजितायै नमः ।
श्रीडाकिनीसङ्गनिरतायै नमः ।
श्रीडाकिनीप्रेमपूरितायै नमः ।
श्रीखट्वाङ्गधारिण्यै नमः ।
श्रीखर्वायै नमः ।
श्रीखड्गधारिण्यै नमः । 
श्रीखप्परधारिण्यै नमः ।
श्रीप्रेतासनायै नमः ।
श्रीप्रेतयुतायै नमः ।
श्रीप्रेतसङ्गविहारिण्यै नमः ।
श्रीछिन्नमुण्डधरायै नमः ।
श्रीछिन्नचण्डविद्यायै नमः ।
श्रीचित्रिण्यै नमः ।
श्रीघोररूपायै नमः ।
श्रीघोरदृष्ट्यै नमः ।
श्रीघोररावायै नमः । 
श्रीघनोदर्यै नमः ।
श्रीयोगिन्यै नमः ।
श्रीयोगनिरतायै नमः ।
श्रीजपयज्ञपरायणायै नमः ।
श्रीयोनिचक्रमय्यै नमः ।
श्रीयोनये नमः ।
श्रीयोनिचक्रप्रवर्तिन्यै नमः ।
श्रीयोनिमुद्रायै नमः ।
श्रीयोनिगम्यायै नमः ।
श्रीयोनियन्त्रनिवासिन्यै नमः । 
श्रीयन्त्ररूपायै नमः ।
श्रीयन्त्रमय्यै नमः ।
श्रीयन्त्रेश्यै नमः ।
श्रीयन्त्रपूजितायै नमः ।
श्रीकीर्त्यायै नमः ।
श्रीकपर्दिन्यै नमः ।
श्रीकाल्यै नमः ।
श्रीकङ्काल्यै नमः ।
श्रीकलकारिण्यै नमः ।
श्रीआरक्तायै नमः । 
श्रीरक्तनयनायै नमः ।
श्रीरक्तपानपरायणायै नमः ।
श्रीभवान्यै नमः ।
श्रीभूतिदायै नमः ।
श्रीभूत्यै नमः ।
श्रीभूतिदात्र्यै नमः ।
श्रीभैरव्यै नमः ।
श्रीभैरवाचारनिरतायै नमः ।
श्रीभूतसेवितायै नमः ।
श्रीभैरवसेवितायै नमः । 
श्रीभीमायै नमः ।
श्रीभीमेश्वरीदेव्यै नमः ।
श्रीभीमनादपरायणायै नमः ।
श्रीभवाराध्यायै नमः ।
श्रीभवनुतायै नमः ।
श्रीभवसागरतारिण्यै नमः ।
श्रीभद्रकाल्यै नमः ।
श्रीभद्रतनवे नमः ।
श्रीभद्ररूपायै नमः ।
श्रीभद्रिकाभद्ररूपायै नमः । 
श्रीमहाभद्रायै नमः ।
श्रीसुभद्रायै नमः ।
श्रीभद्रपालिन्यै नमः ।
श्रीसुभव्यायै नमः ।
श्रीभव्यवदनायै नमः ।
श्रीसुमुख्यै नमः ।
श्रीसिद्धसेवितायै नमः ।
श्रीसिद्धिदायै नमः ।
श्रीसिद्धिनिवहायै नमः ।
श्रीसिद्धनिषेवितायै नमः । 
श्रीअसिद्धनिषेवितायै नमः ।
श्रीशुभदायै नमः ।
श्रीशुभगायै नमः ।
श्रीशुद्धायै नमः ।
श्रीशुद्धसत्त्वायै नमः ।
श्रीशुभावहायै नमः ।
श्रीश्रेष्ठायै नमः ।
श्रीदृष्टिमयीदेव्यै नमः ।
श्रीदृष्टिसंहारकारिण्यै नमः ।
श्रीशर्वाण्यै नमः । 
श्रीसर्वगायै नमः ।
श्रीसर्वायै नमः ।
श्रीसर्वमङ्गलकारिण्यै नमः ।
श्रीशिवायै नमः ।
श्रीशान्तायै नमः ।
श्रीशान्तिरूपायै नमः ।
श्रीमृडान्यै नमः ।
श्रीमदनातुरायै नमः । 
श्री जयेन्द्र सरस्वती अष्टोत्तर



 ॐ जयाख्यया प्रसिद्धेन्द्रसरस्वत्यै नमो नमः ।
ॐ तमोऽपहग्रामरत्न सम्भूताय नमो नमः ।
ॐ महादेव महीदेवतनूजाय नमो नमः ।
ॐ सरस्वतीगर्भशुक्तिमुक्तारत्नाय ते नमः ।
ॐ सुब्रह्मण्याभिधानीतकौमाराय नमो नमः ।
ॐ मध्यार्जुनगजारण्याधीतवेदाय ते नमः ।
ॐ स्ववृत्तप्रणीताशेषाध्यापकाय नमो नमः ।
ॐ तपोनिष्ठगुरुज्ञातवैभवाय नमो नमः ।
ॐ गुर्वाज्ञापालनरतपितृदत्ताय ते नमः ।
ॐ जयाब्दे स्वीकृततुरीयाश्रमाय नमो नमः ।
ॐ जयाख्यया स्वगुरुणा दीक्षिताय नमः ।
ॐ ब्रह्मचर्यादेव लब्धप्रव्रज्याय नमो नमः ।
ॐ सर्वतीर्थतटे लब्धचतुर्थाश्रमिणे नमः ।
ॐ काषायवासस्संवीतशरीराय नमो नमः ।
ॐ वाक्यज्ञाचार्योपदिष्टमहावाक्याय ते नमः ।
ॐ नित्यं गुरुपदद्वन्द्वनतिशीलाय ते नमः ।
ॐ लीलया वामहस्ताग्रधृतदण्डाय ते नमः ।
ॐ भक्तोपहृतबिल्वादिमालाधर्त्रे नमो नमः ।
ॐ जम्बीरतुलसीमालाभूषिताय नमो नमः ।
ॐ कामकोटिमहापीठाधीश्वराय नमो नमः ।
ॐ सुवृत्तनृहृदाकाशनिवासाय नमो नमः ।
ॐ पादानतजनक्षेमसाधकाय नमो नमः ।
ॐ ज्ञानदानोक्तमधुरभाषणाय नमो नमः ।
ॐ गुरुप्रिया ब्रह्मसूत्रवृत्तिकर्त्रे नमो नमः ।
ॐ जगद्गुरुवरिष्ठाय महते महसे नमः ।
ॐ भारतीयसदाचारपरित्रात्रे नमो नमः । 
ॐ मर्यादोल्लङ्घिजनतासुदूराय नमो नमः ।
ॐ सर्वत्र समभावाप्तसौहृदाय नमो नमः ।
ॐ वीक्षाविवशिताशेषभावुकाय नमो नमः ।
ॐ श्रीकामकोटिपीठाग्र्यनिकेताय नमो नमः ।
ॐ कारुण्यपूरपूर्णान्तःकरणाय नमो नमः ।
ॐ श्रीचन्द्रशेखरचित्ताब्जाह्लादकाय नमो नमः ।
ॐ पूरितस्वगुरूत्तंससङ्कल्पाय नमो नमः ।
ॐ त्रिवारं चन्द्रमौलीशपूजकाय नमो नमः ।
ॐ कामाक्षीध्यानसंलीनमानसाय नमो नमः ।
ॐ सुनिर्मितस्वर्णरथवाहिताम्बाय ते नमः ।
ॐ परिष्कृताखिलाण्डेशीताटङ्काय नमो नमः ।
ॐ रत्नभूषितनृत्येशहस्तपादाय ते नमः ।
ॐ वेङ्कटाद्रीशकरुणाऽऽप्लाविताय नमो नमः ।
ॐ काश्यां श्रीकामकोटीशालयकर्त्रे नमो नमः ।
ॐ कामाक्ष्यम्बालयस्वर्णच्छादकाय नमो नमः ।
ॐ कुम्भाभिषेकसन्दीप्तालयव्राताय ते नमः ।
ॐ कालट्यां शङ्करयशःस्तम्भकर्त्रे नमो नमः ।
ॐ राजराजाख्यचोलस्य स्वर्णमौलिकृते नमः ।
ॐ गोशालानिर्मितिकृतगोरक्षाय नमो नमः ।
ॐ तीर्थेषु भगवत्पादस्मृत्यालयकृते नमः ।
ॐ सर्वत्र शङ्करमठनिर्वहित्रे नमो नमः ।
ॐ वेदशास्त्राधीतिगुप्तिदीक्षिताय नमो नमः ।
ॐ देहल्यां स्कन्दगिर्याख्यालयकर्त्रे नमो नमः ।
ॐ भारतीयकलाचारपोषकाय नमो नमः ।
ॐ स्तोत्रनीतिग्रन्थपाठरुचिदाय नमो नमः ।
ॐ युक्त्या हरिहराभेददर्शयित्रे नमो नमः ।
ॐ स्वभ्यस्तनियमोन्नीतध्यानयोगाय ते नमः ।
ॐ परधाम पराकाशलीनचित्ताय ते नमः ।
ॐ अनारततपस्याप्तदिव्यशोभाय ते नमः ।
ॐ शमादिषड्गुणयत स्वचित्ताय नमो नमः ।
ॐ समस्तभक्तजनतारक्षकाय नमो नमः ।
ॐ स्वशरीरप्रभाधूतहेमभासे नमो नमः ।
ॐ अग्नितप्तस्वर्णपट्टतुल्यफालाय ते नमः ।
ॐ विभूतिविलसच्छुभ्रललाटाय नमो नमः ।
ॐ परिव्राड्गणसंसेव्यपदाब्जाय नमो नमः ।
ॐ आर्तार्तिश्रवणापोहरतचित्ताय ते नमः ।
ॐ ग्रामीणजनतावृत्तिकल्पकाय नमो नमः ।
ॐ जनकल्याणरचनाचतुराय नमो नमः ।
ॐ जनजागरणासक्तिदायकाय नमो नमः ।
ॐ शङ्करोपज्ञसुपथसञ्चाराय नमो नमः ।
ॐ अद्वैतशास्त्ररक्षायां सुलग्नाय नमो नमः ।
ॐ प्राच्यप्रतीच्यविज्ञानयोजकाय नमो नमः ।
ॐ गैर्वाणवाणीसंरक्षाधुरीणाय नमो नमः ।
ॐ भगवत्पूज्यपादानामपराकृतये नमः ।
ॐ स्वपादयात्रया पूतभारताय नमो नमः ।
ॐ नेपालभूपमहितपदाब्जाय नमो नमः ।
ॐ चिन्तितक्षणसम्पूर्णसङ्कल्पाय नमो नमः ।
ॐ यथाज्ञकर्मकृद्वर्गोत्साहकाय नमो नमः ।
ॐ मधुराभाषणप्रीतस्वाश्रिताय नमो नमः ।
ॐ सर्वदा शुभमस्त्वित्याशंसकाय नमो नमः ।
ॐ चित्रीयमाणजनतासन्दृष्टाय नमो नमः ।
ॐ शरणागतदीनार्तपरित्रात्रे नमो नमः ।
ॐ सौभाग्यजनकापाङ्गवीक्षणाय नमो नमः ।
ॐ दुरवस्थितहृत्तापशामकाय नमो नमः ।
ॐ दुर्योज्यविमतव्रातसमन्वयकृते नमः ।
ॐ निरस्तालस्यमोहाशाविक्षेपाय नमो नमः ।
ॐ अनुगन्तृदुरासाद्यपदवेगाय ते नमः ।
ॐ अन्यैरज्ञातसङ्कल्पविचित्राय नमो नमः ।
ॐ सदा हसन्मुखाब्जानीताशेषशुचे नमः ।
ॐ नवषष्टितमाचार्यशङ्कराय नमो नमः ।
ॐ विविधाप्तजनप्रार्थ्यस्वगृहागतये नमः ।
ॐ जैत्रयात्राव्याजकृष्टजनस्वान्ताय ते नमः ।
ॐ वसिष्ठधौम्यसदृशदेशिकाय नमो नमः ।
ॐ असकृत्क्षेत्रतीर्थादियात्रातृप्ताय ते नमः ।
ॐ श्रीचन्द्रशेखरगुरोः एकशिष्याय ते नमः ।
ॐ गुरोर्हृद्गतसङ्कल्पक्रियान्वयकृते नमः ।
ॐ गुरुवर्यकृपालब्धसमभावाय ते नमः ।
ॐ योगलिङ्गेन्दुमौलीशपूजकाय नमो नमः ।
ॐ वयोवृद्धानाथजनाश्रयदाय नमो नमः ।
ॐ अवृत्तिकोपद्रुतानां वृत्तिदाय नमो नमः ।
ॐ स्वगुरूपज्ञया विश्वविद्यालयकृते नमः ।
ॐ विश्वराष्ट्रीयसद्ग्रन्थकोशागारकृते नमः ।
ॐ विद्यालयेषु सद्धर्मबोधदात्रे नमो नमः ।
ॐ देवालयेष्वर्चकादिवृत्तिदात्रे नमो नमः ।
ॐ कैलासे भगवत्पादमूर्तिस्थापकाय ते नमः ।
ॐ कैलासमानससरोयात्रापूतहृदे नमः ।
ॐ असमे बालसप्ताद्रिनाथालयकृते नमः ।
ॐ शिष्टवेदाध्यापकानां मानयित्रे नमो नमः ।
ॐ महारुद्रातिरुद्रादि तोषितेशाय ते नमः ।
ॐ असकृच्छतचण्डीभिरर्हिताम्बाय ते नमः ।
ॐ द्रविडागमगातॄणां ख्यापयित्रे नमो नमः ।
ॐ शिष्टशङ्करविजयस्वर्च्यमानपदे नमः ।
हनुमान अष्टोत्तर


 ॐ रामदासाग्रण्ये नम: ।
ॐ श्रीमते नम: ।
ॐ हनूमते नम: ।
ॐ पवनात्मजाय नम: ।
ॐ आञ्जनेयाय नम: ।
ॐ कपिश्रेष्ठाय नम: ।
ॐ केसरीप्रियनन्दनाय नम: ।
ॐ आरोपितांसयुगलरामरामानुजाय नम: ।
ॐ सुधिये नम: ।
ॐ सुग्रीवसचिवाय नम: ।
ॐ वालिजितसुग्रीवमाल्यदाय नम: ।
ॐ रामोपकारविस्मृतसुग्रीवसुमतिप्रदाय नम: ।
ॐ सुग्रीवसत्पक्षपातिने नम: ।
ॐ रामकार्यसुसाधकाय नम: ।
ॐ मैनाकाश्लेषकृते नम: ।’
ॐ नागजननीजीवनप्रदाय नम: ।
ॐ सर्वदेवस्तुताय नम: ।
ॐ सर्वदेवानन्दविवर्धनाय नम: ।
ॐ छायान्त्रमालाधारिणे नम: ।
ॐ छायाग्रहविभेदकाय नम: ।
ॐ सुमेरुसुमहाकायाय नम: ।
ॐ गोष्पदीकृतवारिधये नम: ।
ॐ बिडाल- सदृशाकाराय नम: ।
ॐ तप्तताम्रसमाननाय नम: ।
ॐ लङ्कानिभञ्जनाय नम: ।
ॐ सीताराममुद्राङ्गुलीयदाय नम: ।


ॐ रामचेष्टानुसारेण चेष्टाकृते नम: ।
ॐ विश्वमङ्गलाय नम: ।
ॐ श्रीरामहृदयाभिज्ञाय नम: ।
ॐ निःशेषसुरपूजिताय नम: ।
ॐ अशोकवनसञ्च्छेत्रे नम: ।
ॐ शिंशपावृक्षरक्षकाय नम: ।
ॐ सर्वरक्षोविनाशार्थं कृतकोलाहलध्वनये नम: ।
ॐ तलप्रहारतः क्षुण्णबहुकोटिनिशाचराय नम: ।
ॐ पुच्छघातविनिष्पिष्टबहुकोटिनराशनाय नम: ।
ॐ जम्बुमाल्यन्तकाय नम: ।
ॐ सर्वलोकान्तरसुताय नम: ।
ॐ कपये नम: ।
ॐ स्वदेहप्राप्त- पिष्टाङ्गदुर्धर्षाभिधराक्षसाय नम: ।
ॐ तलचूर्णितयूपाक्षाय नम: ।
ॐ विरूपाक्षनिबर्हणाय नम: ।
ॐ सुरान्तरात्मनः पुत्राय नम: ।
ॐ भासकर्ण- विनाशकाय नम: ।
ॐ अद्रिशृङ्गविनिष्पिष्टप्रघसाभिधराक्षसाय नम: ।
ॐ दशास्यमन्त्रिपुत्रघ्नाय नम: ।
ॐ पोथिताक्षकुमारकाय नम: ।
ॐ सुवञ्चितेन्द्रजिन्मुक्तनानाशस्त्रास्त्रवर्ष्टिकाय नम: ।
ॐ इन्द्रशत्रुविनिर्मुक्तशस्त्राचाल्यसुविग्रहाय नम: ।
ॐ सुखेच्छयेन्द्रजिन्मुक्तब्रह्मास्त्रवशगाय नम: ।
ॐ कृतिने नम: ।
ॐ तृणीकृतेन्द्रजित्पूर्वमहाराक्षसयूथपाय नम: ।
ॐ रामविक्रमसत्सिन्धुस्तोत्रकोपितरावणाय नम: ।
ॐ स्वपुच्छवह्निनिर्दग्धलङ्कालङ्कापुरेश्वराय नम: ।
ॐ वह्न्यनिर्दग्धाच्छपुच्छाय नम: ।
ॐ पुनर्लङ्घितवारिधये नम: ।
ॐ जलदैवतसूनवे नम: ।
ॐ सर्ववानरपूजिताय नम: ।
ॐ सन्तुष्टाय नम: ।
ॐ कपिभिः सार्धं सुग्रीवमधुभक्षकाय नम: ।
ॐ रामपादार्पितश्रीमच्चूडामणये नम: ।
ॐ अनाकुलाय नम: ।
ॐ भक्त्या कृतानेकरामप्रणामाय नम: ।
ॐ वायुनन्दनाय नम: ।
ॐ रामालिङ्गनतुष्टाङ्गाय नम: ।
ॐ रामप्राणप्रियाय नम: ।
ॐ शुचये नम: ।
ॐ रामपादैकनिरतविभीषणपरिग्रहाय नम: ।
ॐ विभीषणश्रियः कर्त्रे नम: ।
ॐ रामलालितनीतिमते नम: ।
ॐ विद्रावितेन्द्रशत्रवे नम: ।
ॐ लक्ष्मणैकयशःप्रदाय नम: ।
ॐ शिलाप्रहारनिष्पिष्टधूम्राक्षरथसारथये नम: ।
ॐ गिरिशृङ्गविनिष्पिष्टधूम्राक्षाय नम: ।
ॐ बलवारिधये नम: ।
ॐ अकम्पनप्राणहर्त्रे नम: ।
ॐ पूर्णविज्ञानचिद्घनाय नम: ।
ॐ रणाध्वरे कण्ठरोधमारितैकनिकुम्भकाय नम: ।
ॐ नरान्तकरथच्छेत्रे नम: ।
ॐ देवान्तकविनाशकाय नम: ।
ॐ मत्ताख्यराक्षसच्छेत्रे नम: । 
ॐ युद्धोन्मत्तनिकृन्तनाय नमः नम: ।
ॐ त्रिशिरोधनुषश्छेत्रे नम: ।
ॐ त्रिशिरःखड्गभञ्जनाय नम: ।
ॐ त्रिशिरोरथसंहारिणे नम: ।
ॐ त्रिशिरस्त्रिशिरोहराय नम: ।
ॐ रावणोरसि निष्पिष्टमुष्टये नम: ।
ॐ दैत्यभयङ्कराय नम: ।
ॐ वज्रकल्पमहामुष्टिघातचूर्णितरावणाय नम: ।
ॐ अशेषभुवनाधाराय नम: ।
ॐ लक्ष्मणोद्धरणक्षमाय नम: ।
ॐ सुग्रीवप्राणरक्षार्थं मक्षिकोपमविग्रहाय नम: ।
ॐ कुम्भकर्णत्रिशूलैकसञ्छेत्रे नम: ।
ॐ विष्णुभक्तिमते नम: ।
ॐ नागास्त्रास्पृष्टसद्देहाय नम: ।
ॐ कुम्भकर्णविमोहकाय नम: ।
ॐ शस्त्रास्त्रास्पृष्टसद्देहाय नम: ।
ॐ सुज्ञानिने नम: ।
ॐ रामसम्मताय नम: ।
ॐ अशेषकपिरक्षार्थमानीतौषधिपर्वताय नम: ।
ॐ स्वशक्त्या लक्ष्मणोद्धर्त्रे नम: ।
ॐ लक्ष्मणोज्जीवनप्रदाय नम: ।
ॐ लक्ष्मणप्राणरक्षार्थमानीतौषधिपर्वताय नम: ।
ॐ तपःकृशाङ्गभरते रामागमनशंसकाय नम: ।
ॐ रामस्तुतस्वमहिम्ने नम: ।
ॐ सदा सन्दृष्टराघवाय नम: ।
ॐ रामच्छत्रधराय देवाय नम: ।
ॐ वेदान्तपरिनिष्ठिताय नम: ।
ॐ मूलरामायणसुधासमुद्रस्नानतत्पराय नम: ।
ॐ बदरीषण्डमध्यस्थनारायणनिषेवकाय नम: ।

Tuesday, April 13, 2021

देवी सिद्धिदात्री

नवरात्रि के नौवें दिन

ब्रह्मांड की शुरुआत में भगवान रुद्र ने सृष्टि के लिए आदि-पराशक्ति की पूजा की थी। ऐसा माना जाता है कि देवी आदि-पराशक्ति का कोई रूप नहीं था। शक्ति की सर्वोच्च देवी, आदि-पराशक्ति, भगवान शिव के बाएं आधे भाग से सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट हुईं।

नवरात्रि पूजा
नवरात्रि के नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

शासी ग्रह
ऐसा माना जाता है कि देवी सिद्धिदात्री ग्रह केतु को दिशा और ऊर्जा प्रदान करती हैं। इसलिए ग्रह केतु उसके द्वारा शासित है।

शास्त्र
देवी सिद्धिदात्री कमल पर बैठती हैं और सिंह पर सवार होती हैं। उसे चार हाथों से दर्शाया गया है। उसके एक दाहिने हाथ में गदा, दूसरे दाहिने हाथ में चक्र, दूसरे हाथ में कमल का फूल और दूसरे बाएं हाथ में शंख है।

विवरण
वह देवी हैं, जो अपने भक्तों के लिए सभी प्रकार की सिद्धियों को रखती हैं और उनकी सेवा करती हैं। यहां तक ​​कि भगवान शिव ने देवी सिद्धिदात्री की कृपा से सभी सिद्धियां प्राप्त कीं। वह केवल मनुष्यों द्वारा ही नहीं, बल्कि देव, गंधर्व, असुर, यक्ष और सिद्धों द्वारा भी पूजी जाती है। जब भगवान सिद्धिदात्री अपने बाएं आधे भाग से प्रकट हुईं, तब भगवान शिव को अर्ध-नरिश्वर की उपाधि मिली।

Devanagari Name
सिद्धिदात्री

Favourite Flower
Night blooming jasmine (रात की रानी)

Mantra
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
Om Devi Siddhidatryai Namah॥

Prarthana
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
Siddha Gandharva Yakshadyairasurairamarairapi।
Sevyamana Sada Bhuyat Siddhida Siddhidayini॥

Stuti
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Ya Devi Sarvabhuteshu Maa Siddhidatri Rupena Samsthita।
Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥

Dhyana
वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
Vande Vanchhita Manorathartha Chandrardhakritashekharam।
Kamalasthitam Chaturbhuja Siddhidatri Yashasvinim॥
Swarnavarnna Nirvanachakra Sthitam Navam Durga Trinetram।
Shankha, Chakra, Gada, Padmadharam Siddhidatri Bhajem॥
Patambara Paridhanam Mriduhasya Nanalankara Bhushitam।
Manjira, Hara, Keyura, Kinkini, Ratnakundala Manditam॥
Praphulla Vandana Pallavadharam Kanta Kapolam Pin Payodharam।
Kamaniyam Lavanyam Shrinakati Nimnanabhi Nitambanim॥

Stotra
कञ्चनाभा शङ्खचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।
स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालङ्कार भूषिताम्।
नलिस्थिताम् नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोऽस्तुते॥
परमानन्दमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
विश्वकर्ती, विश्वभर्ती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्व वार्चिता, विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
भवसागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनीं।
मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
Kanchanabha Shankhachakragadapadmadhara Mukatojvalo।
Smeramukhi Shivapatni Siddhidatri Namoastute॥
Patambara Paridhanam Nanalankara Bhushitam।
Nalisthitam Nalanarkshi Siddhidatri Namoastute॥
Paramanandamayi Devi Parabrahma Paramatma।
Paramashakti, Paramabhakti, Siddhidatri Namoastute॥
Vishvakarti, Vishvabharti, Vishvaharti, Vishvaprita।
Vishva Varchita, Vishvatita Siddhidatri Namoastute॥
Bhuktimuktikarini Bhaktakashtanivarini।
Bhavasagara Tarini Siddhidatri Namoastute॥
Dharmarthakama Pradayini Mahamoha Vinashinim।
Mokshadayini Siddhidayini Siddhidatri Namoastute॥

Kavacha
ॐकारः पातु शीर्षो माँ, ऐं बीजम् माँ हृदयो।
हीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाट कर्णो श्रीं बीजम् पातु क्लीं बीजम् माँ नेत्रम्‌ घ्राणो।
कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै माँ सर्ववदनो॥
Omkarah Patu Shirsho Maa, Aim Bijam Maa Hridayo।
Him Bijam Sadapatu Nabho Griho Cha Padayo॥
Lalata Karno Shrim Bijam Patu Klim Bijam Maa Netram Ghrano।
Kapola Chibuko Hasau Patu Jagatprasutyai Maa Sarvavadano॥

Aarti
जय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता। तु भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम॥
तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदम्बें दाती तू सर्व सिद्धि है॥
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो॥
तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे॥
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया॥
सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली। जो है तेरे दर का ही अम्बें सवाली॥
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा। महा नंदा मंदिर में है वास तेरा॥
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता। भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता॥
देवी महागौरी


नवरात्रि के आठवें दिन

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सोलह वर्ष की आयु में देवी शैलपुत्री अत्यंत सुंदर थीं और उन्हें निष्पक्ष रूप से आशीर्वाद दिया गया था। अपने चरम निष्पक्ष परिसर के कारण उन्हें देवी महागौरी के नाम से जाना जाता था।

नवरात्रि पूजा
नवरात्रि के आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा की जाती है।

शासी ग्रह
ऐसा माना जाता है कि राहु ग्रह देवी महागौरी द्वारा शासित है।

शास्त्र
देवी महागौरी और साथ ही देवी शैलपुत्री का पर्वत बैल है और इस कारण उन्हें वृषारूढ़ा (वृषारूढ़) भी कहा जाता है। देवी महागौरी को चार हाथों से दर्शाया गया है। वह एक दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण करती है और दूसरा दाहिना हाथ अभय मुद्रा में रखती है। वह एक बाएं हाथ में डमरू को सजाती है और दूसरे बाएं हाथ को वरदा मुद्रा में रखती है।

विवरण
जैसा कि नाम से पता चलता है, देवी महागौरी अत्यंत न्यायप्रिय हैं। अपने उचित रंग के कारण देवी महागौरी की तुलना शंख, चंद्रमा और कुंड (कुंड) के सफेद फूल से की जाती है। वह केवल सफेद कपड़े पहनती है और उसी के कारण उसे श्वेताम्बरधरा (श्वेताम्बरधरा) भी कहा जाता है।

Devanagari Name
महागौरी

Favourite Flower
Night blooming jasmine (रात की रानी)

Mantra
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
Om Devi Mahagauryai Namah॥

Prarthana
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
Shwete Vrishesamarudha Shwetambaradhara Shuchih।
Mahagauri Shubham Dadyanmahadeva Pramodada॥

Stuti
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Ya Devi Sarvabhuteshu Maa Mahagauri Rupena Samsthita।
Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥

Dhyana
वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम्॥
पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम्॥
Vande Vanchhita Kamarthe Chandrardhakritashekharam।
Simharudha Chaturbhuja Mahagauri Yashasvinim॥
Purnandu Nibham Gauri Somachakrasthitam Ashtamam Mahagauri Trinetram।
Varabhitikaram Trishula Damarudharam Mahagauri Bhajem॥
Patambara Paridhanam Mriduhasya Nanalankara Bhushitam।
Manjira, Hara, Keyura, Kinkini, Ratnakundala Manditam॥
Praphulla Vandana Pallavadharam Kanta Kapolam Trailokya Mohanam।
Kamaniyam Lavanyam Mrinalam Chandana Gandhaliptam॥

Stotra
सर्वसङ्कट हन्त्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदायनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यमङ्गल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददम् चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
Sarvasankata Hantri Tvamhi Dhana Aishwarya Pradayanim।
Jnanada Chaturvedamayi Mahagauri Pranamamyaham॥
Sukha Shantidatri Dhana Dhanya Pradayanim।
Damaruvadya Priya Adya Mahagauri Pranamamyaham॥
Trailokyamangala Tvamhi Tapatraya Harinim।
Vadadam Chaitanyamayi Mahagauri Pranamamyaham॥

Kavacha
ॐकारः पातु शीर्षो माँ, हीं बीजम् माँ, हृदयो।
क्लीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाटम् कर्णो हुं बीजम् पातु महागौरी माँ नेत्रम्‌ घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा माँ सर्ववदनो॥
Omkarah Patu Shirsho Maa, Him Bijam Maa, Hridayo।
Klim Bijam Sadapatu Nabho Griho Cha Padayo॥
Lalatam Karno Hum Bijam Patu Mahagauri Maa Netram Ghrano।
Kapota Chibuko Phat Patu Swaha Maa Sarvavadano॥

Aarti
जय महागौरी जगत की माया। जय उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहा निवास॥
चन्द्रकली और ममता अम्बे। जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे॥
भीमा देवी विमला माता। कौशिक देवी जग विख्यता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती (सत) हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥
देवी कालरात्रि


नवरात्रि के सातवें दिन

जब देवी पार्वती ने शुंभ और निशुंभ नाम के राक्षसों को मारने के लिए बाहरी सुनहरी त्वचा को हटाया, तो उन्हें देवी कालरात्रि के नाम से जाना गया। कालरात्रि देवी पार्वती का उग्र और उग्र रूप है।

नवरात्रि पूजा
नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है।

शासी ग्रह
ऐसा माना जाता है कि शनि ग्रह को देवी कालरात्रि द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

शास्त्र
देवी कालरात्रि का रंग गहरा काला है और वह गधे पर सवार हैं। उसे चार हाथों से दर्शाया गया है। उसके दाहिने हाथ अभय और वरदा मुद्रा में हैं और वह अपने बाएं हाथों में तलवार और घातक लोहे का हुक लगाती है।

विवरण
यद्यपि देवी कालरात्रि देवी पार्वती का सबसे क्रूर रूप है, वह अपने भक्तों को अभय और वरदा मुद्राएं देती हैं। अपने क्रूर रूप में शुभ या शुभ शक्ति के कारण देवी कालरात्रि को देवी शुभंकरी (सुन्दरी) के रूप में भी जाना जाता है।

देवी कालरात्रि के नाम को देवी कालरात्रि और देवी कालरात्रि के रूप में भी जाना जाता है।

Devanagari Name
कालरात्रि

Favourite Flower
Night blooming jasmine (रात की रानी)

Mantra
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
Om Devi Kalaratryai Namah॥

Prarthana
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
Ekaveni Japakarnapura Nagna Kharasthita।
Lamboshthi Karnikakarni Tailabhyakta Sharirini॥
Vamapadollasalloha Latakantakabhushana।
Vardhana Murdhadhwaja Krishna Kalaratrirbhayankari॥

Stuti
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Ya Devi Sarvabhuteshu Ma Kalaratri Rupena Samsthita।
Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥

Dhyana
करालवन्दना घोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिम् करालिंका दिव्याम् विद्युतमाला विभूषिताम्॥
दिव्यम् लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयम् वरदाम् चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम्॥
महामेघ प्रभाम् श्यामाम् तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥
सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवम् सचियन्तयेत् कालरात्रिम् सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥
Karalavandana Ghoram Muktakeshi Chaturbhujam।
Kalaratrim Karalimka Divyam Vidyutamala Vibhushitam॥
Divyam Lauhavajra Khadga Vamoghordhva Karambujam।
Abhayam Varadam Chaiva Dakshinodhvaghah Parnikam Mam॥
Mahamegha Prabham Shyamam Taksha Chaiva Gardabharudha।
Ghoradamsha Karalasyam Pinonnata Payodharam॥
Sukha Prasanna Vadana Smeranna Saroruham।
Evam Sachiyantayet Kalaratrim Sarvakam Samriddhidam॥

Stotra
हीं कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥
Him Kalaratri Shrim Karali Cha Klim Kalyani Kalawati।
Kalamata Kalidarpadhni Kamadisha Kupanvita॥
Kamabijajapanda Kamabijaswarupini।
Kumatighni Kulinartinashini Kula Kamini॥
Klim Hrim Shrim Mantrvarnena Kalakantakaghatini।
Kripamayi Kripadhara Kripapara Kripagama॥

Kavacha
ऊँ क्लीं मे हृदयम् पातु पादौ श्रीकालरात्रि।
ललाटे सततम् पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥
रसनाम् पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशङ्करभामिनी॥
वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥
Om Klim Me Hridayam Patu Padau Shrikalaratri।
Lalate Satatam Patu Tushtagraha Nivarini॥
Rasanam Patu Kaumari, Bhairavi Chakshushorbhama।
Katau Prishthe Maheshani, Karnoshankarabhamini॥
Varjitani Tu Sthanabhi Yani Cha Kavachena Hi।
Tani Sarvani Me Devisatatampatu Stambhini॥

Aarti
कालरात्रि जय जय महाकाली। काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली माँ जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि माँ तेरी जय॥